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जनसंख्या में संतुलन साधने की कोशिश

बीते 37 सालों में इस नीति का दुष्परिणाम यह हुआ है कि चीन में लिंगानुपात बुरी तरह गड़बड़ा गया है।

जनसंख्या में संतुलन साधने की कोशिश

नई दिल्ली. चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ने वन चाइल्ड पॉलिसी को खत्म कर दिया है। अब उसने हम दो, हमारे दो के सिंद्धात को लागू किया है। इसके तहत शादीशुदा लोगों को दो बच्चे पैदा करने की छूट होगी। 140 करोड़ आबादी के साथ चीन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और अर्थव्यवस्था के लिहाज से दूसरा। बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रण में करने के लिए वहां की तत्कालीन सरकार ने 1979 में वन चाइल्ड पॉलिसी को बड़ी कड़ाई के साथ लागू किया था।

बीते 37 सालों में इस नीति का दुष्परिणाम यह हुआ है कि चीन में लिंगानुपात बुरी तरह गड़बड़ा गया है। साथ ही वहां जवानों की संख्या तेजी से कम होने लगी है। कहा जा रहा हैकि आज से पंद्रह साल बाद वहां की 75 फीसदी आबादी बूढ़ी हो जाएगी। वहां साठ के दशक में जब जनसंख्या विस्फोट हुआ था तो र्शमिकों की संख्या तेजी से बढ़ी थी, वहीं आज आलम यह है कि उसके उद्योग धंधों को दिहाड़ी मजदूर तक मिलने कठिन हो गए हैं।

आंकड़ों के अनुसार 2025 तक देश में काम करने के लिए युवाओं का टोटा हो जाएगा। दरअसल, वन चाइल्ड पॉलिसी लागू करने के बाद से अब तक वहां 40 करोड़ बच्चों का जन्म रोका गया है। वहीं अनचाहे गर्भ की वजह से हजारों महिलाओं को गर्भपात कराना पड़ा है। जानकारों का कहना है कि इन्हीं आर्थिक मजबूरियों और समाज के बिगड़ते ढांचे को ठीक करने के लिए चीन को वन चाइल्ड पॉलिसी को खत्म करने का फैसला करने पर विवश होना पड़ा है। उसे लगता है कि इस तरह वह अपनी आबादी में एक संतुलन साध सकता है। अर्थात जवानों और बूढ़ों का बराबर अनुपात होने से देश में कामगारों की कमी नहीं होगी और दूसरी ओर लिंगानुपात ठीक होने से बड़े पैमाने पर लड़के कुवांरे नहीं रहेंगे।

चीन ने जब वन चाइल्ड पॉलिसी लागू किया था तब इसके सर्मथन में दो-तीन कारण गिनाए गए थे। उसने कहा था कि आबादी कम होगी तो बिजली, पानी, भोजन अर्थात संसाधनों पर दबाव कम होगा। उसने कहा था कि जनसंख्या अर्थव्यवस्था पर बोझ बन जाती है। वहां की सत्तारूढ़ पार्टी ने दावा किया हैकि चीन ने जो प्रगति की है उसमें कम हुई आबादी का बड़ा हाथ है। आबादी के लिहाज से चीन के बाद भारत का ही स्थान है।

अनुमान है कि इस मामले में आने वाले कुछ दशकों में भारत चीन को पीछे छोड़ देगा। बहरहाल, भारत में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कभी गंभीर विर्मश नहीं हुआ है। हालांकि बड़ी आबादी के कुछ लाभ हैं तो कुछ हानियां भी हैं। आज भारत में यह कईसमस्याओं की वजह बन गई है। महंगाई, बेरोजगारी और कम पड़ते संसाधन इसकी देन माने जा सकते हैं। आपातकाल के दौरान आबादी को नियंत्रित करने का एक प्रयास हुआ था, लेकिन कुछ लोग के अतिउत्साह में वह कार्यक्रम विफल हो गया था।

बाद में किसी सरकार ने नसबंदी का अभियान नहीं चलाया। चीन ने जो तरक्की की है वह दुनिया के सामने है। हालांकि वहां लोकतंत्र नहीं है, जबकि भारत में हालात अलग हैं। यहां हर पांच साल में चुनाव होता है। यह भी एक कारण हैकि कोई भी सत्तारूढ़ पार्टी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती जिसे विपक्षी दल मुद्दा बना सकें, लेकिन यहां भी इस समस्या पर देर सबेर गहराई से मंथन करना पड़ेगा।

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