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सुशासन की तरफ मोदी सरकार ने बढ़ाए कदम

तीसरे दिन कैबिनेट की बैठक में दस सूत्री एजेंडा जारी कर इसके संकेत दे दिये कि उसकी प्राथमिकता, दिशा और दृष्टि क्या है?

सुशासन की तरफ मोदी सरकार ने बढ़ाए कदम
नई दिल्ली. नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली नई राजग सरकार ने कामकाज संभालने के साथ ही अपनी दिशा और दृष्टि स्पष्ट कर दी है। शपथ ग्रहण करने के अगले ही दिन सात राष्ट्र प्रमुखों से उच्च स्तरीय बातचीत के बाद अनुच्छेद-370 पर एक राज्यमंत्री के बयान और मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की शैक्षिक योग्यता के दो अप्रिय विषयों को छोड़ दें तो कह सकते हैं कि मोदी सरकार ने बहुत सधी हुई शुरुआत की है। दूसरे दिन जहां प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंत्रियों को हिदायत दी कि वे अपने रिश्तेदारों को पीए अथवा पीएस नहीं बनाएं और ना करीबियों को ठेके दिलवाने में मदद करें।
तीसरे दिन कैबिनेट की बैठक में दस सूत्री एजेंडा जारी कर इसके संकेत दे दिये कि उसकी प्राथमिकता, दिशा और दृष्टि क्या है? पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह फैसले नहीं ले पाने के चलते विरोधियों के निशाने पर रहते थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह कहकर चौंका दिया था कि नौकरशाहों में यह खौफ है कि फाइलों पर हस्ताक्षर करके वे फंसेंगे। बृहस्पतिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री ने जो एजेंडा पेश किया, उसमें नौकरशाही में विश्वास बहाली का सूत्र पहले स्थान पर है। इसके अलावा नए विचारों का स्वागत करने और शिक्षा, स्वास्थ्य और जल के प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लिया गया है।
सरकारी कामकाज और फैसलों में पारदर्शिता लाने, जीओएम की बजाय मंत्रालयों में बेहतर समन्वय स्थापित करने, जनता के हितों को प्राथमिकता देने, आर्थिक मामलों पर विशेष गौर करने, बुनियादी ढांचे में सुधार करने, सभी नीतियों और कार्यक्रमों को समय-सीमा के भीतर पूरा करने और सरकारी नीतियों में स्थिरता लाने का संकल्प भी लिया गया है। तीन महत्वपूर्ण बातें प्रधानमंत्री ने कही है कि मंत्री गवर्नेंस, डिलीवरी और इम्प्लीमेंटेशन सुनिश्चित करें। यानी सुशासन दें। जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और योजनाओं व कार्यक्रमों पर अमल हो। प्रधानमंत्री खुद जितनी तेजी से काम करने के आदी हैं, वैसी की फुर्ती वे अपनी मंत्री परिषद से भी चाहते हैं। उन्होंने सभी मंत्रियों से सौ दिन का रोडमैप तैयार करने और उस पर तेजी से बढ़ने की गुजारिश की है।
सबसे अहम बात उन्होंने यह कही है कि नीतियां बनाते समय राज्यों की तरफ से आने वाले सुझावों पर गौर करें और राज्य सरकारों से आने वाले पत्रों का तुरंत जवाब दें। कैबिनेट मंत्री अपने राज्य मंत्रियों से काम साझा करें। ये सारी हिदायतें ऐसी हैं, जिनसे पता चलता है कि प्रधानमंत्री को उन तमाम दिक्कतों की समझ है, जिनसे काम-काज में परेशानियां खड़ी होती हैं। फैसले लेने, उन्हें क्रियान्वित करने और लोगों तक फायदे पहुंचाने में बाधाएं पेश आती हैं। कैबिनेट की बैठक में कुछ और अहम फैसले भी हुए। जैसे, संसद का संक्षिप्त सत्र 4 से 12 जून तक होगा, जिसमें नये चुने गये सदस्यों को शपथ दिलाने, नया लोकसभा अध्यक्ष चुनने का काम तो होगा ही, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी संयुक्त सदन को संबोधित भी करेंगे।
यह परंपरा है कि जब भी नई लोकसभा चुनी जाती है, राष्ट्रपति उसे संबोधित करते हैं। राष्ट्रपति दरअसल, अपने संबोधन से नई सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और दृष्टि से देश को अवगत कराते हैं। बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के अपने समकक्ष ली क्विंग से भी बात की। चीनी प्रधानमंत्री ने शीघ्र ही उनसे उच्च स्तरीय मसलों पर बातचीत की इच्छा व्यक्त की। इस सबसे साफ है कि नई सरकार तेजी से न केवल फैसले ले रही है बल्कि सही दिशा में बढ़ते हुए यह संकेत भी दे रही है कि चुनाव के समय उन्होंने जो वादे किये थे, उन्हें पूरा करने के प्रति वह पहले ही दिन से प्रतिबद्ध है।
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