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सार्क के मंच पर विश्वनेता के रूप में नजर आए मोदी

सार्क में सबके आकर्षक का केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ।

सार्क के मंच पर विश्वनेता के रूप में नजर आए मोदी

नेपाल के काठमांडू में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के 18वें शिखर सम्मेलन में दक्षिण एशिया के आठ देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस क्षेत्र से जुड़ी तमाम समस्याओं और उनका निदान खोजने के लिए दो दिन से चर्चा कर रहे हैं। इसके अलावा ऑब्र्जवर की हैसियत से भी नौ देशों के प्रतिनिधि यहां उपस्थित हैं, लेकिन सबके आकर्षक का केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं। देश-विदेश में नरेंद्र मोदी के अब तक के संबोधनों को देखें तो पाते हैं कि उनमें देश को समस्याओं से मुक्त कर विकास के रास्ते पर लाने की काफी ललक है। इस तरह एक ऐसे देशभक्त के रूप में उनकी छवि उभरती है जो हर कदम भारत माता के लिए कुछ करने की आकांक्षा के साथ उठाते हैं। बुधवार को सार्क सम्मेलन में वे एक विश्वनेता के रूप में नजर आए। वे यहां भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया के नेता के रूप में बोलते हुए प्रतीत हो रहे थे। उनकी चिंता के केंद्र में पूरा दक्षिण एशिया का क्षेत्र था।

दक्षिण एशियाई देशों को किस तरह आगे ले जाया जाए और दूसरे संगठनों के मुकाबले सार्क को किस तरह विकास के रास्ते पर लाया जाए इसका पूरा खाका उन्होंने पेश किया है। उन्होंने ठीक कहा है कि सार्क देश भौगोलिक रूप से पास-पास स्थित तो हैं, लेकिन समय की मांग है कि ये देश साथ-साथ भी खड़े हों। यदि दक्षिण एशिया को आगे ले जाना है तो आपसी मतभेदों को दूर करना होगा है। क्योंकि इसी वजह से करीब 28 साल पुराना यह संगठन आज भी सफल साबित नहीं हो पाया है। सार्क देशों को निराशावादी और संशयवादी नजरिया छोड़कर आशावादी नजरिया अपनाना होगा और एक दूसरे पर भरोसा करना सीखना होगा। आमतौर पर सार्क के सदस्य देशों के बीच सहयोग कम और कटुता ही अधिक रही है, जिसके कारण यह मृतप्राय सा हो गया है। यही वजह है कि सार्क देशों के बीच आपसी व्यापार सिर्फ छह फीसदी है।

आज पूरी दुनिया परस्पर आर्थिक सहयोग के महत्व को समझने लगी है। सार्क देशों को उनसे सीखना चाहिए। भारत सार्क का सबसे बड़ा देश है, लिहाजा इसकी भूमिका भी बड़ी है। मोदी ने इस संबंध में कुछ कदम उठाने की घोषणा की है, जैसे-भारत सार्क देशों के लिए तीन से पांच साल का व्यावसायिक वीजा जारी करेगा, 2016 में एक उपग्रह प्रक्षेपित करेगा, छात्रों को ई-लाइब्रेरी के जरिये जोड़ेगा और तत्काल मेडिकल वीजा देगा।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने सुझाव दिया कि सार्क देशों के बीच संपर्क लिंक बेहतर बनाने के साथ-साथ बिजली की समस्या को दूर करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। इसके लिए रेल, सड़क और हवाई यातायात को मजबूत बनाने का सुझाव महत्वपूर्ण है। उन्होंने उदाहरण दिया कि सार्क देशों को दूसरे कई देशों में जाने के लिए भारत की परिक्रमा करनी पड़ती है। जिससे उनकी आवागमन लागत दस गुनी बढ़ जाती है। इसे कम किया जा सकता है यदि सीमाओं को परिवहन के लिए खोला जाए। यह सच है कि पाकिस्तान के हठ के कारण सार्क अपना मुकाम हासिल नहीं कर पा रहा है।

लगता है कि वह रिश्तों को परवान चढ़ते नहीं देखना चाहता है। यही वजह है कि पाक के प्रधानमंत्री जहां समस्याओं को ही गिनाते रहे, हालांकि उन्होंने आतंकवाद का जिक्र तक नहीं किया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी समस्याओं के समाधान के रास्ते सुझाए। इस प्रकार मोदी और दूसरे नेताओं में सोच के स्तर पर भी बड़ा अंतर है। यह दर्शन ही उन्हें दूसरे नेताओं से अलग कर रहा है।

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