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चिंतन: पाक के खिलाफ कूटनीतिक पेशबंदी में अफ-कतर अहम

काबुल से दोस्ती नई दिल्ली के लिए इस्लामाबाद पर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिहाज से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

चिंतन: पाक के खिलाफ कूटनीतिक पेशबंदी में अफ-कतर अहम
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पांच देशों के दौरे पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अहम देश अफगानिस्तान और कतर की यात्रा पूरी कर ली है। दोनों ही देश कूटनीतिक रूप से भारत के लिए अहम हैं। अफगानिस्तान से भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत रहे हैं। काबुल से दोस्ती नई दिल्ली के लिए इस्लामाबाद पर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिहाज से भी बहुत महत्वपूर्ण है। मोदी जब से पीएम बने हैं भारत की कुंद पड़ी कूटनीति को धार दे रहे हैं।

भारत और अफगानिस्तान दोनों आतंकवाद पीड़ित देश रहे हैं। दोनों को ही आतंक की पीड़ा पहुंचाने में पाकिस्तान की कहीं न कहीं भूमिका रही है। तालिबान, अलकायदा के वहशियाना आतंक के चलते अफगानिस्तान लहूलुहान रहा है। अलकायदा के खिलाफ अमेरिकी हमले के चलते भी अफगानिस्तान को बर्बादी झेलनी पड़ी है। शीत युद्ध के दौर में रूस ने भी कई वर्षों तक अफगानिस्तान का अमेरिका के खिलाफ इस्तेमाल किया है। अब अतीत को पीछे छोड़ते हुए अफगानिस्तान फिर से एक मजबूत राष्ट्र के रूप में खड़ा होने को तैयार है और भारत इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है।

कुछ महीने पहले ही पीएम मोदी ने भारत के सहयोग से बनी अफगान संसद का उद्घाटन किया था। इस यात्रा में उन्होंने हेरात प्रांत में 1700 करोड़ रुपये की लागत से बनी डैम अफगानिस्तान की जनता को सर्मपित किया है। इस डैम को मैत्री बांध का नाम दिया गया है। इससे 75000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी और 45 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सकेगा। यह डैम ईरान सीमा के नजदीक है। पाकिस्तान को अलग-थलग रखने के लिए भारत ने ईरान से अभी-अभी चाबहार डील फाइनल किया है। भारत की कोशिश है कि अफगानिस्तान तक जाने के लिए उसे पाकिस्तान का मुंह नहीं देखना पड़े। यह ईरान के सहयोग के बिना संभव नहीं है।

इसलिए भारत ने चाबहार पोर्ट डील से ईरान के साथ संबंधों को और मजबूत किया है। मोदी ने बहुत कम समय में अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी से अच्छे संबंध बनाए हैं। आने वाले समय में भारत और अफगानिस्तान आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान पर बड़ा दबाव बनाने में सफल होंगे। खाड़ी क्षेत्र में कतर भारत का बड़ा आर्थिक सहयोगी है। वित्त वर्ष 2014-15 में कतर के साथ ट्रेड 15 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया था। भारत को प्राकृतिक गैस मुहैया कराने वाला सबसे बड़ा स्रोत कतर ही है। पिछले साल 65 फीसदी सीएनजी कतर से आई थी।

छह लाख से ज्यादा भारतीय भी यहां रहते हैं। इस मायने में मोदी की कतर यात्रा खाड़ी देशों में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगी। आठ साल बाद कोई भारतीय पीएम कतर गए हैं। 2008 में डा. मनमोहन सिंह ने पीएम के रूप में यहां का दौरा किया था। मोदी के पीएम बनने के बाद कतर के शेख अब्दुल्लाह बिन नसीर अल थनी 2015 में भारत आए थे। शेख भारत आने वाले कतर के पहले शासक थे। इसका मतलब पूर्ववर्ती सरकारों ने कतर से संबंधों को मजबूती देने के लिए उस तरह की कोशिश नहीं की, जैसा मोदी कर रहे हैं।

खाड़ी और मध्य व पश्चिम एशिया में सऊदी अरब, यूएई, ईरान व सोवियत रूस से अलग हुए पांच देशों-उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, तर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान के बाद पीएम की कतर यात्रा कूटनीतिक रूप से चीन और पाकिस्तान पर दबाव बनाने में अहम है और आर्थिक रूप से भी भारत के हक में है। भारत और कतर में सात करार हुए हैं। इन देशों में प्राकृतिक संसाधानों के अलावा रिर्जव कैपिटल के रूप में बड़ी पूंजी है, जिसका पीएम भारत में इस्तेमाल करना चाहते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री को देश में बड़े आर्थिक सुधार को तेजी से अंजाम देने होंगे।

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