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पड़ोसी से रिश्ते सुधारने की कोशिशों में रुकावटें

नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में भारत विरोधी अभियान को हवा मिल रही थी। चीन और पाकिस्तान तल्ख थे ही।

पड़ोसी से रिश्ते सुधारने की कोशिशों में रुकावटें
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लगता नहीं है कि पाकिस्तान और चीन भारत के प्रति अपनी उकसाऊ हरकतों से बाज आने वाला है। हिंदुस्तान लाख कोशिश कर ले, लेकिन चीन और पाक समय-समय पर चुभने वाली हरकत जरूर करते रहते हैं। ताजा-ताजा जहां चीन ने दक्षिण चीन सागर में अपने आधिपत्य को लेकर भारत पर आंख तरेरी है, वहीं पाकिस्तान ने 24 घंटे में तीन बार सीजफायर तोड़ा है। चीन ने दो टूक धमकी दी है कि इस सागर में भारत कोई भी तेल-गैस खोज अभियान उनसे पूछे बिना नहीं करे।
हालांकि चीन की यह धमकी अमेरिका की उस हिदायत के जवाब में दी गई लगती है, जिसमें ओबामा सरकार ने चीन को दक्षिण सागर में किसी भी तरह कृत्रिम टापू के निर्माण पर आपत्ति जताई है। यह किसी से छिपा नहीं है कि चीन दक्षिण सागर में चोरी छिपे अपनी कई सैन्य गतिविधियों व निर्माण को अंजाम देता रहता है। इस पर भारत की भी पैनी नजर है और इस क्षेत्र में चीन की पकड़ को कमजोर करने के लिए भारत सरकार र्शीलंका, सेशेल्स, म्यांमार, बांग्लादेश, मालदीव, थाईलैंड से कूटनीतिक रिश्ते सुधार रही है। भारत ने हाल में जापान, वियतनाम, उत्तर कोरिया और मंगोलिया की यात्रा की है और इन देशों से अपने संबंध सुधारे हैं। चीन को यह खटक रहा है। इसके साथ ही वह अमेरिका के किसी दबाव को कम करने के लिए भारत को कूटनीतिक हथियार बनाता रहा है।
चीन भारत-पाक के खराब संबंध का भी कूटनीतिक लाभ उठाता रहा है। पाकिस्तान को साथ देकर। हालांकि यह भी नहीं है भारत और चीन में बड़ी तनातनी हो। भारत ने हमेशा चीन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। पाकिस्तान से भी भारत शांति ही चाहता है, लेकिन दोनों देशों का रवैया भारत की इच्छा के अनुरूप नहीं रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथग्रहण समारोह में पाक पीएम नवाज शरीफ को न्यौता देकर साफ संकेत दे दिया था कि भारत अपने पड़ोसियों से प्रगाढ़ और मधुर रिश्ते चाहता है। पूर्व पीएम डा. मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार की उदासी के चलते पड़ोसियों से भारत के रिश्ते सर्द हो गए थो।
नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में भारत विरोधी अभियान को हवा मिल रही थी। चीन और पाकिस्तान तल्ख थे ही। नरेंद्र मोदी इस बात को समझ रहे थे, इसलिए सत्ता में आने के साथ ही उन्होंने सभी पड़ोसियों से रचनात्मक रिश्ते की पहल की। उन्होंने भूटान, नेपाल, र्शीलंका की यात्रा की। चीनी राष्ट्रपति ने भारत की यात्रा की। दोनों देशों ने साथ मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। वे छह जून को बांग्लादेश जा रहे हैं। बांग्लादेश 1971 में पाक से मुक्ति दिलाने में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई के योगदान के लिए उन्हें सम्मानित करेगा। मोदी सरकार की पहल का ही नतीजा है कि पड़ोसियों से भारत के रिश्ते सुधरे हैं। पर चीन व पाक भारत की राह में रुकावट बने हुए हैं। जबकि भारत व पड़ोसियों की समृद्धि के लिए जरूरी है कि सीमाओं पर शांति हो, यह तभी संभव है, जब पाक-चीन भारत के प्रति अपने रवैये में बदलाव लाए। तनातनी से किसी का भला नहीं होने वाला।
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