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वित्तीय समावेशन के लिए प्रधानमंत्री जनधन योजना

यह योजना आम आदमी को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा तो देगी ही, इससे बैंकिंग और बीमा सेक्टर में भी तेजी आएगी।

वित्तीय समावेशन के लिए प्रधानमंत्री जनधन योजना
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भारत में वित्तीय समावेशन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसके पीछे यह विचार था कि यदि देश गरीबी से पार पाना चाहता है, योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना चाहता है, सब्सिडी के बंदरबांट से निजात पाना चाहता है, कुलमिलाकर विकास के लाभ को अंतिम आदमी तक पहुंचाना चाहता है, तो वित्तीय समावेशन इसकी सीढ़ी बन सकती है। वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को हासिल करने में प्रधानमंत्री जन धन योजना अहम साबित हो सकती है।
इसका उद्देश्य देश में सभी परिवारों को बैंकिंग से जोड़ना। इससे देश के बड़े हिस्से की बैंकों तक पहुंच सुनिश्चित होगी और वे अर्थव्यवस्था के मुख्यधारा से जुड़ेंगे। अभी देश के 40 फीसदी आबादी इससे बाहर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से इसकी घोषणा की थी। बृहस्पतिवार को देश भर में इसकी शुरुआत भी कर दी गई। इस योजना के तहत देश भर के आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे 7.5 करोड़ परिवारों के दो लोगों का बैंकों में खाता खोला जाना है, जिनका पहले से बैंकों में कोई खाता नहीं है। इस प्रकार कुल 15 करोड़ लोगों के बैंक खाते खोलने का लक्ष्य है।
बैंक खाता खुल जाने पर खाताधारी को रूपे नामक डेबिट कार्ड मिलेगा। साथ की खाताधारक को एक लाख रुपये की दुर्घटना बीमा मिलेगा। फिर अगले छह महीनों में हर खाते पर 5,000 रुपये के ओवर-ड्राफ्ट की सुविधा भी देने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्रालय का मानना है कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बैंक खाता खुल जाने के बाद हर परिवार को बैंकिंग और कर्ज की सुविधाएं सुलभ हो जाएंगी। इससे उन्हें साहूकारों के चंगुल से निकलने, आपातकालीन जरूरतों के चलते पैदा होने वाले वित्तीय संकटों से खुद को दूर रखने और तरह-तरह के वित्तीय उत्पादों से लाभान्वित होने का मौका मिलेगा।
यह योजना गैरजरूरतमंदों को सब्सिडी रोकने में मददगार साबित हो सकती है। सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत नागरिकों को सब्सिडी देती है। अब सब्सिडी को सीधे कैश के रूप में हस्तांतरण किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए सभी खातों को आधार के साथ जोड़ा जाएगा। वहीं किसान कार्ड अब इसी योजना के तहत जारी होंगे। और मनरेगा के तहत मजदूरी का भुगतान इन्हीं खातों के जरिए होगा। असंगठित क्षेत्र में पेंशन योजना को भी इसी से जोड़ा जाएगा। यह योजना दो चरणों में लागू होगी। पहला चरण 14 अगस्त 2015 तक होगा और दूसरा चरण 15 अगस्त 2015 से 14 अगस्त 2018 तक चलेगा। इससे नगदी का इस्तेमाल कम होने से भ्रष्टाचार भी कम होगा। इस प्रकार इसका अर्थ सिर्फ खाता खोलना ही नहीं बल्कि इससे बढ़कर है।
यह योजना आम आदमी को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा तो देगी ही, इससे बैंकिंग और बीमा सेक्टर में भी तेजी आएगी। इससे अर्थव्यवस्था का विस्तार होगा, गरीबों को बचत करने का माध्यम मिलेगा। देश में एक समस्या रही है कि योजनाओं का शुभारंभ तो काफी जोर शोर से होता है परंतु वे शुरुआती कुछ दिनों के बाद दम तोड़ने लगती हैं, उनमें शिथिलता आ जाती है। नरेंद्र मोदी सरकार के समक्ष चुनौती होगी कि वे इसे तय समय में पूरा करें। हालांकि खाता खोलने के लिए करीब 50 हजार कॉरस्पॉन्डेंट्स को तैयार करना और ओवरड्राफ्ट की भरपायी के लिए फंड जुटाना भी एक चुनौती है। यदि यह योजना साकार होती है तो मोदी सरकार की एक बड़ी कामयाबी मानी जाएगी।
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