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स्वस्थ लोकतंत्र में निजी हमले के लिए जगह नहीं

प्रियंका ने महिला जासूसी कांड के बहाने निशाना साधा कि ‘मोदी बंद कमरे में महिलाओं के फोन सुनते हैं।

स्वस्थ लोकतंत्र में निजी हमले के लिए जगह नहीं
चुनाव प्रचार के आक्रामक होने के साथ ही व्यक्तिगत हमले भी तेज होते जा रहे हैं। अब प्रियंका गांधी वाड्रा भी इसमें कूद पड़ी हैं। उन्होंने भी नरेंद्र मोदी को ही टार्गेट किया है। रायबरेली में मां सोनिया गांधी के चुनाव प्रचार अभियान पर गईं प्रियंका ने महिला जासूसी कांड के बहाने निशाना साधा कि ‘मोदी बंद कमरे में महिलाओं के फोन सुनते हैं।’ गौर करने की बात है कि ये वही प्रियंका हैं, जिन्हें ठीक एक दिन पहले पति रॉबर्ट वाड्रा पर हो रहे कथित हमले से पीड़ा हो रही थी, तकलीफ हो रही थी, रॉबर्ट की छवि को लेकर उन्हें बच्चों को जवाब देना पड़ रहा था। जबकि रॉबर्ट के संदिग्ध जमीन-खरीद फरोख्त का मामला अदालत में है।
दिल्ली हाइकोर्ट हरियाणा में बिल्डरों के लाइसेंस की सीबीआई जांच की याचिका पर सुनवाई करेगा और इस जांच में रॉबर्ट वाड्रा का नाम भी शामिल है। 30 अप्रैल को सुनवाई होनी है। इससे साफ है कि रॉबर्ट पर आरोप केवल राजनीति से प्रेरित नहीं है। इस मामले के खिलाफ हरियाणा में आवाज उठाने वाले एक अफसर अशोक खेमका राजनीतिक शिकार बन चुके हैं। यानी दाल में कुछ तो काला है। खैर, इस चुनाव में निजी हमलों को देख कर ऐसा लग रहा है कि चुनाव लड़ने के लिए देश में अब कोई मुद्दा ही नहीं बचा है।
महंगाई, भ्रष्टाचार, गरीबी उन्मूलन, सुशासन, सामाजिक न्याय, सुरक्षा, आर्थिक-प्रशासनिक सुधार, समावेशी विकास और बेरोजगारी जैसे अहम मसले प्रचार अभियान से गायब हैं। इन मसलों पर गंभीरता से बहस होनी चाहिए थी, लेकिन हो क्या रहा है, केवल और केवल निजी हमले। मसलों पर बात घोषणापत्रों तक सीमित है। यह जानते हुए कि निजी हमलों से देश का भला नहीं हो सकता, फिर भी सभी दलों के नेता नितांत निजी हमलों में मशगूल हैं। आखिर क्यों? वजह साफ है देश में 10 साल से कांग्रेस नीत सरकार थी। उन्हें चुनाव के दौरान जनता को सरकार की उपलब्धियां बतानी थीं, जोकि उनके खाते में नहीं थीं। उल्टे सरकार पर 2जी स्पेक्ट्रम, कोलगेट, आदर्श, रक्षा सौदे, राष्ट्रमंडल खेल जैसे घोटाले के आरोप थे और महंगाई पर अंकुश नहीं लगा पाने, नीतिगत लाचारी व अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने जैसी विफलताएं खाते में थीं।
दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के मजबूती से उभरने और राजग के विस्तार से कांग्रेस और उसके सहयोगी दल हताश हो गए और तब शायद रणनीति के तहत सबसे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी पर निजी हमले शुरू किए। उसके बाद तो जैसे मोदी पर निजी हमलों की झड़ी लग गई। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, कपिल सिब्बल, बेनी प्रसाद वर्मा, दिग्विजय सिंह, इमरान मसूद, सपा नेता मुलायम सिंह यादव व आजम खान, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, बसपा मुखिया मायावती, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेताओं ने मोदी पर निजी हमले किए। जवाबी तौर पर मोदी ने कांग्रेस पर राजनीतिक प्रहार किए तो अब प्रियंका तिलमिला गई हैं। निजी हमले किसी भी तरफ से हो, पीड़ा सबको होती है, इसलिए यह निंदनीय है। यह बंद हो। स्वस्थ लोकतंत्र में किसी भी प्रकार के निजी हमले के लिए जगह नहीं है।
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