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चिंतन: संसद को चलने देने की विपक्ष की भी जिम्मेदारी

यदि विपक्ष की राजनीति और रोड़े के चलते संसद नहीं चलेगी व विधेयक पास नहीं होंगे तो विकास कैसे होगा।

चिंतन: संसद को चलने देने की विपक्ष की भी जिम्मेदारी

तेइस फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में अहम बात कही है। उन्होंने बगैर किसी का नाम लिए कहा कि संसद में गतिरोध पैदा करने के लिए सिर्फ एक परिवार जिम्मेदार है, जिसने अहम विधेयक और नीतियों को पारित करने के काम में रोड़ा अटकाया है। पीएम का इशारा साफ है, वे संसद के पिछले सत्रों में किए गए अवरोधों के लिए कांग्रेस पर निशाना साध रहे थे। उन्होंने इसे आगे स्पष्ट भी कर दिया कि ‘उन्हें लगता है कि ऐसा करके यह परिवार 2014 में लोस में मिली चुनावी हार का बदला ले रहा है। विपक्ष में ऐसे कई नेता हैं जो मेरा विरोध करने के बावजूद संसद चलने देना चाहते हैं लेकिन एक परिवार तो इतना सख्त है कि वह राज्यसभा भी चलने नहीं देता।’ पीएम के तौर पर संसद नहीं चल पाने की मोदी की पीड़ा जायज है। एक पीएम के रूप में उनका पहला लक्ष्य देश का विकास है और इसके लिए रिफॉर्म एजेंडे को लागू करवाना है। एजेंडे तभी लागू हो सकेंगे जब संसद चलेगी भी और विधेयक पास भी करेगी। द्विसदन प्रणाली के चलते किसी भी विधेयक का कानून बनने के लिए दोनों सदनों से उसे पारित होना जरूरी है। मोदी सरकार के साथ समस्या यह है कि लोकसभा में बहुमत के बावजूद वह राज्यसभा में अल्पमत में है। जिसके चलते कई अहम विधेयक जो लोकसभा में पास हैं, राज्यसभा में लटके हुए हैं। उनमें से एक आर्थिक सुधार में मील का पत्थर साबित होने वाला जीएसटी विधेयक भी है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण व र्शम सुधार बिल समेत करीब 36 विधेयक हैं, जो किसी न किसी कारण से अटके हुए हैं। इन विधेयकों के पास नहीं हो पाने के चलते सरकार आगे नहीं बढ़ पा रही है। लगभग ठिठकी हुई है। केवल अध्यादेश के जरिये सरकार अपने एजेंडे को लागू नहीं कर सकती। उसे विपक्ष का पूर्ण सहयोग भी चाहिए। यहां महत्वपूर्ण बात है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम के इस निशाने का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि, सरकार चलाने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की होती है और मोदी जी बहाने बना रहे हैं। लेकिन पूरा देश जानता है कि मोदी ने हर मौके पर विपक्ष का सहयोग मांगा है। उन्होंने खुद जाकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व पीएम डा. मनमोहन सिंह से मुलाकात की है और जीएसटी समेत अन्य पेंडिंग बिलों पर मदद मांगी। इतना करने के बाद भी अगर कांग्रेस आरोप लगाए कि सरकार चलाना पीएम की जिम्मेदारी है, तो प्रश्न है कि आखिर विपक्ष की देश के प्रति क्या जिम्मेदारी है। वे भी तो जनता के प्रतिनिधि हैं और विकास का वादा कर चुन कर आए हैं। यदि विपक्ष की राजनीति और रोड़े के चलते संसद नहीं चलेगी व विधेयक पास नहीं होंगे तो विकास कैसे होगा। इसलिए राहुल प्रधानमंत्री पर वार करके देश के प्रति विपक्ष की जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। विपक्ष को समझना चाहिए कि देश की जनता संसद में उनकी हर गतिविधि को देख ही होती है। स्वस्थ लोकतांत्रिक राजनीति तो यही है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद संसद र्मयादा के साथ चलती रहे। उम्मीद की जानी चाहिए कि आगामी बजट सत्र के दौरान कांग्रेस अपनी महती जिम्मेदारी समझेगी और सरकार का सहयोग करेगी।

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