Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

संसद के सुचारू संचालन का दायित्व विपक्ष का भी

पार्टी एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका में नजर नहीं आ रही है। वह एक के बाद एक राज्यों का चुनाव हारती जा रही है।

संसद के सुचारू संचालन का दायित्व विपक्ष का भी
X

ललित मोदी विवाद पर विपक्षी दल खासकर कांग्रेस ने अभी से यह संकेत देने शुरू कर दिए हैं कि संसद का मानसून सत्र सुचारू रूप से चलाना केंद्र सरकार के लिए आसान नहीं होगा। कई नेता सार्वजनिक तौर पर कह भी चुके हैं कि अगर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो संसद का कामकाज प्रभावित होने के साथ-साथ महत्वपूर्ण विधेयक भी रुक सकते हैं। जिस तरह से कांग्रेस हर रोज इस मुद्दे को हवा दे रही है उसे देखते हुए कहा जा रहा हैकि पार्टी इस विषय को संसद के सत्र तक चर्चा में बनाए रखना चाहती है, जिससे संसद बाधित करना आसान हो जाए! जाहिर है, यदि उसने इस तरह का निर्णय कर रखा है तो इसे किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता। देश की सबसे पुरानी पार्टी का यह रवैया जन विरोधी जान पड़ता है।

मंत्रियों के VIP रवैये से मोदी नाराज, फणनवीस और रिजजू के लिए एयर इंडिया से PMO ने मांगी रिपोर्ट

दरअसल, जब से केंद्र में एनडीए सरकार आई है तभी से कांग्रेस का ऐसा ही रवैया देखने को मिल रहा है। पार्टी एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका में नजर नहीं आ रही है। वह एक के बाद एक राज्यों का चुनाव हारती जा रही है। गत लोकसभा के चुनावों में भी जनता ने उसे कड़ा सबक सिखाया था, इसके बाद भी वह कुछ नहीं सीख रही है। अगर गैरकानूनी तरीके से ललित मोदी की मदद की गई है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। संसद का कामकाज रोक देना अच्छा संसदीय व्यवहार नहीं है। संसद लोगों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है। इसकी अपनी एक गरिमा है, जहां जनता से जुड़े कई अहम निर्णय लिए जाते हैं। यहां तक कि इस विवाद पर भी सदन के पटल पर विचार-विर्मश किया जाना चाहिए। विपक्षी दलों को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करें और सरकार से जवाब मांगें।

HUSBAND उम्र में क्यों होता है बड़ा, जानिए- संस्करा या कोई धार्मिक विश्वास

देश जानता हैकि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और भूमि अधिग्रहण सहित कई महत्वपूर्णविधेयक लंबित हैं, जिन्हें मानसून सत्र में पारित होना जरूरी है। देश के अलग-अलग राज्यों में वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाने वाले करों में एकरूपता लाने के प्रयासों से जुड़ा जीएसटी विधेयक आर्थिक सुधारों की ओर प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण कदम है। अब जब इस पर अंतिम मुहर लगाने की तैयारी कर ली गई है तो कोई अड़ंगा नहीं डाला जाना चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं कि जीएसटी विधेयक देश के हित में है, इससे अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलने वाली है। कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार जब सत्ता में थी तब वह भी इसकी हिमायती थी, ऐसे में इसे आगे बढ़ाने में किसी राजनीतिक सौदेबाजी की दरकार नहीं होनी चाहिए। उन्हें अपनी मंशा पर पुन: विचार करना चाहिए।

महाराष्ट्र:अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रेजिडेंट डॉक्टर

मोदी सरकार का विरोध करने के क्रम में कहीं ऐसा न हो कि देश की आम जनता के हित प्रभावित हो जाएं! संसद सुचारू रूप से चले, यह सुनिश्चित करना और जरूरी विधेयकों को पास कराना बेशक सरकार का दायित्व होता है, लेकिन विपक्ष की भूमिका भी जन हित के कायरें में बाधा पैदा करने की नहीं होनी चाहिए। संसद को शांतिपूर्ण चलाने में सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्ष की भी उतनी ही जिम्मेदारी बनती है। यदि भूमि अधिग्रहण और जीएसटी विधेयक इस सत्र में पारित हो जाते हैं तो निश्चित रूप से देश में विकास की रफ्तर तेज होगी। ऐसे में संसद को पंगु करने की मंशा विपक्ष को विकास विरोधी ही ज्यादा साबित करेगी।

अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था रवाना, भक्तों का उमड़ा सैलाब

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर -

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story