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म्यांमार ऑपरेशन के बाद भयभीत क्यों है पाकिस्तान

पूर्वोत्तर के उग्रवादियों के खिलाफ भारतीय सेना की सफल कार्रवाई के बाद लगता है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान भयभीत हो गया है।

म्यांमार ऑपरेशन के बाद भयभीत क्यों है पाकिस्तान
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पूर्वोत्तर के उग्रवादियों के खिलाफ भारतीय सेना की सफल कार्रवाई के बाद लगता है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान भयभीत हो गया है। उसके नेता जिस तरह बौखलाहट में बयान दे रहे हैं उससे तो यही जाहिर होता है कि इस ऑपरेशन का उसे कड़ा संदेश मिल गया है। वहां के सेना प्रमुख, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री भारत को एक सुर में चेतावनी दे रहे हैं। यही नहीं वे परमाणु हथियार तक का धौंस दिखाने लगे हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री निसार अली खान ने कहा है कि भारत हमें म्यांमार न समझे और म्यांमार जैसी गलती यहां न करे। समझ से परे है कि ऐसी बंदरघुड़की किसलिए। दरअसल, सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने बुधवार को कहा था कि म्यांमार की कार्रवाई दूसरे देशों के लिए एक संदेश है। राठौर के बयान को पाकिस्तान के खिलाफ चेतावनी माना जा रहा था। हालांकि यह बयान ऐसा नहीं है जिससे पाकिस्तान की ओर से ऐसी प्रतिक्रिया दी जाए। इससे यही जाहिर होता है कि उसके मन में चोर है। इससे यह भी साबित होता हैकि भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने में उसका हाथ है। और शायद इसी वजह से उसने उग्रवादियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संदेश को बहुत जल्द ही समझ लिया कि कहीं भारत आक्रामक नीति दिखाते हुए उनकी सीमा में स्थित आतंकवादी कैंपों पर कार्रवाई न कर दे।

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सीमा पर गोलीबारी कर संघर्ष विराम का उल्लंघन करना भी पाकिस्तान की बौखलाहट का नतीजा है। आज म्यांमार उग्रवाद को खत्म करने में भारत का हर तरह से सहयोग कर रहा है। वह स्वयं भी समझ गया है कि किसी भी तरह के आतंकवाद का सर्मथन देना उसके हित में नहीं है, लेकिन दुर्भाग्य हैकि पाकिस्तान इस बात को नहीं समझ पा रहा है। हालांकि ऐसा नहीं है कि इस आतंकवाद ने पाकिस्तान को नहीं डंसा है, वह भी उसका उतना ही भुक्तभोगी है जितना दूसरे देश, फिर भी उसका आतंकवाद को सर्मथन देना जारी है। आज साठ से अधिक आतंकी गुट वहां सक्रिय हैं। इनमें से वह उन आतंकी गिराहों को बढ़ावा दे रहा है जो भारत और अफगानिस्तान में हिंसा फैला रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ने पर पाकिस्तान एक तरफ स्वयं को आतंकवाद से पीड़ित बताने लगता है, लेकिन दूसरी तरफ यह भी उतना ही सच हैकि वह अन्य आतंकियों को हर तरह से पोषित-पल्लवित कर रहा है। जाहिर है, आतंकवाद पर उसकी दोहरी नीति अब दुनिया जान गई है। फिलहाल, आतंकवाद के प्रति पाकिस्तान की सेना और नवाज शरीफ की सरकार के रवैए भी निराशाजनक हैं। ऐसे में उसके प्रति भारत को नरमी दिखाने की जरूरत नहीं है, बल्कि आतंकियों के खिलाफ खुलकर कार्रवाई करने की दरकार है।

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हालांकि म्यांमार की तरह पाकिस्तान की सीमा पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई को अंजाम देना मुश्किल है, लेकिन इसे नामुमकिन भी नहीं माना जाना चाहिए। भारत की ओर से समय-समय पर उसे इस तरह के संकेत देते रहना चाहिए कि उसके सब्र का बांध टूटा तो वह कुछ भी कर सकता है। इसमें कोईदो राय नहीं कि म्यांमार ऑपरेशनसे उन देश विरोधी तत्वों को सबक मिला है जो यह सोचते हैं कि भारतीय सेना तेजी से पलटवार नहीं कर सकती है। यह दिखाता है कि जरूरत पड़ने पर भारत दूसरे देश की सीमा में घुसकर भी आतंकवादियों का सफाया कर सकता है। जाहिर है कि इस ऑपरेशन से भारत ने सॉफ्ट स्टेट यानी नरम देश होने के अपने चोले को उतार फेंकने में कुछ हद तक सफलता पा ली है।

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