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तनाव बढ़ा क्या हासिल करना चाहता है पाक

इमरान खान और ताहिर उल कादरी के कारण पाक में अंदरूनी राजनीतिक हालात भी ठीक नहीं है।

तनाव बढ़ा क्या हासिल करना चाहता है पाक
पाकिस्तानी सेना पिछले कुछ दिनों से वर्ष 2003 में लागू हुए संघर्ष विराम समझौते का तकरीबन रोजाना ही उल्लंघन कर रही है। अब पाकिस्तान ने भारत के साथ तल्खी को और बढ़ाते हुए सीमा पर अपने सैनिकों की संख्या भी बढ़ानी शुरू कर दी है। एक तरफ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज भारत-पाक डीजीएमओ की बैठक बुलाकर संघर्ष विराम समझौते को पुन: परिभाषित कर लागू कराने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ पाक सेना की सरहद पर बढ़ती हलचल का भारत क्या मतलब निकाले? इससे तो उसका दोमुंहापन ही उजागर हो रहा है और मंशा भी सवालों के घेरे में है।
विदेश सचिवों की बैठक से पूर्व भारत के ऐतराज के बावजूद पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात की, जिसके बाद भारत ने वार्ताको रद्द कर दिया। फिर पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि बैठक रद्द होना ठीक नहीं है और वह रिश्तों को सुधारने के लिए भारत से बातचीत करने को इच्छुक है, परंतु द्विपक्षीय बातचीत के लिए उचित माहौल होना जरूरी होता है। पाकिस्तान की यही समस्या रही है कि भारत की ओर से जब-जब दोस्ती का हाथ बढ़ाया गया उसने उसका गलत फायदा उठाया। भारत की हमेशा वार्ता के लिए खुशनुमा माहौल बनाने की कोशिश रही है, परंतु पाकिस्तान उसको बिगाड़ने में लगा रहा है। अभी भी वह यही कर रहा है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में दक्षेस देशों के राष्ट्र प्रमुखों सहित पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित कर संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास किया था। नवाज शरीफ के भारत आने के बाद उम्मीद जगी कि दोनों देश संबंधों को सुधारने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। अभी दोनों देशों में लोकतांत्रिक सरकारें हैं और दोनों के पास स्पष्ट बहुमत है। प्रधानमंत्री मोदी के पहल के बाद ही भारत-पाक सचिव स्तर की वार्ता आरंभ करने पर सहमति बनी थी, इसके जरिए यह निर्धारित करना था कि आगे दोनों के बीच किन-किन मुद्दों पर बातचीत होगी, परंतु फिर वही हुआ, पाकिस्तान ने अलगाववादियों को बीच में लाकर भारत के भरोसे को तोड़ दिया।
इस बीच पाक सेना सीमा पर भी तनाव बढ़ाकर माहौल को खराब करने का भरसक प्रयास कर रही है। पाक सेना अंतरराष्ट्रीय सीमा सहित बाकी भारतीय चौकियों और सरहदी गांवों पर भारी गोलीबारी कर रही है। और अब खबर हैकि पाकिस्तान सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। ये मामले निश्चित रूप से भारत को उकसाने वाले हैं। भारत पाकिस्तान के दुस्साहस पर आंख बंद नहीं रख सकता। यही वजह थी कि रविवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बीएसएफ को पाक गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब देने को कहना पड़ा था और अब पाक सेना के बढ़ते जमावड़े को देखते हुए उन्होंने बीएसएफ के डीजी, आईबी और रॉ के प्रमुखों के साथ बैठक की है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना नवाज शरीफ और उनकी लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार पर हावी हो गई है।
वहीं इमरान खान और ताहिर उल कादरी के कारण पाक में अंदरूनी राजनीतिक हालात भी ठीक नहीं है। वजीरिस्तान में आतंकवादी पाक सेना के लिए अलग से सिरदर्द बने हुए हैं। पाक सेना इन सबसे अंतरराष्ट्रीय जगत और अपनी जनता का ध्यान हटाना चाहती है। कुलमिलाकर, देखें तो भारत से संबंध सुधारने और विवादों को सुलझाने में पाक की रुचि नहीं है।

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