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चिंतन: पठानकोट के दोषियों को सजा दिला पाएगा पाक

पाकिस्तान अफसरों को उसी रास्ते एयरबेस ले जाया गया जहां से गत दो जनवरी को आतंकी घुसे थे।

चिंतन: पठानकोट के दोषियों को सजा दिला पाएगा पाक
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पाकिस्तान की ज्वाइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (जेआईटी) पठानकोट में आतंकी हमले की दो दिनों से जांच कर रही है। जेआईटी सोमवार को भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के दफ्तर गई, जहां उसे एनआईए ने पठानकोट आतंकी हमले में पाक आतंकियों के हाथ होने के पुख्ता सबूत दिए। पाक जांच एजेंसी ने मंगलवार को एयरबेस का दौरा किया। पाकिस्तान अफसरों को उसी रास्ते एयरबेस ले जाया गया जहां से गत दो जनवरी को आतंकी घुसे थे।

जेआईटी रविवार को ही भारत पहुंची थी। ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई पाक एजेंसी भारत में अपने देश से हुए आतंकी हमले की जांच कर रही है। नहीं तो अब तक हर आतंकी हमले के बाद भारत पाकिस्तान को सबूत देता था, डोजियर भेजता था और पाक सरकार नकार देती थी। ज्यादा से ज्यादा पाक सरकार उसे नकाफी बता देती थी। लेकिन पठानकोट एयबेस में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तत्परता से पाकिस्तान को सबूत दिए और उसके बाद पाक की नवाज शरीफ सरकार ने सबूतों की जांच के लिए ज्वाइंट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी गठित की उससे यह लगने लगा है कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान भी गंभीर हुआ है। इससे पहले तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा ही देता रहा है।

एनआईए ने जेआईटी को सबूत में एके-47, पिस्तौल, ग्रेनेड, दूरबीन, जीपीएस, दवाएं, कपड़े, खाने के पैकेट, खजूर, तार काटने वाले औजार और जूते दिखलाए, जो या तो पाकिस्तान में बने थे या खरीदे गए थे। उसे फोन नंबर और हमले के दौरान इंटरसेप्ट किए गए पाक से कॉल की डिटेल भी दी गई। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के भाई रउफ अजहर के फोन नंबर भी दिए। जेआईटी इन सबूतों को नकार नहीं सकी है, बल्कि संजीदगी से इसकी नोटिंग की है। अब एनआईए इस मामले की जांच के लिए पाकिस्तान जाएगी। अब तक यह जांच जिस तरीके से आगे बढ़ रही है, उसमें लग रहा है कि भारत और पाक आतंकी हमले के गुनहगारों को सजा के अंजाम तक पहुंचाने में सफल होंगे।

कूटनीतिक रूप से यह जांच पाकिस्तान के लिए लिटमस टेस्ट की तरह होगा। क्योंकि विश्व मंच पर पाकिस्तान खुद को आतंकवाद पीड़ित और उसके खिलाफ बताता रहा है, जबकि भारत लगातार कहता व सबूत देता रहा है कि हमारे खिलाफ आतंकवाद पाक प्रायोजित है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई नापाक मंसूबों के तहत भारत में आतंकी हमले करवाती रही है। यह बात जगजाहिर हो चुकी है। ऐसे में पठानकोट एयरबेस हमले की जांच में पाक का मदद करना आतंकवाद के खिलाफ उसकी बदली नीति का सूचक प्रतीत हो रहा है।

हालांकि आतंकवाद को खाद-पानी देने वाला पाकिस्तान अचानक नहीं बदला है। एक तो उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है, दूसरा वह अब खुद आतंकवादी हमलों से छलनी हो रहा है। पेशावर में दो बार व लहौर में बड़े आतंकी हमले हुए हैं। छोटे हमले तो होते ही रहते हैं। साथ ही आतंक के खिलाफ भारत की कठोर नीति व मजबूत कूटनीति के चलते पाकिस्तान विश्व में अलग-थलग पड़ता जा रहा है। पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक हुसैन हक्कानी ने कहा भी है कि भारत के खिलाफ पाकिस्तान की आतंकवाद की नीति अब उसे उल्टी पड़ रही है और लाहौर हमले के रूप में भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

ऐसे में पठानकोट हमले के दोषियों को सजा दिलवाने में अगर पीएम नवाज शरीफ सरकार कामयाब हो जाती है, तो निश्चित ही पाकिस्तान के प्रति भारत का नजरिया बदलेगा और ग्लोबल मंच पर पाक अपनी छवि ठीक करने में कुछ कुछ सफल होगा। आईएस व अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ सऊदी अरब समेत 34 देशों के समूह में भी शामिल होकर भी पाकिस्तान ने जताया है कि वह बदल रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले समय में पाक अपने यहां से आतंकी संगठनों का सफाया करेगा।

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