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इस कदम से तो आतंकियों के हौसले बुलंद ही होंगे

पेशावर की वीभत्स घटना से भी पाकिस्तान कुछ सबक लेता हुआ नहीं दिख रहा है।

इस कदम से तो आतंकियों के हौसले बुलंद ही होंगे

पेशावर की वीभत्स घटना से भी पाकिस्तान कुछ सबक लेता हुआ नहीं दिख रहा है। मंगलवार को आर्मी स्कूल पर हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा था कि सेना आतंकवाद के खिलाफ तब तक जंग जारी रखेगी जब तक यह पूरी तरह पाक की सरजमीं से खत्म नहीं हो जाता। उन्होंने यहां तक कहा था कि अच्छे तालिबान और बुरे तालिबान में फर्क नहीं किया जाएगा, लेकिन सिर्फ दो दिन बाद ही आतंकवाद पर उनकी दोहरी नीति उजागर हो गई है।

दरअसल, मुंबई में हुए 26/11 हमले का दूसरा बड़ा आरोपी लश्कर ए तैयबा प्रमुख जकी-उर- रहमान लखवी को वहां की निचली अदालत ने जमानत दे दी है। मुंबई हमले का मास्टर माइंड जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद पहले से ही खुलेआम घूम रहा है। वहां की अदालत ने उसे पुख्ता सबूत नहीं होने का हवाला देकर आरोप मुक्त कर दिया है। माना जा रहा है कि लखवी को भी जमानत देने के लिए जिम्मेदार पाकिस्तान सरकार ही है। क्योंकि सरकारी पक्ष ने ही केस में कमी रखी है। भारत द्वारा इस फैसले के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई जा रही है, जो कि स्वाभाविक ही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवादी लखवी को जमानत देकर समूची मानवता को सदमा पहुंचाने वाला काम किया है। वहीं संसद में भी प्रस्ताव पास पर इस कृत की निंदा की गई है। पाकिस्तान के अंदर से भी कुछ लोग इस कदम की आलोचना कर रहे हैं।जाहिर है, चौतरफा दबावों के बाद पाकिस्तान को झुकना पड़ा है। पाक सरकार ने लखवी की जमानत को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है। इसके साथ ही एक दूसरे मामले के तहत उसे गिरफ्तार किया गया है जिसमेें उसे अभी कम से कम तीन महीने तक और जेल में ही रहना होगा।

मुंबई हमले के छह दूसरे आरोपियों के साथ लखवी रावलपिंडी की अडियाला जेल में है। मुंबई हमला 2008 में हुआ था, जिसमें आतंकियों ने 166 लोगों की बर्बरतापूर्वक हत्या कर दी थी। इस मामले की सुनवाई 2009 में शुरू हुई। हमले के दौरान एकमात्र जिंदा पकड़ा गया आतंकी कसाब ने लखवी को पूरे आॅपरेशन का कमांडर और हाफिज सईद को मास्टर माइंड बताया था। वहीं अमेरिका में पकड़ा गया डेविड हेडली ने भी दोनों की पहचान की थी। इसके अलावा हमले के दौरान आतंकियों की हुई बातचीत के सैंपल की फॉरेंसिक जांच और गत दिनों नेपाल की सीमा पर पकड़े गए अबु जुंदाल से हुई पूछताछ में भी दोनों की भूमिका उजागर हुई है। उनके खिलाफ इतने पुख्ता सबूत होने के बावजूद भी इस्लामाबाद की आतंकवाद निरोधी अदालत से जमानत मिलना आश्चर्यजनक है। लखवी के मामले में अभी तक अदालत में 46 गवाह पेश हुए हैं सभी ने उसके खिलाफ गवाही दी है।

इस मामले में अब सिर्फ 15 गवाहों को बयान देना है और यह सुनवाई तीन से चार सप्ताह में पूरी होने वाली है। अब जब इस केस की सुनवाई पूरी होने में इतना कम समय रह गया है तब जमानत मिलना संदेह पैदा करता है। पाकिस्तान को यह नहीं भूलना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इन दोनों को अंतरराष्ट्रीय आतंकी करार दिया है। ऐसे फैसले से आतंकियों का हौसला बढ़ेगा। यदि पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद को समाप्त करना चाहता है तो उसे बिना भेदभाव किए जमात उद दावा, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर ए तैयबा सहित सभी आतंकवादियों को नेस्तनाबूद करना होगा।

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