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अमन के रास्ते में बाधक है पाकिस्तान की सेना

अमन के रास्ते में बाधक है पाकिस्तान की सेना

अमन के रास्ते में बाधक है पाकिस्तान की सेना
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भारत के रक्षा मंत्री अरुण जेटली की जम्मू-कश्मीर यात्रा से एक दिन पहले शुक्रवार को पाक सेना की ओर से सीमा पर फायरिंग कई सवाल खड़ा करती है। रक्षा मंत्री सुरक्षा स्थिति का जायजा लेने शनिवार को जम्मू-कश्मीर जाने वाले हैं। यह पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम का सरासर उल्लंघन है। यह पहली बार नहीं हुआ है। प्राय: देखा जाता है कि जब-जब भारत की ओर से पाकिस्तान से संबंधों को सुधारने की कोशिशें होती हैं तब-तब वहां की सेना और चरमपंथी जमातें इस तरह की हरकतें कर जाती हैं। सेना और चरमपंथी जमातें ही भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण के अवसर पर जब भारत आने वाले थे तब भी अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर कुछ आतंकवादियों ने हमला किया था। इसके बाद भी पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई। अमन और शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने के संकेत दोनों ने दिए। नवाज शरीफ खुश और संतुष्ट होकर अपने वतन लौटे और वहीं सबने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस पहल का स्वागत किया। वो चाहे संयुक्त राष्ट्र हो, अमेरिका हो, यूरोपीय देश हों या फिर खाड़ी देश परंतु पाकिस्तान की चरमपंथी जमातें और सेना नहीं चाहती हैं कि भारत पाकिस्तान के रिश्ते सामान्य हों। दोनों देशों में मेलजोल बढ़े। यही वजह हैकि पाकिस्तान की सेना की ओर से एक बार फिर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया है, जिसमें एक जवान शहीद हो गया है। वह भी ऐसे समय में जब भारत के नवनियुक्त रक्षा मंत्री सुरक्षा स्थितियों का जायजा लेने के लिए पहली बार जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जाने वाले हैं। भारत के राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में जम्मू-कश्मीर को लेकर कई सारी बातों का जिक्र किया है। जिसमें उन्होंने वर्षों से विस्थापित कश्मीरी पंडितों की घाटी में अपने घर वापसी सुनिश्चित करने की बात कही है। जम्मू-कश्मीर सहित समूचे देश में इसका स्वागत हुआ है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इसका स्वागत करते हुए कहा हैकि जो लोग शिक्षा देने वाले थे वे घाटी से चले गए हैं, वे लौटेंगे तो जम्मू-कश्मीर के लिए अच्छी बात होगी परंतु जिन लोगों के कारण कश्मीरी पंडितों को घर छोड़ना पड़ा वे लोग इसे पचा नहीं पा रहे हैं। वे लोग सीमा पर गोलीबारी कर घाटी में फिर से माहौल खराब करना चाहते हैं। हालांकि कहने को तो पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार है। नवाज शरीफ वहां के प्रधानमंत्री हैं। उन्हें भी नरेंद्र मोदी की तरह पूर्ण बहुमत मिला है। ऐसे में पाक निवासियों के असली पैरोकार वही हैं। लिहाजा उन्हें ही यह तय करना चाहिए कि पाकिस्तान का भविष्य कैसा हो और पड़ोसी देशों के साथ उसके रिश्ते कैसे होने चाहिए परंतु पाकिस्तान के संबंध में यह भी उतना ही कटु सत्य है कि वहां सेना अभी भी सर्वशक्तिशाली बनी हुई है। इन सभी हालातों से पाकिस्तान कैसे उबरेगा यह सबसे बड़ा प्रश्न आज नवाज शरीफ के सामने है।
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