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चिंतन: एक बार फिर पाक की वही नापाक कोशिश

इससे पूर्व दोनों देशों के सुरक्षा सलाहाकार भी मुलाकात करके वार्ता को दोबारा पटरी पर लाने का प्रयास भी कर चुके थे।

चिंतन: एक बार फिर पाक की वही नापाक कोशिश
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एक बार फिर पाकिस्तान के नापाक इरादे नजर आने लगे हैं। पठानकोट एयरबेस पर हमले के बाद एक बारगी ऐसा लगा था कि पाकिस्तान इस बार गंभीरता से आंतक के खिलाफ खड़ा होगा। भारत द्वारा हमले में पाकिस्तानी आंतकियों का हाथ होने के सबूत सौंपे जाने के बाद जिस तरह वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एक के बाद एक उच्चस्तरीय मीटिंग की और तुरंत जांच के आदेश दिए। ऐसा लगने लगा था कि इस बार पाकिस्तान आतंक के खिलाफ कड़ा कदम उठाएगा। इसके पीछे कारण भी थे।

अपनी अफगान यात्रा के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसबंर को अचानक नवाज शरीफ को जन्मदिन की मुबारकबाद देने लाहौर चले गए थे। वे न केवल पाकिस्तान में उतरे, बल्कि नवाज शरीफ के घर भी गए। उनकी नवासी की शादी में शामिल हुए। इससे पूर्व दोनों देशों के सुरक्षा सलाहाकार भी मुलाकात करके वार्ता को दोबारा पटरी पर लाने का प्रयास भी कर चुके थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाक यात्रा के महज सात दिनों के बाद ही आतंकियों ने पठानकोट में एयरबेस पर हमला कर दिया। हमले के तुरंत बाद भारतीय खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि आतंकियों ने पाकिस्तान में इस हमले की योजना बनाई और उसे वहीं अंतिम रूप दिया। आतंकियों द्वारा हमले से पहले पाक में अपने आकाओं से बातचीत वाले फोन नंबर भी पाक को सौंपे गए थे। इन आतंकियों के जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने के भी सबूत सौंपे गए। इसके तुरंत बाद पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में संयुक्त जांच टीम गठित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें इंटेलीजेंस ब्यूरो, आईएसआई, और मिलिटरी इंटेलीजेंस के अधिकारी शामिल किए गए।

इस बैठक में गृहमंत्री चौधरी निसार अली खान, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल नसीर खान जांजुआ, विदेश मामलों पर प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार सरताज अजीज, विदेश मामलों पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक तारिक फातेमी और वित्त मंत्री इसहाक डार भी शामिल हुए। पाक के इस प्रयास से ऐसा लगा कि इस बार पाकिस्तान हुकुमत आतंकवाद को लेकर कड़ा कदम उठाएगी। लेकिन इतना सब होने के बाद भी पाकिस्तान एक बार फिर वहीं सब करता नजर आ रहा है, जो अब तक करता आया है।

बताया जा रहा है कि पाक द्वारा गठित जांच टीम ने शुरुआती जांच पूरी कर ली है और भारत को जानकारी भी सौंप दी है। पाक द्वारा दी गई जानकारी में कहा गया है कि भारत ने जो फोन नंबर दिए वह पाकिस्तान के नहीं हैं। पाक अन्य सबूतों से भी पल्ला झाड़ता नजर आ रहा है। हालांकि भारत ने पाक द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बल्कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर गंभीरता आतंक के खिलाफ लड़ाई में साथ देने का भरोसा जताया है। अगर इस बार भी पाकिस्तान ने अपना रुख नहीं बदला तो 15 जनवरी को होने जा रही विदेश सचिव स्तर की वार्ता का खटाई में पड़ना तय है। इससे न केवल दोनों देशों के संबंध और बिगड़ेंगे, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि पर भी पड़ेगा जो लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए बहुत बुरा होगा।

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