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कूटनीतिक मोर्चे पर दिक्कत पैदा करने वाली बयानबाजी

पड़ोसी देश पाकिस्तान इसे मुद्दा बनाकर भारत को नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ेगा।

कूटनीतिक मोर्चे पर दिक्कत पैदा करने वाली बयानबाजी
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कोस्ट गार्ड के एक डीआईजी बीके लोशाली लापरवाह और गैरजिम्मेदार तरीके से बयानबाजी कर न सिर्फ तटरक्षक दल और रक्षा मंत्रालय के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं, बल्कि कूटनीति के मार्चे पर भी देश को असुविधाजनक स्थिति में डाल दिए हैं। उनकी बयानबाजी से दुनिया में भारत की जिस तरह से किरकिरी हो रही है उससे आने वाले दिनों में देश को अपनी सीमाओं की सुरक्षा के मोर्चे पर भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। पड़ोसी देश पाकिस्तान इसे मुद्दा बनाकर भारत को नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ेगा।

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खबरों के अनुसार गत दिनों कोस्टगार्ड अधिकारियों की एक सभा को संबोधित करते हुए डीआईजी लोशाली ने कहा कि 31 दिसंबर की रात जो पाकिस्तानी नौका भारतीय सीमा के अंदर पाई गई थी, उसे उन्हीं के आदेश पर भारतीय तटरक्षक दल के जवानों ने उड़ा दिया था। बकौल लोशाली, उस रात मैं गांधीनगर में ही था।

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नाव को भारतीय सीमा में अंदर देखकर खुद उन्होंने ही तटरक्षक दल के जवानों को आदेश दिया था कि नाव उड़ा दो, हम उन्हें बिरयानी नहीं खिलाना चाहते हैं। इनका यह दावा कोस्ट गार्ड और रक्षा मंत्रालय के उस आधिकारिक बयान के विपरीत है, जिसमें कहा गया है कि भारतीय रक्षा बलों द्वारा बुरी तरह घेर लिए जाने के बाद नौका पर सवार संदिग्ध आतंकवादियों ने खुद ही नौके को विस्फोट से उड़ा लिया था। डीआईजी के बयान के बाद रक्षा मंत्रालय के दावे पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जो स्वाभाविक है।

हालांकि रक्षा मंत्रालय ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह अपने पहले वाले बयान पर कायम है और वह इसकी एवज में देश के सामने सबूत भी रखेगा। विवाद शुरू होते देख डीआईजी लोशाली ने खबर का खंडन किया, लेकिन देश को जो नुकसान होना था वह तो पहले ही हो चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनका बयान वैश्विक स्तर भारत की विश्वसनीयता पर असर डालेगा। उनको विभाग की तरफ से एक लिखित भाषण पढ़ने को दिया गया था, लेकिन उन्होंने सभा में मन से बोलने का निर्णय लिया। यहां प्रश्न यह उठता है कि डीआईजी जैसे एक वरिष्ठ अधिकारी इस तरह का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार कैसे कर सकता है? दरअसल, उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को समझना चाहिए कि उनके एक-एक शब्द का मतलब होता है। एक गलत शब्द देश का बड़ा अहित कर सकता है। लिहाजा, उन्हें हर पल इसका ध्यान रखना चाहिए और नपे तुले शब्दों में अपनी बात कहनी चाहिए। उच्च पदों पर बैठे सैन्य व गैर-सैन्य अधिकारियों को एक बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि उनका काम नेताओं की तरह बयानबाजी करना नहीं है।

आज विश्व में जितने भी नव-स्वाधीन देश हैं, उनमें तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो भारत कहीं बेहतर हालत में है। इसकी एक बड़ी वजह देश की राज्य मशीनरी का अराजनीतिक और निष्पक्ष होना है। देश के संविधान में ही इस तरह की व्यवस्था कर दी गई है। अधिकारी अगर इस तरह की राजनीतिक बयानबाजी करेंगे और निष्पक्षता को त्याग पक्षधरता का दामन थामेंगे तो देश को जाने अनजाने में वे बड़ा नुकसान कर देंगे। जैसे की इस मामले में हुआ है।

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