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चिंतनः कितना प्रदूषण रोकेगा सम-विषम फॉर्मूला

यह फॉर्मूला शुरुआत में पंद्रह दिनों के लिए लागू रहेगा।

चिंतनः कितना प्रदूषण रोकेगा सम-विषम फॉर्मूला
राजधानी दिल्ली में गाड़ियों से होने वाले वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक जनवरी से सम-विषम फॉर्मूला लागू होने जा रहा है। दरअसल, इसके तहत गाड़ियों के नंबर और तारीख के हिसाब से लोगों को वाहन चलाने की अनुमति दी गई है।
मसलन यदि उस दिन की तारीख सम संख्या है तो सम अंक वाली गाड़ी चलेगी और यदि तारीख विषम संख्या है तो विषम अंक वाली गाड़ी चलेगी। किस गाड़ी का अंक सम और किसका विषम है यह उस वाहन के नंबर प्लेट पर अंकित संख्या के अंतिम अंक के आधार पर तय होगा। यह फॉर्मूला शुरुआत में पंद्रह दिनों के लिए लागू रहेगा।
दिल्ली सरकार का कहना हैकि इसके बाद वह मूल्यांकन करेगी कि इससे शहर में वायु प्रदूषण पर कितना प्रभाव पड़ा, उसी के अनुसार आगे की योजना बनाई जाएगी। यही वजह है कि इसको सफल बनाने के लिए दिल्ली सरकार और ट्रैफिक पुलिस की ओर से तैयारियां जोरों पर हैं।
हजारों नई बसें सड़कों पर उतारने और नए ऑटो के लिए परमिट देने की बात कही गई है। मेट्रो के फेरे बढ़ाने की भी योजना है। लोगों को कार साझा करने का सुझाव दिया जा रहा है। हालांकि इस फॉर्मूले को लेकर कई व्यवहारिक दिक्कतें सामने आई हैं। यही वजह है कि अभी से तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार से पूछा है कि उसने इस फॉर्मूले से महिलाओं और दोपहिया वाहनों को क्यों बाहर रखा है? जबकि एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि सबसे ज्यादा प्रदूषण दोपहिया वाहन ही पैदा करते हैं।
दरअसल, इस प्लान के तहत कुछ गाड़ियों को छूट दी गई है। इनमें इमरजेंसी गाड़ियां, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, महिला ड्राइवर, मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के जज, दिल्ली हाईकोर्ट के जज, लोकायुक्त, सीएनजी वाहन और दोपहिया शामिल हैं।
वहीं यह फॉर्मूला दिल्ली के बाहर से आने वाली गाड़ियों पर भी लागू होगा। सबसे बड़ा सवाल है कि इस कवायद से दिल्ली की हवा कितनी साफ होगी? विशेषज्ञों की मानें तो इससे प्रदूषण रोकने में शायद ही कोई मदद मिले। दिल्ली में 88 लाख गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन है। इनमें 56 लाख दोपहिया को छूट दी गई है। इस लिहाज से सिर्फ 32 लाख चार पहिया वाहनों पर ही नया फॉर्मूला लागू होगा, लेकिन उसमें भी कुल 18 लाख विभिन्न कारणों से इससे बाहर हो गए हैं।
लिहाजा सिर्फ 14 लाख वाहनों पर ही नया फॉर्मूला लागू होगा। इससे एक दिन में सात लाख चार पहिया वाहन ही सड़क से कम होंगे। दिल्ली में होने वाले कुल प्रदूषण में गाड़ियों का हिस्सा 14 फीसदी है।
ऐसे में यह योजना कारों द्वारा पैदा होने वाले सिर्फ दो से तीन फीसदी प्रदूषण रोकने के लिए है। इसी वजह से कहा जा रहा है कि दिल्ली सरकार धूल व कंस्ट्रक्शन वर्क, जलाए जाने वाले कचरे, डीजल जनरेटर, उद्योग, घरेलू प्रदूषण और दोपहिया से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम की बजाय दो से तीन फीसदी प्रदूषण रोकने के लिए ऐसा फॉर्मूला लेकर आ रही है जिसके दुरुपयोग होने की संभावना ज्यादा है।
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