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चिंतन: परमाणु तकनीक व अस्त्रों की हिफाजत करनी जरुरी

अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में इस समय 53 देशों के राष्ट्र प्रमुख पूरी मानवता को परमाणु हथियार के खतरों से महफूज रखने के उपायों पर चिंतन कर रहे हैं।

चिंतन: परमाणु तकनीक व अस्त्रों की हिफाजत करनी जरुरी

जब दुनिया में विनाशकारी-विध्वंसक शक्तियां वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए खतरा बन रही हों और कुछ राष्ट्र इन शक्तियों को शह दे रही हों, उस परिस्थिति में परमाणु हथियार तकनीक और एटमी अस्त्रों की सुरक्षा पर विवेकपूर्ण व जिम्मेदार राष्ट्रों का ग्लोबल सम्मेलन का महत्व और बढ़ जाता है। इस समय समूचा विश्व इस्लामिक स्टेट, बोको हरम, अलकायदा, अल शबाब, लश्कर, तालिबान, जैश ए मोहम्मद जैसे रेडिकल (कट्टर) इस्लामी आतंकवादी गुटों की बर्बर हिंसा से त्रस्त है।

इनके हाथ में परमाणु अस्त्र व तकनीक के जाने का खतरा बना है। इसके साथ ही आतंकवाद की पनाहगाह में शुमार पाकिस्तान परमाणु शक्ति संपन्न है और उत्तर कोरिया बार-बार अपनी परमाणु क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। ऐसे में विश्व को अब यह चिंता सताने लगी है कि परमाणु सुरक्षा को कैसे अधिक से अधिक पुख्ता किया जाए, ताकि कोई इसका गलत इस्तेमाल कर दुनिया को तबाह न कर दे। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में इस समय 53 देशों के राष्ट्र प्रमुख पूरी मानवता को परमाणु हथियार के खतरों से महफूज रखने के उपायों पर चिंतन कर रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पहल पर आयोजित इस ग्लोबल सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परमाणु आतंकवाद की विभीषिका की तरफ दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। मोदी ने दुनिया के सभी देशों से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील कर इसकी गंभीरता के प्रति आगाह किया है। उन्होंने कहा कि आज आतंकवाद एक ग्लोबल समस्या है और इसे रोके बिना न्यूक्लियर टेररिज्म के खतरे को भी नहीं रोका जा सकता।

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के नए स्वरूपों का जिक्र किया और कहा कि आजकल आतंकवादी अपनी वारदातों की पब्लिसिटी करते हैं, आज वे गुफाओं में नहीं स्मार्टफोन और कम्प्यूटर लेकर शहरों में मौजूद हैं और कुछ स्टेट एक्र्ट्स न्यूक्लियर ट्रैफिकर्स के साथ काम कर रहे हैं। आतंकवाद का ग्लोबल चेहरा सामने आने के बाद अब समय आ गया है कि विश्व के सभी राष्ट्र इसे ग्लोबल डेंजर मानें, अब यह केवल नेशनल डेंजर नहीं रहा।

इसलिए इसके खात्मे के लिए विश्व को भी एकजुट होना होगा। खतरा केवल परमाणु आतंकवाद का ही नहीं है, वरन सैन्य शक्ति के तौर पर भी परमाणु क्षमता के इस्तेमाल का भी खतरा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मार्च 2010 में परमाणु अस्त्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस वैश्विक सम्मेलन की शुरूआत की थी। पिछले छह साल में 12 देश अपने परमाणु जखीरे के भंडार को कम कर चुके हैं। इनमें यूएस, रूस और फ्रांस भी शामिल हैं।

न्यूक्लियर मटीरियल की स्मगलिंग और चोरी रोकने के लिए 300 से ज्यादा बंदरगाहों, एयरपोर्ट्स और बॉर्डर पर न्यूक्लियर डिटेंशन डिवाइस लगाए गए हैं। लेकिन आज कई देश एटमी हथियारों से लैस है। इसकी सुरक्षा भी एक मसला है। इस मायने में दुनिया की हिफाजत की चुनौती से पार पाने के लिए एक ग्लोबल मैकेनिज्म और परमाणु अस्त्र प्रयोग नहीं करने का सामूहिक संकल्प लेने की दिशा में कोई फैसला इस सम्मेलन की सफलता होगी।

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