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घाटी के विकास के लिए प्रधानमंत्री की बड़ी पहल

इसी दौरान उन्होंने लेह में भारतीय सेना के जवानों को भी संबोधित कर उनकी हौसला अफजाई के लिए पाकिस्तान के प्रॉक्सी वार का जिक्र किया।

घाटी के विकास के लिए प्रधानमंत्री की बड़ी पहल

नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब महीने भर के अंतराल में जम्मू-कश्मीर की दो बार यात्रा करके जता दिया है कि उनकी सरकार में इस राज्य की क्या अहमियत रहने वाली है। उन्होंने मंगलवार को लेह, लद्दाख और करगिल की अपनी यात्रा में उन सभी समस्यों मसलन पिछड़ापन, बड़ी आबादी का विस्थापन, ऊर्जा संकट, बेरोजगारी, आतंकवाद का जिक्र किया जिनसे आज घाटी जूझ रही है। उन्होंने लोगों से कहा कि विकास करना, आपसी भाईचारा बढ़ाना और घाटी को देश के सभी हिस्सों से जोड़ना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने लंबित चार सड़क परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा कराने के लिए आठ हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद की घोषणा की। साथ ही राज्य को 80 करोड़ रुपये की देनदारी से भी मुक्त कर दिया। इसी दौरान उन्होंने लेह में भारतीय सेना के जवानों को भी संबोधित कर उनकी हौसला अफजाई के लिए पाकिस्तान के प्रॉक्सी वार का जिक्र किया। जम्मू-कश्मीर वर्षों से विकास के मामले में पिछड़ा रहा है। वहां के नौजवानों में समय-समय पर इसकी नाराजगी दिखती रही है।

हालांकि भारत सरकार का हमेशा से जम्मू-कश्मीर को देश के विकास की मुख्यधारा में शामिल किए जाने का प्रयास रहा है। इसीलिए जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा दिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा घाटी में तमाम चीजों जैसे-बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और दूरदराज के क्षेत्रों में संचार व्यवस्था बहाल करने के साथ-साथ रोजगार के साधनों के विकास पर दूसरे राज्यों की तुलना में ज्यादा सब्सिडी दी जाती है। फिर भी क्या कारण है कि विकास की यात्रा में कश्मीर पीछे छूट गया है। भ्रष्टाचार इसकी एक बड़ी वजह है, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने भी किया है। कश्मीर सामरिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण राज्य है। पड़ोसी देश पाकिस्तान वहां किन-किन तरीकों से गड़बड़ियां फैला रहा है यह किसी से छिपा नहीं है। पाक सेना की ओर से जब ना तब सीमा पर गोलीबारी आम बात है। वहीं पाकिस्तान भारत को अस्थिर करने के लिए आतंकवाद को पोषित कर बढ़ावा दे रहा है। इस बात के सबूत बार-बार सामने आते रहे हैं कि पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी संगठनों द्वारा आतंकी प्रशिक्षण कैंप चलाए जा रहे हैं। वहीं घाटी के अलगाववादियों की कोशिशों के चलते भी राज्य की स्थिति सामान्य नहीं रहती।
राज्य में जो भी निर्वाचित सरकारें आई हैं, चाहे वह पीडीपी की रही हो या नेशनल कॉन्फ्रेंस की, वे भ्रष्टाचार से ग्रस्त रही हैं। वे अब तक घाटी के आम नागरिकों की समस्याओं को हल करने में नाकाम साबित हुई हैं। इसके चलते वहां के लोगों में देश के बाकी हिस्से के प्रति नाराजगी और गुस्सा रहा है। यदि इन हालातों में परिवर्तन आ सकता है, लोगों के सोचने का तौर-तरीका बदल सकता है, अमन चैन कायम हो सकता है, विस्थापितों का पुनर्वास हो सकता है, विकास का रास्ता खोजा जा सकता है तो ये प्रधानमंत्री की एक अच्छी पहल साबित हो सकती है। इसके प्रति मोदी और उनकी सरकार प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए। कश्मीर के लोग अब अमन, विकास, तरक्की और खुशहाली चाहते हैं। लिहाजा कश्मीर में विकास और अमन की प्रक्रिया में और तेजी लाए जाने की जरूरत है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर के लोगों का भरोसा जीता जा सकेगा। और तभी वे स्वयं को राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल समझेंगे।
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