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चिंतन: अब श्रीनगर की एनआइटी में तनाव

केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा से बातचीत कर जरूरी कदम उठाने को कहा है।

चिंतन: अब श्रीनगर की एनआइटी में तनाव
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हैदराबाद यूनिवर्सिटी और दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के बाद जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी (एनआईटी) राजनीति के अखाड़े में तब्दील होता हुआ नजर आ रहा है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या को मुद्दा बनाकर कई महीने तक राजनीतिक रोटियां सेंकी गईं, जबकि जेएनयू में भारत विरोधी नारे लगाने का विरोध करने पर भी संसद के भीतर और बाहर जमकर राजनीति हुई।

जेएनयू की जांच रिपोर्ट में भारत विरोधी नारेबाजी की पुष्टि हुई, लेकिन कहा गया कि नारेबाजी करने वालों में बाहरी तत्व शामिल थे। अब लगभग वैसी ही घटना र्शीनगर एनआईटी में घटी है, जहां अलगाववादी तत्व भारत विरोधी मानसिकता और मुहिम को बढ़ावा देकर आग में घी डालने का कृत्य कर रहे हैं। तसल्ली की बात है कि जम्मू-कश्मीर में नवगठित महबूबा मुफ्ती सरकार के साथ-साथ केन्द्र की मोदी सरकार वहां के घटनाक्रम पर बारीक निगाह रखे हुए हैं। हालात को सामान्य बनाने की दिशा में कुछ प्रयास किए जा रहे हैं परन्तु गैर कश्मीरी छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर खासे चिंतित हैं।

उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को चिट्ठी भेजकर वहां के हालातों की विस्तृत जानकारी दी है। साथ ही एनआईटी परिसर में केन्द्रीय बलों की तैनाती सहित कई मांगें भी रखी हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शिक्षण संस्थानों में राजनीति से प्रेरित घट रही इस तरह की घटनाओं को लेकर चिंतित बताए जा रहे हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा से बातचीत कर जरूरी कदम उठाने को कहा है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक तीन सदस्यीय टीम भी इंस्टीट्यूट का दौरा कर रिपोर्ट देने वाली है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जिस तरह गैर कश्मीरी छात्रों पर बल प्रयोग किया है, उससे हालात और खराब हुए हैं। इसके बाद से उन छात्रों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन पर आस-पड़ोस के घरों से पत्थर फेंके जा रहे हैं। कैंटीन चलाने वालों की फिकराकशी का शिकार होना पड़ रहा है। कुछ विभागों के टीचर्स की तरफ से धमकियां मिल रही हैं। यहां करीब डेढ़ हजार गैर कश्मीरी छात्र इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल कर रहे हैं।

इन छात्रों का कहना है कि परिसर के भीतर कई फैकल्टीज में अलगाववादी मानसिकता के टीचर बैठे हैं, जो भारत विरोधी मुहिम को हवा देते आए हैं। दरअसल, पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 31 मार्च की रात्रि में हुई, जब टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज ने भारतीय क्रिकेट टीम को पराजित कर दिया। कश्मीरी छात्रों के एक गुट ने इस पर जश्न मनाना शुरू कर दिया और भारत विरोधी नारेबाजी की। गैर कश्मीरी छात्रों ने इसका विरोध करते हुए न केवल भारत माता की जय के नारे बुलंद किए वरन अगली सुबह तिरंगा लेकर परिसर के भीतर प्रदर्शन भी किया।

उन्होंने एनआईटी प्रशासन से उन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, जिन्होंने भारत विरोधी नारे लगाए। साथ ही छात्र परिसर में तिरंगा झंडा लगाए जाने की मांग भी कर रहे हैं। आरोप यह लग रहा है कि गैर कश्मीरी छात्रों की आवाज को दबाने के लिए न केवल स्थानीय पुलिस का सहारा लिया गया, बल्कि निहत्थे छात्रों पर निर्मम तरीके से लाठाचार्ज भी किया गया।

दावा किया जा रहा है कि पुलिस कार्रवाई में करीब सौ छात्र घायल हुए हैं। उधर, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि छात्र इंस्टीट्यूट से बाहर जाकर प्रदर्शन पर उतारू थे। ऐसे में कानून व्यवस्था बेकाबू होने की आशंका थी। उन्हें रोकने के लिए ही बल प्रयोग करना पड़ा। वस्तुस्थिति क्या है, यह जांच के बाद साफ होगा, लेकिन जिस तरह कुछ राजनीतिक दल इसे तूल देकर फायदा उठाने की फिराक में हैं, उससे हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ने की ही आशंका है।

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