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अभूतपूर्व जनसैलाब के बीच मोदी का नामांकन

जहां-जहां से मोदी का काफिला गुजरा, वहां गगनभेदी नारे सुनाई दिए। चारों तरफ भाजपा के ध्वज लहराते नजर आए।

अभूतपूर्व जनसैलाब के बीच मोदी का नामांकन
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को बनारस लोकसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। इस अवसर पर काशी हिंदू विवि से लेकर कचहरी तक मार्ग पर, उसके दोनों तरफ और छतों पर जो जनसैलाब उनके सर्मथन में उमड़ा, वह अभूतपूर्व रहा। लोगों में जबरदस्त जोश दिखाई दिया। जहां-जहां से मोदी का काफिला गुजरा, वहां गगनभेदी नारे सुनाई दिए। चारों तरफ भाजपा के ध्वज लहराते नजर आए।
ऐसे स्वागत और अभिनंदन से अभिभूत नरेन्द्र मोदी ने काशीवासियों को भरोसा दिलाया कि गंगा को निर्मल करने से लेकर यहां के बुनकरों और दूसरे वगरें की परेशानियों का वे ख्याल रखेंगे। संभवत: मोदी बनारस से चुनाव लड़ने जा रहे ऐसे पहले प्रत्याशी हैं, जिन्हें लोगों ने इस कदर सर्मथन दिया और सिर आंखों पर बैठाया है। एक दिन पहले ही आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने भी रोड़ शो करके नामांकन दाखिल किया है। दोनों के बीच अंतर साफ दिखाई दिया।
केजरीवाल जहां पूरे समय मोदी और राहुल को कोसते दिखे, वहीं मोदी ने अपने संक्षिप्त संदेश में बनारस के दुलार के प्रति हृदय से आभार प्रदर्शित करते हुए इसका संकल्प लिया कि वे वहां की बदहाली को खुशहाली में बदलने का पूरा प्रयास करेंगे। मोदी ने कहा कि भाजपा ने उन्हें बनारस से चुनाव लड़ने के लिए भेजा, लेकिन उन्हें लगता है कि ना उन्हें किसी ने भेजा है और न वे स्वयं आए हैं, उन्हें तो मां गंगा ने बुलाया है। अपने जन्मस्थल वडनगर को शिव की भूमि बताते हुए नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी से उसके रिश्ते पर प्रकाश डाला और कहा कि उन्हें यहां आकर ऐसा लगा जैसे कोई बालक अपनी मां की गोद में लौटा हो।
दरअसल, चौबीस अप्रैल को जिस समय वे नामांकन दाखिल करने के लिए काशीनगरी पहुंचे, उस समय उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाड़ु, असम, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, जम्मू-कश्मीर और पुंडुचेरी की कुल 117 सीटों के लिए मतदान हो रहा था। जिस समय लोग टीवी स्क्रीन पर बनारस में उमड़ते जन सैलाब को निहार रहे थे, उसी वक्त असम में वोट डालने पहुंचे प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह कह रहे थे कि उन्हें तो कहीं मोदी की लहर नजर नहीं आ रही है।
यह सिर्फ मीडिया तक सीमित है। बहरहाल, यह भी पहली बार हो रहा है कि किसी सीटिंग प्रधानमंत्री को चुनाव प्रचार से दूर कर दिया गया हो। मोदी के संबंध में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की गलतबयानी और निरंतर नकारात्मकता का ही नतीजा है कि उन्हें देखने और उनके प्रति सर्मथन व्यक्त करने के लिए बनारस में अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा है। इससे आश्चर्य की बात भला और क्या हो सकती है कि प्रधानमंत्री को बदलाव की यह स्पष्ट बयार दिखाई ही नहीं दे रही है। बहरहाल, मोदी के रोड शो का चौबीस अप्रैल के मतदान के साथ-साथ आगे होने वाले तीनों चरणों के मतदान पर सीधा प्रभाव पड़ने की उम्मीद जाहिर की जा रही है। सोच समझकर ही शास्त्रीय गायक पंडित छन्नू लाल मिर्श, मदन मोहन मालवीय के परिवार के सदस्य, एक नाविक और एक बुनकर को उनका प्रस्तावक बनाया गया है। इसमें भी सबके साथ का संदेश है।
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