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चिंतन: धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पुख्ता करने की जरूरत

1984 से अब तक 32 से ज्यादा बार मंदिरों में हादसे हुए हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

चिंतन: धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पुख्ता करने की जरूरत
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एक बार फिर मंदिर में हादसे ने हमें यह सोचने के लिए मजबूर किया है कि हक कब चेतेंगे? कब तक श्रद्धालु धार्मिक स्थलों पर 'लापरवाही' के शिकार होते रहेंगे? देश में विभिन्न धर्मों के सैकड़ों धार्मिक स्थल हैं, जहां किसी न किसी विशेष अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन होते रहते हैं। प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर होने वाले विशेष आयोजनों में हजारों-लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन देखा गया है कि भीड़ को संभालने के लिए मंदिर प्रबंधन के पास विशेष इंतजाम नहीं होते हैं। केरल के कोल्लम जिले में पुतिंगल देवी मंदिर में आतिशबाजी के दौरान आग लगने से 110 लोगों की मौत और 350 लोगों के घायल हो जाने के मामले में भी घोर लापरवाही की बात सामने आ रही है।

कहा जा रहा है कि जिस परंपरा के निर्वहन के लिए मंदिर में आतिशबाजी की जानी थी, उसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी। जबकि कोल्लम के पुतिंगल देवी मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी थी कि वह इसके लिए परमिशन लेता। मंदिर प्रबंधन को पता था कि मलयालम नव वर्ष के मौके पर यहां बड़ी तादाद में र्शद्धालु आते हैं। वर्षों से पूजा-अनुष्ठान के बाद आतिशबाजी की जाती है, हालांकि अब मंदिर प्रांगण में आतिशबाजी पर प्रशासन की ओर से रोक है। फिर भी प्रबंधकों ने आतिशबाजी की तैयारी की, बेहिसाब पटाखे इकट्ठे किए। आज नतीजा ये हुआ कि 110 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह पहला मौका नहीं है।

1984 से अब तक 32 से ज्यादा बार मंदिरों में हादसे हुए हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई है। केरल में ही 1999 में एक हिंदू धार्मिक स्थल पर मची भगदड़ में 51 लोग मारे गए थे, तो 14 जनवरी 2011 को सबरीमाला मंदिर में हुए भगदड़ में 106 लोगों की जानें गई थीं और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसके अलावा हरिद्वार में कुंभ के दौरान भगदड़, हिमाचल के नैना देवी मंदिर हादसे, राजस्थान के जोधपुर के चामुंडा देवी मंदिर में हादसे, इलाहाबाद कुंभ के दौरा भगदड़, महाराष्ट्र के सतारा में हादसे प्रमुख हैं। सभी हादसे प्रबंधन की लापरवाही के चलते हुए हैं।

लेकिन अभी तक हम धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा के कड़े नियम नहीं बना पाए हैं। कोल्लम के पुतिंगल मंदिर हादसे की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मुआवजे का भी ऐलान कर दिया गया है, लेकिन जरूरत इस बात की है हम अपने धार्मिक स्थलों को सुरक्षित कैसे बनाएं, ताकि र्शद्धालु काल कवलित न हों। पुतिंगल मंदिर हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना देरी किए कोल्लम पहुंचे, उन्होंने राहत बचाव अभियान का जायजा लिया, वे घायलों से अस्पतालों में मिले।

एनडीआरएफ व सेना की टीम राहत बचाव में जुटी हुई है। राज्य और केंद्र की ओर से हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को दस और दो लाख रुपये व घायलों को दो लाख और पचास हजार रुपये मुआवजे का ऐलान किया गया है। केरल में विधानसभा चुनाव हो रहा है, इसे देखते हुए 'जांच' पर कांग्रेस ने राजनीति भी शुरू कर दी, हालांकि इस हृदय विदारक हादसे पर राजनीति करना किसी भी दल के लिए उचित नहीं है। यह समय संवेदना जताने और पीड़ितों को अधिक से अधिक मदद पहुंचाने का है। इस हादसे से सबक लेते हुए राज्य सरकारों को चाहिए कि वे धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करवाएं और प्रबंधकों पर नकेल कसें।

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