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चिंतन: अदालत के फैसले को राजनीतिक रंग न दें

ऐसा लगता है कि अपने को फंसता देख ही सोनिया व राहुल गांधी इसे जानबूझकर राजनीतिक साजिश बताने की कोशिश कर रहे हैं।

चिंतन: अदालत के फैसले को राजनीतिक रंग न दें
नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस का रवैया हैरान करने वाला है। आखिर सोनिया और राहुल गांधी अपने ऊपर लगे करोड़ों की संपत्ति हड़पने के आरोपों को लेकर न्यायपालिका का सामना करने से बचना क्यों चाहते हैं। दरअसल, निचली अदालत ने गत वर्ष इस मामले में उन्हें कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किया था, लेकिन उन्होंने इसे खारिज कराने के लिए हाईकोर्ट में अपील थी। दोनों कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी से छूट चाहते थे, लेकिन हाईकोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिल पाई है।
अब उन्हें पेश होना पड़ेगा। वैसे भी आरोपी की कोर्ट में पेशी एक सामान्य न्यायिक प्रक्रिया है, जिसे न्यायव्यवस्था में विश्वास रखने वाला हर व्यक्तिपालन करता, लेकिन कांग्रेस इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश करती दिख रही है। जबकि कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना है कि इस केस की सुनवाई होनी चाहिए। यदि उसे नेशनल हेराल्ड केस में गड़बड़ियां नहीं दिखाई देतीं तो उन्हें पेश होने का आदेश नहीं देती बल्कि इसे खारिज कर देती।
ऐसा लगता है कि अपने को फंसता देख ही सोनिया व राहुल गांधी इसे जानबूझकर राजनीतिक साजिश बताने की कोशिश कर रहे हैं। जब यह कोर्ट का मामला है, तो कांग्रेस को कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए। अपना पक्ष रखना चाहिए। इसे लेकर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने और संसद को बाधित करने का कोई औचित्य ही नजर नहीं आता। वह भी ऐसे समय में जब वहां सूखे पर किसानों की समस्याओं पर चर्चा हो रही हो। दरअसल, मोदी सरकार के प्रति कांग्रेस की सोच कुछ-कुछ साफ होती दिख रही है। उसका रवैया है कि सरकार को कामकाज नहीं करने दो, संसद को ठप करो, ताकि कोई विधायी काम नहीं हो सके।
इस प्रकार जब पांच साल पूरे हो जाएं तो वे देश से कह सकें कि मोदी सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर पाई। वह काम नहीं कर रही है। कांग्रेस इसलिए भी बौखलाई हुई दिख रही है क्योंकि रॉबर्ट वाड्रा पर हरियाणा में जांच चल रही है। अनुमान है कि जून तक आयोग की रिपोर्ट आ जाएगी। उसका भी कांग्रेस को सामना करना पड़ेगा।
यही वजह है कि अभी से ही एक माहौल बनाया जा रहा है जिससे लोगों में यह धारणा बनाई जा सके कि मोदी सरकार विपक्ष पर बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। जबकि हकीकत इससे जुदा है। जिस मामले में समन जारी हुआ है उससे सरकार का कोई लेना देना नहीं है। सुब्रrाण्यम स्वामी की एक याचिका पर केस चल रहा है। वे बेशक भाजपा के नेता हैं, लेकिन किसी गड़बड़ी को कानून के संज्ञान में लाने का हर किसी को अधिकार है।
वहीं हम जानते हैं कि अदालत का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। देश में न्यायपालिका स्वतंत्र होकर फैसला करती है। ऐसे में कांग्रेस का यह व्यवहार लोगों की समझ से बाहर है। अभी देश के सामने जो ज्वलंत मुद्दे हैं उस पर सरकार से सवाल पूछने की बजाय वह हो हल्ला मचाकर देश को गुमराह करती दिख रही है।
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