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पड़ोसियों के साथ बेहतर रिश्ता बनाने की कोशिश

समारोह खुले में रखने का मकसद यही है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी हो सके।

पड़ोसियों के साथ बेहतर रिश्ता बनाने की कोशिश
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नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी 26 मई को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सहित सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) देशों के सभी राष्ट्राध्यक्षों को समारोह में शामिल होने का न्योता भेजा है। सार्क में भारत सहित आठ देश पाकिस्तान, र्शीलंका, बांग्लादेश, मालदीव, नेपाल, भूटान और अफगानिस्तान शामिल हैं। उनके शपथ ग्रहण समारोह में करीब तीन हजार लोग शामिल होंगे।
समारोह खुले में रखने का मकसद यही है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी हो सके। जाहिर है कि मोदी चाहते हैं कि हर वर्ग व क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ भारत के मित्र व पड़ोसी देशों के प्रतिनिधि भी इस ऐतिहासिक मौके पर मौजूद रहें। नरेंद्र मोदी देश का कमान संभालने के पहले दिन से ही एक सकारात्मक संदेश भारत की तरफ से उन तमाम देशों को भेजने के इच्छुक दिखाई दे रहे हैं जिनसे हमारे ऐतिहासिक, रणनीतिक व सामरिक रिश्ते रहे हैं।
खासकर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को शपथ ग्रहण में आमंत्रित करने का जो उनका फैसला है, वह उन सारी शंकाओं को निर्मूल साबित कर रहा है कि मोदी के नेतृत्व में बनने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान पड़ोसी देशों से रिश्ते खराब होंगे या टकराव के हालात बनेंगे। मोदी ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान और विभिन्न चैनलों को दिए अपने इंटरव्यू में भी साफ कहा था कि हम दुनिया के सभी देशों से बराबरी का रिश्ता रखना चाहते हैं। हम ना तो किसी को आंख दिखाना चाहते हैं और ना ही किसी से आंख झुकाकर बात करने के इच्छुक हैं।
नरेंद्र मोदी जहां एक तरफ सदाशयता का परिचय देते हैं। पड़ोसियों से अपने रिश्ते बेहतर रखना चाहते हैं। वहीं दूसरी ओर उनसे संवाद भी कायम रखना चाहते हैं। यह एक सही रणनीति और कूटनीति का हिस्सा है। हालांकि यह सही हैकि पाकिस्तान के साथ-साथ चीन से हमारे रिश्ते कभी सहज नहीं रहे हैं। लंबे समय से चले आ रहे सीमा संबंधी विवाद के कारण सीमा पर टकराव और अशांति का माहौल रहा है जिसके चलते संवाद में भी तल्खी देखी गई है।
पाक की ओर से संघर्ष विराम का उल्लंघन आम बात है। पाक प्रायोजित आतंकवाद का भारत लंबे समय से शिकार भी रहा है। वहीं चीन की ओर से होने वाली घुसपैठ की घटना भी आम बात है। अभी भी दोनों देशों के बीच सीमा विवाद कायम है। वह भारत के अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम पर दावा जब ना तब जताता रहा है। इन समस्याओं का सर्वमान्य हल खोजने की चुनौती है। हालांकि इसके बावजूद नवाज शरीफ ने मोदी को बधाई दी थी और चीन की ओर से भी सकारात्मक संदेश आया था।
इसी तरह अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों के प्रमुखों ने उनकी जीत पर बधाई दी थी। इस तरह अंतरराष्ट्रीय जगत की ओर से मोदी को एक सकारात्मक संकेत मिला है, जिसे एक तार्किक दिशा में ले जाने की तार्किक कोशिश, नवाज शरीफ सहित सार्क देशों के प्रमुखों को आमंत्रण भेजकर, नरेंद्र मोदी की ओर से भी हुई है।
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