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गरीबों को सर्मपित की मोदी ने अपनी सरकार

शपथ-ग्रहण से पहले नरेन्द्र मोदी को कुछ और जिम्मेदारियों का निर्वहन करना है।

गरीबों को सर्मपित की मोदी ने अपनी सरकार
नई दिल्ली. छब्बीस मई को नरेन्द्र मोदी देश की बागडोर संभाल लेंगे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया है। इससे पूर्व संसद के केन्द्रीय कक्ष में पहले भारतीय जनता पार्टी के संसदीय दल ने उन्हें अपना नेता चुना और इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उनके सहयोगियों ने भी यह औपचारिकता पूरी कर राष्ट्रपति मुखर्जी को 335 सांसदों के सर्मथन की चिट्ठी सौंपकर मोदी के प्रधानमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
शपथ-ग्रहण से पहले नरेन्द्र मोदी को कुछ और जिम्मेदारियों का निर्वहन करना है। अभी गुजरात के मुख्यमंत्री का कार्यभार उनके कंधों पर है। बतौर मुख्यमंत्री वे 21 मई को गुजरात विधानसभा के विशेष सत्र में भाग लेंगे, जहां सदस्य उनकी सेवाओं के प्रति आभार प्रदर्शित करेंगे। बुधवार को ही उनके स्थान पर नए मुख्यमंत्री के चुने जाने की प्रक्रिया पूरी कर लिये जाने की संभावना है। नई मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी कैबिनेट की वरिष्ठ नेता आनंदी बेन पटेल का नाम सबसे आगे चल रहा है। बहरहाल, ये सब औपचारिकताएं अगले कुछ दिनों में पूरी हो जाएंगी।
यह साफ हो चुका है कि मोदी 26 मई को सायं छह बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे। शुरू में उनकी मंत्री परिषद का आकार छोटा ही रहने की संभावना है। वे अपने भाषणों में यह कहकर इसका संकेत भी देते रहे हैं कि मिनीमम गवर्नमेंट-मैक्सीमम गवर्नेंस। संसद के केन्द्रीय सभागार में उन्हें संसदीय दल का नेता चुने जाने के दौरान कई पल ऐसे आए, जब नरेन्द्र मोदी काफी भावुक हो गए। एक बार वे रो भी पड़े। लाल कृष्ण आडवाणी के साथ-साथ कई अन्य नेताओं की आंखें भी भर आईं।
आडवाणी की एक टिप्पणी पर मोदी इस कदर भावुक हुए कि भरे गले के चलते उन्हें भाषण देते हुए रुकना पड़ा। यह कहना पड़ा कि जिस तरह भारत उनकी मां है, उसी तरह भाजपा भी मां है और मां की सेवा करके कोई पुत्र उस पर कृपा नहीं करता, बल्कि सेवा करके सौभाग्य प्राप्त करता है। मोदी के भाषण ने बहुतों के दिलों को छू लिया। वे देश को आजादी दिलाने वाले शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों और भाजपा व जनसंघ के जरिए 1952 से लगातार संघर्ष करती आ रही पांच पीढ़ियों को स्मरण करना नहीं भूले। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी भी याद आए कि वो यहां होते तो सोने पर सुहागे वाली बात हो जाती।
बड़े दिल का परिचय देते हुए मोदी ने अब तक की तमाम केन्द्रीय सरकारों के अच्छे कामों की प्रशंसा करते हुए उनके प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित किया। मोदी यह बताना नहीं भूले कि कोई पदभार महत्वपूर्ण नहीं होता है। कार्यभार और जिम्मेदारी सबसे बड़ी बात होती है। नए प्रधानमंत्री ने सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि उनकी यह नई सरकार गरीबों को सर्मपित रहेगी। मोदी ने पूछा कि सरकार किसके लिये? फिर उत्तर दिया। सरकार वो, जो गरीबों के लिये सोचे। गरीबों की सुने और गरीबों के लिये जीये। उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार गरीबों, वंचितों, कोटि-कोटि युवाओं और मान-सम्मान के लिए तरसती मां, बहनों और बेटियों को सर्मपित रहेगी।
उन्होंने हाशिये पर पड़े तबके के लिए काम करने का संकल्प लेकर साफ संकेत दे दिया कि उनकी सरकार की चिंता में कौन से वर्ग रहने वाले हैं। ऐसा करके उन्होंने ऐसे तमाम लोगों को जवाब दे दिया है, जो पूरे चुनाव के दौरान प्रचार करते रहे कि उनकी सरकार कॉरपोरेट घरानों की ही फिक्र करने वाली सिद्ध होगी। मोदी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे देश के लिये जीयेंगे-खुद के लिये नहीं और पांच साल बाद 2019 में अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करके बताएंगे कि उन्होंने क्या-क्या किया है। मोदी के केन्द्रीय कक्ष के उद्बोधन ने सबको आश्वस्त कर दिया है।
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