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मुंबई ट्रेन धमाकों के गुनाहगारों को सजा

जांच एजेंसियों ने इस घटना में 30 आरोपियों को सामने लाया, जिसमें से 13 की पहचान पाकिस्तानी नागरिक के रूप में हुई।

मुंबई ट्रेन धमाकों के गुनाहगारों को सजा
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की जीवनरेखा मानी जाने वाली लोकल ट्रेनों में 11 जुलाई, 2006 को हुए सात सिलसिलेवार बम धमाके से जुड़े मामले में अदालत ने 12 में से पांच गुनाहगारों को फांसी की सजा देकर सख्त संदेश दिया है जबकि सात को उम्रकैद की सजा दी है। ये सभी हमलावर प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी से जुड़े हुए थे। नौ साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने उस हमले के घाव को फिर ताजा कर दिया है।
आजाद भारत में अब तक के सबसे बड़े आतंकी घटनाओं में से एक उस धमाके ने सैकड़ों परिवार को तबाह कर दिया था। इस हमले में 188 लोग मारे गए थे और 824 लोग घायल हुए थे। दहशतगदरें ने अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए लोकल ट्रेनों को चुना था, जिसमें रोजाना सत्तर लाख मुंबईवासी सफर करते हैं, शायद इसलिए कि अधिक से अधिक नुकसान हो। शाम को मुंबई के लोकल ट्रेनों में लोग दफ्तर से घर वापस आते हैं। यहां मुंबईवासियों की साहस की दाद देनी होगी कि उन्होंने ऐसे भीषण हमलों के आगे कभी हथियार नहीं डाले। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी हैकि विशेष अदालत ने इस मामले में 13 में से सिर्फ एक आरोपी को ही बरी किया है, यह बताता है कि अभियोजन ने बड़ी मजबूती से अपना पक्ष रखा। हालांकि इस मामले का दूसरा पहलू यह भी हैकि कानून के हाथ से अभी भी इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता व लश्कर ए तैयबा का आतंकी अजीम चीमा और कई अनेक आतंकी गिरफ्त से बाहर हैं।
दरअसल, जांच एजेंसियों ने इस घटना में 30 आरोपियों को सामने लाया, जिसमें से 13 की पहचान पाकिस्तानी नागरिक के रूप में हुई, जबकि बाकी 17 की पहचान भारतीय नागरिक के रूप में हुई। इस मामले में चार दोषी भारतीयों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है जबकि 13 पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं हो सकी है। वे गिरफ्त से बाहर हैं। बहरहाल, इस फैसले ने पाकिस्तान को एक बार फिर बेनकाब किया है। इससे यह सच्चाई पुख्ता हुई है कि वहां से आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है क्योंकि जिन लोगों को सजा सुनाई गई है, उन्हें पाकिस्तान स्थित लश्कर के आतंकियों ने ही प्रशिक्षण दिया था। वास्तव में भारत पाकिस्तान पोषित आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार है।
यहां होने वाले आतंकी हमलों के तार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और लश्कर जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े होने के सबूत बार-बार मिलते रहे हैं। जाहिर है, भारत को इससे पार पाना है तो अपनी सुरक्षा और खुफिया व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही पाकिस्तान पर भी दबाव बनाना उतना ही जरूरी है। यह अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद आतंकवाद पर नए सिरे से बहस आरंभ हुई है। मुश्किल यह है कि भारत द्वारा तमाम सबूत उपलब्ध कराए जाने के बावजूद पाकिस्तान ना तो अपनी आतंक की फैक्ट्री को बंद कर रहा हैऔर न ही भारत में हमलों में शामिल रहे हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों पर कोई कार्रवाई कर रहा है। ऐसे में पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को जब तक कड़ी से कड़ी सजा नहीं दिलाई जाती, तब तक मुंबई के लोकल ट्रेनों में हुए हमलों के पीड़ितों को पूरा न्याय नहीं मिल सकेगा।
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