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छोटी-छोटी बातों के जरिए बड़ी समस्याओं का जिक्र

किसी भी देश में शिक्षकों के मान सम्मान का स्तर गिरना सभ्य समाज के निर्माण में बाधक है।

छोटी-छोटी बातों के जरिए बड़ी समस्याओं का जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के करीब 18 लाख स्कूली बच्चों से बात करते हुए जिन बातों को जिक्र किया है, वे देश की बड़ी समस्याओं में शुमार होती हैं। विभिन्न मंत्रालय भारी भरकम नीतियों के तहत उनसे पार पाने का प्रयास कर रहे हैं। आजाद भारत में पहली बार कोई प्रधानमंत्री सरल शब्दों में न केवल बच्चों के सामने उन्हें रखा, बल्कि उनसे लड़ने का जोश भी भरा। किसी भी देश में शिक्षकों के मान सम्मान का स्तर गिरना सभ्य समाज के निर्माण में बाधक है। जिस शिक्षक ने हमारी बुनियाद रखी है उसे हम क्यों भूल जाते हैं। क्या इसी वजह से लोग टीचर बनना नहीं चाह रहे हैं, जबकि अच्छे शिक्षकों की मांग पूरी दुनिया में है। प्रधानमंत्री का यह कथन हमें अपनी जड़ों की ओर देखने को प्रेरित करता है कि किसी भी इंसान के जीवन में दो लोगों, मां और शिक्षक का सबसे ज्यादा योगदान होता है। आज स्कूलों में ढांचागत सुविधाओं का अभाव तो है ही शिक्षक-छात्र अनुपात भी निम्न है। ऐसे में गणमान्य लोगों से उनकी यह अपील कि वे अपने आसपास के स्कूलों में किसी तय समय में अपनी रुचि के विषय पढ़ाएं, कारगर हो सकती है। इससे शिक्षकों की कमी तो दूर होगी है, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिलेगी। आज बच्चों का जीवन किताबों और टीवी में ही सिमट रहा है। बचपन मर रहा है। इस पर उनका सुझाव था कि बच्चे खेलकूद को भी जीवन का हिस्सा बनाएं। किताबें पढ़े, उसे आदत बनाएं पर खेल भी जीवन निर्माण के लिए जरूरी है। खेलों में कॅरियर मौजूद है। सही शिक्षा और संस्कार से इंसान जीवन में आगे बढ़ सकता है। वहीं उन्होंने जीवन में अनुशासन और कठिन परिश्रम को सबसे आगे रखने का सुझाव दिया। इसके लिए उन्होंने स्वयं का उदाहरण दिया। अच्छी शिक्षा ही अच्छा अनुभव का आधार बनती है। आज शिक्षकों में बच्चों के प्रति भेदभाव किए जाने की खबरें आम हैं। शिक्षकों से कहा कि जिस तरह मां के लिए सारे बच्चे बराबर होते हैं, उसी तरह से शिक्षकों को भी सभी बच्चों पर समान ध्यान देना चाहिए। क्योंकि हर छात्र में कोई न कोई गुण होता है, एक अच्छे शिक्षक का काम उसे तराशना, उभारना और दिशा देना होता है। यहीं से स्वस्थ समाज का निर्माण होता है। आज लड़कियों के साथ परिवार के स्तर पर ही भेदभाव होता है। महिला साक्षरता एक बड़ी समस्या है। ऐसे में यह कहना काफी महत्वपूर्ण है कि एक महिला पढ़ती है तो पीढ़ियां सुधरती हैं जबकि एक लड़का पढ़ता है तो एक परिवार ही सुधरता है। इसमें दो राय नहीं कि अच्छा विद्यार्थी व नागरिक बनना भी देश सेवा है। भारत में ऊर्जा और पानी की समस्या है। वहीं ग्लोबल वार्मिंग भी समस्या पैदा कर रही है। लिहाजा उनका बच्चों को बिजली, पानी बचाने और प्रकृति से जुड़ने का सुझाव देना अहम है। आज राजनीति का सबसे ज्यादा क्षरण हुआ है तो इसकी एक वजह इसे पेशा मानने वालों की बढ़ती संख्या है। प्रधानमंत्री ने बच्चों के जरिए देश को बताया कि यह पेशा नहीं बल्कि सेवा है। यह सेवा भाव पद के जरिए नहीं बल्कि अपनत्व के जरिए पैदा होनी चाहिए। यदि इसे हर कोई अपने जीवन में उतारे तो राजनीति में फैली गंदगी दूर हो सकती है। वहीं आज देश में पढ़े लिखे बेरोजगारों की फौज खड़ी है। छात्रों ने डिग्रियां ले ली है, परंतु उनमें कौशल नहीं है। लिहाजा बेरोजगारी को दूर करने के लिए उन्होंने डिग्री के साथ हुनर पर जोर दिया है। देखा जाए तो प्रधानमंत्री ने शिक्षक दिवस पर देश भर के बच्चों के साथ बातचीत करते हुए छोटी-छोटी बातों के जरिए बड़ी समस्याओं से पार पाने का सार्थक प्रयास किया है। और इस तरह उन्होंने गुरु-शिष्य को जोड़ने वाली डोर को मजबूती देना का प्रयास किया है।
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