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चिंतनः पाक का अचानक दौरा बड़ा कूटनीतिक दांव

पाकिस्तान के साथ जब-जब लड़ाई हुई रूस ने हमारी मदद की- पीएम मोदी

चिंतनः पाक का अचानक दौरा बड़ा कूटनीतिक दांव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा से ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य जुड़े हैं। रूस के साथ भारत के पुराने रिश्ते हैं। वह हर सुख-दुख में हमारे साथ खड़ा रहा है। शीतकाल के दौर में दुनिया दो भागों में बंट गई थी। एक की अगुआई सोवियत संघ कर रहा था। दूसरी की अगुआई अमेरिका कर रहा था, लेकिन भारत गुटनिरपेक्ष देशों के साथ खड़ा होना तय किया।
इसके बाद भी पाकिस्तान के साथ जब-जब लड़ाई हुई रूस ने हमारी मदद की। सोवियत संघ के विघटन के बाद हालात जरूर बदले। अमेरिका दुनिया में महाशक्ति बन कर उभरा। उसके साथ हमारे सामरिक, आर्थिक, विज्ञान और अंतरिक्ष आदि क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने के बाद भी रूस के साथ हमारे रिश्ते बने हुए हैं।
रूस व भारत के बीच हर साल शिखर स्तर की बैठक होती है। एक साल भारत के प्रधानमंत्री इसमें शिरकत करने रूस जाते हैं, तो दूसरी बार रूस के राष्ट्रपति भारत आते हैं। इस बार रूस के मॉस्को में आयोजित 16वें शिखर सम्मेलन के अवसर पर दोनों देशों के बीच कई रक्षा और परमाणु समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं।
नरेंद्र मोदी के साथ वार्ता में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई। वहीं पूर्ण रूप से स्वदेशी वायु रक्षा मिसाइल और रडार प्रणाली का निर्माण करने में रूस भारत की मदद करेगा।
इससे साफ है कि समय के साथ दोनों देशों के रिश्तों में गर्माहट आई है। अफगानिस्तान हमारा पड़ोसी देश है। वह लंबे समय से विकट स्थितियों से गुजर रहा है। इसमें भारत ने दो कदम आगे बढ़कर उसे सहयोग करने का बीड़ा उठाया है। चाहे वहां संसद का निर्माण करना हो (जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को किया), सड़क का निर्माण करना हो, सेना व पुलिस बलों को प्रशिक्षित करने की बात हो, चिकित्सा सेवा मुहैया कराने की बात हो या शिक्षक तैयार करने का सवाल हो, हर तरीके से भारत अफगानिस्तान के संकट का साथी बना हुआ है।
अफगानिस्तान व भारत दोनों पाक प्रायोजित आतंकवाद से जूझते रहे हैं। तालिबान, हक्कानी गुट व दूसरे चरमपंथी संगठन अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन भारत ने हर तरह की इमदाद पहुंचा कर उसके इरादों को कमजोर नहीं होने दिया और इस दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पाकिस्तान जाने का कोई कार्यक्रम नहीं था, लेकिन अफगानिस्तान से आने के दौरान अचानक उन्होंने लाहौर रुकने व वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात करने का फैसला कर बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है।
भारत हमेशा से अपने पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण व सहयोगात्मक रिश्तों का पक्षधर रहा है, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से लगातार उकसाने वाली हरकतें होती रही हैं जो बातचीत को पटरी से उतार देती हैं।
रूस, अफगानिस्तान और पाकिस्तान की इस संक्षिप्त यात्रा के अच्छे परिणाम निकलेंगे, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए। खासतौर से दक्षिण मध्य एशिया में शांति का माहौल रहे इसके लिए जरूरी हैकि भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान एकजुट हों और गरीबी, अशिक्षा, आतंकवाद तथा बेरोजगारी जैसी समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।
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