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दोस्ती को नया आयाम देने का संकल्प

इस दौरे से दोनों देशों ने अपने संबंधों को द्विपक्षीय सीमाओं से निकाल कर वैश्विक दर्जा प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय किया है।

दोस्ती को नया आयाम देने का संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली जापान यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में एक नये अध्याय के रूप में जुड़ गई है। सोमवार को टोक्यो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे के बीच शिखर वार्ता के बाद जारी हुए संयुक्त बयान में भी इसकी झलक साफ दिखी कि दोनों देशों के रिश्तों में नयापन आ रहा है। नरेंद्र मोदी ने बिल्कुल ठीक कहा कि भारत-जापान की साझेदारी दुनिया के सभी देशों के लिए हितकर होगी, क्योंकि ये दोनों एशिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने के साथ आर्थिक महाशक्ति भी हैं। दोनों देशों के सरोकार विश्व शांति और आम लोगों के हित से जुड़े हैं। वैश्विक जगत यह मानता है कि 21वीं सदी एशिया की होगी पर यह कैसी होगी? प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि यह भारत-जापान के संबंधों पर निर्भर करेगा। इस दौरे से दोनों देशों ने अपने संबंधों को द्विपक्षीय सीमाओं से निकाल कर वैश्विक दर्जा प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय किया है। अब दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक दूसरे के हितों को आगे बढ़ाएंगे। नरेंद्र मोदी ने अपना संबोधन हिंदी में देकर भारतीय भाषाओं का मान बढ़ाया है। शिखर वार्ता में सामरिक, आर्थिक, रणनीति, सांस्कृति, शिक्षा, तकनीक आदि के क्षेत्रों में कई अहम समझौते हुए। इससे पता चलता है कि दोनों देशों के संबंधों के क्षेत्रों में विस्तार हो रहा है। हालांकि नागरिक परमाणु समझौते पर मुहर नहीं लग पाई, परंतु मोदी ने स्पष्ट किया कि इसे दोनों देश जल्द ही पूरा कर लेंगे। वहीं जापान भारत को बुलेट ट्रेन बनाने में तकनीकी सहयोग देगा। मोदी सरकार ने देश में पहली बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलाने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही अगले पांच वर्षों में जापान भारत में सभी क्षेत्रों में 3.5 ट्रिलियन येन अर्थात करीब 2.10 लाख करोड़ रुपये निवेश करेगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच पांच अन्य समझौते भी हुए हैं, जिसमें गंगा की सफाई, महिला विकास, स्वच्छ ऊर्जा और क्योटो करार महत्वपूर्ण हैं। क्योटो करार के तहत जापान वाराणसी को क्योटो शहर की तर्ज पर विकसित करने में मदद करेगा। प्रधानमंत्री जापान चेंबर आॅफ कॉमर्स को भी हिंदी में संबोधित करते हुए निवेशकों को यह संदेश देने में कामयाब रहे कि कारोबार कैसे होते हैं और उनके सामने कौन-सी कठिनाइयां आती हैं, उन्हें उसकी समझा है। इसके अलावा जानलेवा बीमारी सिकल सेल एनीमिया से मुकाबले के लिए मेडिसिन में नोबेल विजेता एस यामानाका से भी मुलाकात की। भारत में आदिवासियों में यह बीमारी बड़े पैमाने पर पाई जाती है। उन्होंने चीन को आईना दिखाते हुए कहा कि वे विस्तारवाद नहीं बल्कि विकासवाद के मार्ग पर जाने के हिमायती हैं। चीन भारत की सीमाओं का उल्लंघन करता रहता है, वहीं पूर्वी चीन सागर में द्वीपों को लेकर जापान के साथ उसका विवाद चल रहा है। इस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा में मजबूत विदेश नीति की झलक भी मिली है। इनकी अगले एक महीने में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ होने वाली मुलाकात का रुख भी करीब करीब साफ हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी जापान में दो दिन और रुकेंगे। कुल मिलाकर इस यात्रा की कामयाबी का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि शिंजो एबे ने भी इस दौरे को ऐतिहासिक करार दिया है।

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