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वैश्विक मोर्चे पर भारत के मजबूत कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन देशों चीन, मंगोलिया और दक्षिण कोरिया का दौरा कई मायने में सफल रहा।

वैश्विक मोर्चे पर भारत के मजबूत कदम
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन देशों चीन, मंगोलिया और दक्षिण कोरिया का दौरा कई मायने में सफल रहा। इस यात्रा से कूटनीति के नए आयाम स्थापित हुए तो द्विपक्षीय सहयोग के भी कई नए रास्ते खुले। जिनका आने वाले वर्षों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। मोदी सरकार के केंद्र की सत्ता में आए एक साल पूरा होने वाला है, इतने कम दिनों में अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर उनकी सफलता देखते ही बनी है। हालांकि ऐसा नहीं है घरेलू मोर्चे पर किसी मुद्दे की अनदेखी हुई हो, उन्होंने देश के सामने आने वाली हर समस्या का बखूबी निवारण किया। जहां नए कानून बनाने की जरूरत पड़ी है, वहां नए कानून बनाए गए हैं और जहां आम जनता को फायदा पहुंचाने की बात आई है वहां नीतिगत फैसले लिए गए हैं। हम हाल की विदेश यात्राओं पर बात करें तो प्रधानमंत्री सबसे पहले चीन गए, जहां उनका स्वागत चीन के राष्ट्रपति ने अपने गृहनगर शियान में किया।

कई सवाल छोड़ गर्इं अरुणा शानबाग

चीन के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी देश के नेता को बीजिंग से बाहर इस तरह वहां के राष्ट्रपति की ओर से सम्मान मिला हो। चीन के मीडिया ने तो इसे बड़ी घटना करार दिया, वहीं पूरी दुनिया भी भारत-चीन संबंधों में आए इस बदलाव को देख कर दंग है। दोनों देश पुरानी कड़वाहटों को भूल कर सीमा विवाद को निपटाने के साथ-साथ आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक संबंधों को आगे ले जाने के प्रति प्रतिबद्ध दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि पहले चीन की सरकार के साथ दस अरब डॉलर के 24 समझौते और फिर निजी कंपनियों के साथ 22 अरब डॉलर के 26 समझौते हो सके। गत वर्ष चीन के राष्टÑपति शी जिनपिंग भारत आए थे तब उन्होंने 20 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। भारत में ढांचागत विकास करने और विनिर्माण क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए चीनी निवेश की जरूरत है। व्यापार घाटा की समस्या को दूर करने के लिए एक उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया गया है।

टकराव नहीं संवाद के रास्ते पर चलें केजरीवाल

वहीं नरेंद्र मोदी मंगोलिया जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उसके साथ भारत के 2500 वर्ष पुराने संबंध रहे हैं। चीन और रूस के बीच स्थित यह देश खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से भरा है। ऐसे में इससे मधुर संबंध उपयोगी है। अंतरराष्टÑीय मंचों पर मंगोलिया ने हमेशा भारत का समर्थन किया है। इन संबंधों को और आगे ले जाते हुए प्रधानमंत्री ने वहां ढांचागत विकास के लिए उसे करीब 63 अरब रुपये ऋण के रूप में देने की घोषणा की है। दक्षिण कोरिया से तो भारत के संबंध एक पायदान और ऊपर चढ़ गए हैं। दोनों देश अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक भागीदारी के स्तर पर ले जाने को सहमत हो गए हैं। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच दोहरे कराधान से बचाव समेत सात समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। साथ ही ढांचागत विकास के लिए वह भारत को दस अरब डॉलर की आर्थिक मदद भी देने पर राजी हुआ है। इस प्रकार से देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक साल के कार्यकाल में 17 देशों का महत्वपूर्ण दौरा किया है।

विवादित मुद्दों को परे रख भरोसा बहाली की कोशिश

भारत का पड़ोसी देश भूटान, नेपाल और श्रीलंका हो या अमेरिका, जापान, फ्रांस, आॅस्ट्रेलिया और जर्मनी लगभग सभी महत्वपूर्ण देशों के प्रमुखों से उनकी वार्ता हुई है। इन यात्राओं का प्रभाव ये हुआ हैकि दुनिया भारत की ओर आशा की नजरों से देखने लगी है। पड़ोसी देशों में जहां भरोसा बहाल हुआ है, वहीं विकसित देशों का भारत के प्रति नजरिया बदला है। देसी-विदेशी निवेशकों को भी यहां तमाम संभावनाएं दिखाईदेने लगी हैं। कुल मिलाकर अपनी यात्राओं से वे भारत को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने में सफल हो रहे हैं। मेक इन इंडिया के लिए यह जरूरी है।

द्विपक्षीय रिश्तों को नया आयाम देने की कोशिश

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