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खत्म हुई दशकों की कूटनीतिक अनदेखी

मदसर में यूएई के कारोबारियों के साथ बैठक में मोदी ने कहा कि भारत में कारोबार की अपार संभावनाएं हैं।

खत्म हुई दशकों की कूटनीतिक अनदेखी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दौरे के कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक निहितार्थ हैं। घरेलू राजनीति से इसे जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। आखिर 34 साल बाद किसी प्रधानमंत्री की दूसरी यूएई यात्रा हुई है। इससे पहले 1981 में इंदिरा गांधी ने वहां की यात्रा की थी। सियासी लिहाज से दोनों देश एक दूसरे के पुराने मित्र हैं। वहां भारत के 25 लाख लोग काम करते हैं और अपने देश को हर साल 12 अरब डॉलर की बड़ी रकम भेजते हैं, लेकिन इसके बावजूद इंदिरा गांधी के बाद कई प्रधानमंत्री आए और गए, मगर यूएई का दौरा नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कूटनीतिक अनदेखी को दूर करने में सफल रहे।
सोमवार को वहां के प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जाएद के साथ भारतीय प्रधानमंत्री की सुरक्षा, कारोबार, ऊर्जा, आतंकवाद और सामरिक रिश्तों को ऊंचाई पर ले जाने के मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ता हुई। इससे पहले मदसर में यूएई के कारोबारियों के साथ बैठक में मोदी ने कहा कि भारत में कारोबार की अपार संभावनाएं हैं। चीन सहित जहां दुनिया के दूसरे देशों में ठहराव है, वहीं भारत लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है। यहां दशकों बाद एक स्थिर सरकार आई है, जो तेजी से नीतिगत फैसले ले रही है। यहां बड़ा बाजार भी है। ऐसे में निवेश के लिहाज से भारत सबसे अनुकूल है।
प्रधानमंत्री विश्व की तीसरी सबसे बड़ी यूएई के शेख जायद मस्जिद भी गए। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच तीन दशक की दूरियां कम हुई होंगी। दरअसल इस यात्रा से प्रधानमंत्री का उद्देश्य केवल एक लंबी कूटनीतिक अनदेखी को दूर करना नहीं था। यूएई कुछ साल पहले तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार था, लेकिन अनदेखियों के कारण अब चीन और अमेरिका के बाद वह तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। हालांकि भारत यूएई का अब भी बड़ा कारोबारी पार्टनर है। फिलहाल भारत में इसका निवेश केवल तीन अरब डॉलर का है। जबकि उसकी अर्थव्यवस्था 800 अरब डॉलर की है। भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट सिटी के क्षेत्र में भारी निवेश के अवसर हैं। यदि यहां निवेश होता है तो भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी लाभ होगा। कच्चे तेल व ऊर्जा के क्षेत्र में यूएई हमारा एक अहम पार्टनर है।
भारत को गैस और तेल की जरूरत है और यूएई इसकी भरपाई कर सकता है। उसके पास इसका भंडार है। सुरक्षा के लिहाज से भी वह भारत के लिए अहमियत रखता है। भारत में हुए कुछ आतंकी हमलों की तारें दुबई से जुड़ती हैं। मुंबई में 2008 में हुए हमले का दोषी डेविड हेडली हमले से पहले और बाद में कई बार दुबई में जाकर रहा था। मुंबई में ही 2003 में हुए दोहरे बम विस्फोट में सजा काटने वाले मुहम्मद हनीफ ने धमाकों की योजना दुबई में बनाई थी। वहीं दाऊद इब्राहिम की भी वहां संपत्ति है। यूएई ने भारत को हमेशा सुरक्षा सहयोग दिया है।
इस दौरे से इसमें और मजबूती आने की उम्मीद है। भारत चाहता है कि वह आतंक के खात्मे के लिए भारत का साथ दे। यूएई आईएस के खिलाफ भारत का साथ दे तो हम आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक स्थिति में होंगे। वहां रहने वाले प्रवासी भारतीय अमेरिका और यूरोप से कई मायने में अलग हैं। इस यात्रा की सफलता को देखते हुए मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, आतंकी खतरे से सुरक्षा आदि के लिहाज से लाभदायक होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोप, अमेरिका, चीन व ईस्ट एशिया का दौरा पहले ही कर चुके हैं, लेकिन अब होम ऑफ इस्लाम तक भी वे पहुंच गए। ऐसे में उनकी यह यात्रा कई मायने में खास रही।
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