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मोदी की लोकप्रियता से इतनी घबराहट क्यों

सोलहवीं लोकसभा के लिए चुनाव अंतिम दौर में पहुंच गया है।

मोदी की लोकप्रियता से इतनी घबराहट क्यों

सोलहवीं लोकसभा के लिए चुनाव अंतिम दौर में पहुंच गया है। केंद्र में नई सरकार किसकी बनेगी इसका पटाक्षेप होने में दो हफ्ते से भी कम समय रह गया है। यह ऐसा समय होता है जब मौजूदा सरकार अपने कामकाज को समेटती है और हर विभाग में अब तक हुए कायरें का रिपोर्ट नये सरकार को सौंपने की तैयारी करती है, परंतु इस बीच सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी की चाल ढाल देखकर यह प्रतीत होता है कि वह भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के प्रति राजनीति से प्रेरित कार्रवाई करने से बाज आना नहीं चाहती। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि केंद्र सरकार गुजरात के कथित महिला जासूसी कांड की जांच के लिए जल्दी ही कमीशन का गठन करेगी। ऐसे समय में सरकार की इस सक्रियता से उसकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं? ऐसा लग रहा हैकि कांग्रेस बौखला गई है। उसके नेताओं के चेहरे पर यह बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है। वे नरेंद्र मोदी और उनकी लोकप्रियता से किलस गए हैं। क्योंकि गुजरात के वडोदरा में मतदान के बाद मोदी का कमल का चिह्न् दिखाना इतना बड़ा मुद्दा नहीं था कि उसे चुनाव आयोग से शिकायत की जाए। इस पर मोदी ने सवाल भी खड़ा किया है कि मैंने कोई चाकू नहीं दिखाया। वहीं भारतीय जनता पार्टी तो चुनाव आयोग के उस कदम से आश्चर्यचकित है कि आयोग ने इसे आचार संहिता का बड़ा मुद्दा मान मोदी के खिलाफ एफआईआर भी दर्जा करा दिए। अब तो कांग्रेस मोदी को गिरफ्तार करने की भी मांग करने लगी है। वहीं एक चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में मोदी का कांग्रेस के प्रियंका गांधी के संबंध में दिए गए बयान के संदर्भ में भाजपा की प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने ठीक ही कहा है कि मोदी ने ऐसा कह दरअसल भारतीय संस्कृति को ही प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि देश में किसी की भी बेटी हो वह अपनी बेटी जैसी ही होती है, परंतु पी चिदंबरम और खुद प्रियंका गांधी का इस संबंध में दिया गया बयान दिखाता है कि कांग्रेस के नेता नैतिकता और भारतीय संस्कृति में विश्वास नहीं रखते हैं, बल्कि वे हर बात को राजनीतिक चश्मे से देखते परखते हैं। आज देश में हर तरफ कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार के प्रति भारी आक्रोश है। चुनाव पूर्व कई सर्वे तो यहां तक दावा कर चुके हैं कि पार्टी अपनी अब तक की ऐतिहासिक हार की ओर बढ़ रही है। कांग्रेस की इतनी बुरी स्थिति होने के बावजूद उसके नेता एैरोगेंस नहीं छोड़ रहे हैं। वे देश का मूड भी नहीं भांप रहे हैं या उसकी अनदेखी कर रहे हैं और एक से बढ़कर एक आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं। यह सब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की नाक के नीचे हो रहा है। ऐसे में यह कहा जा सकता हैकि यह सब उनकी सहमति से हो रहा है। तो भारत में वे किस तरह की राजनीति का सूत्रपात करना चाह रही हैं, इससे स्थिति स्पष्ट होती जा रही है। देश में महंगाई, भ्रष्टाचार तथा घोटालों के कारण जनमानस में पहले ही व्यापक रोष है ही, और कांग्रेस के कुछ नेता जिस तरह का व्यवहार कर रहे हैं तथा नरेंद्र मोदी पर जिस तरह से शाब्दिक प्रहार कर रहे हैं उससे भी लोगों में पार्टी के प्रति भारी नाराजगी है। उसका प्रकटीकरण वोटों के माध्यम से हो रहा है।

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