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राष्ट्र विरोधी तत्वों पर हो कड़ी कार्रवाई

अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक के समर्थकों ने खुलेआम न सिर्फ पाकिस्तान परस्त और राष्ट्र विरोधी नारे लगाए, बल्कि पाकिस्तानी झंडे भी लहराए।

राष्ट्र विरोधी तत्वों पर हो कड़ी कार्रवाई
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श्रीनगर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की रैली में बुधवार को जो कुछ भी हुआ उससे हर भारतवासी असहज है। अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक के समर्थकों ने खुलेआम न सिर्फ पाकिस्तान परस्त और राष्ट्र विरोधी नारे लगाए, बल्कि पाकिस्तानी झंडे भी लहराए। यह स्वाभाविक है कि इस दुस्साहस के खातिर मीरवाइज उमर फारूक को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नजरबंद कर दिया। देश विरोधी गतिविधियों में शामिल तत्वों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए, ताकि वे फिर से इस तरह के कदम उठाने की जुर्रत न करें। जम्मू-कश्मीर सहित केंद्र की सरकार ने भी अलगाववादियों के घाटी में असंतोष को बढ़ावा देने के इस कदम पर सख्त नाराजगी जताई है।

चिंतन: अफगानिस्तान में आईएस की दस्तक चिंताजनक

भारत सरकार पाकिस्तानी झंडे और उसके समर्थन में नारेबाजी बर्दाश्त नहीं करेगी। पिछले महीने भी इसी तरह की घटना सामने आई थी। अलगाववादी नेता मसर्रत आलम और कट्टरपंथी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के समर्थकों ने इसी तरह का राष्ट्र विरोधी कदम उठाया था। उसके बाद मसर्रत आलम के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्जकर उसे कैद कर लिया गया। अलगाववादियों के इस देश विरोधी गतिविधियों के प्रति विपक्षी दल कांग्रेस का रवैया भी चिंताजनक है। एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में भाग लेते हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने इसे छोटी घटना करार दिया है। कश्मीर में अस्थिरता फैलाने से अलगाववादी ताकतों को बाज आना चाहिए। अलगाववादियों की विचारधारा भारत विरोधी रही है। कहा जाता है कि कश्मीर के अलगाववादियों को पाकिस्तान की शह मिली हुई है। वे पाकिस्तान के इशारों पर आम कश्मीरियों को भारत के खिलाफ भड़काते हैं। यह हास्यास्पद है कि जो अलगाववादी लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते और न ही चुने हुए प्रतिनिधि हैं। वे चंद कश्मीरियों को गुमराह करके अपने पक्ष में कर लेते हैं और उसे ही जम्मू-कश्मीर की आवाज करार दे देते हैं। वहीं पाकिस्तान भारत की चुनी हुई सरकारों से पूर्व इन अलगाववादियों को गले लगाता है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि ही क्षेत्र विशेष की आवाज होते हैं।

वैश्विक मोर्चे पर भारत के मजबूत कदम

हाल ही में वहां विधानसभा के चुनाव संपन्न हुए हैं, जिसमें रिकॉर्ड करीब साठ फीसदी मतदान हुआ। जाहिर है, आम कश्मीरियों का भारतीय लोकतंत्र में विश्वास बढ़ रहा है। वे अलगाववाद और आतंकवाद नहीं लोकतंत्र की भाषा समझने लगे हैं और इसी से बदलाव लाना चाहते हैं। इस बार जम्मू-कश्मीर में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन हुआ है। भारतीय जनता पार्टी पहली बार पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई है। दोनों की गठबंधन सरकार साझा न्यूनतम कार्यक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर में विकास के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है। जाहिर है, इसी से अलगाववादी और आतंकवादी बौखलाए हुए हैं। उन्हें अपना वजूद खत्म होने का भय सता रहा है। लिहाजा वे अपनी मौजूदगी दर्शाने के लिए राष्ट्र राज्य की सीमाओं का उल्लंघन कर रहे हैं। केंद्र व राज्य सरकार को भारत की संप्रभुता और अखंडता पर चोट पहुंचाने वाले इन तत्वों को करारा जबाव देना चाहिए।

कई सवाल छोड़ गर्इं अरुणा शानबाग

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