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इकहत्तर की याद दिला रही है पाक गोलीबारी

पाक सेना ने इस साल अब तक करीब 75 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है, वहीं 2013 में यह आंकड़ा 347 था।

इकहत्तर की याद दिला रही है पाक गोलीबारी
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सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक डी के पाठक ने कहा है कि सरहद पर पाकिस्तानी सेना की ओर से मौजूदा गोलीबारी की भीषणता साल 1971 की याद दिला रही है। निकट भविष्य में उन्हें याद नहीं कि पाकिस्तान सेना की ओर से इतनी जबरदस्त गोलीबारी कभी हुई हो। उन्होंने कहा है कि भारत इसे रोकने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है। बीएसएफ ने युद्धविराम उल्लंघन की घटना का विरोध जताने के लिए पाकिस्तान से संपर्क करने के लिए करीब 16 बार टेलीफोन किए, परंतु उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। यही नहीं गत दिनों बीएसएफ ने इस मुद्दे पर प्लैग मीटिंग करने के लिए भी पांच बार कोशिश की, परंतु उसके लिए भी पाकिस्तानी सेना तैयार नहीं हुई। बीते करीब 15 दिनों में पाक सेना 30 बार युद्धविराम का उल्लंघन कर चुकी है।
पाक सेना ने इस साल अब तक करीब 75 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है, वहीं 2013 में यह आंकड़ा 347 था। जुलाई-अगस्त महीने में जब बर्फ पिघलने लगती है तब पाकिस्तानी सेना अकसर युद्ध विराम का उल्लंघन करती है। सीमा पर गोलीबारी करती है। इस तरह उसका मकसद आतंकवादियों को भारत में घुसपैठ कराना भी होता है। पाक सेना इस साल अब तक 50 बार आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर चुकी है, वहीं 2013 में यह आंकड़ा 277 था। यह जग जाहिर है कि पाक प्रायोजित आतंकवाद से भारत सबसे ज्यादा पीड़ित है। पाकिस्तान अपनी धरती पर आतंकियों के लिए प्रशिक्षण कैंप चलाने की खुली छूट दे रखी है। परंतु इस बार की गोलीबारी हर बार से कुछ अलग है।
बीएसएफ के जवानों के अनुसार इस बार पाकिस्तानी सेना जिस तरह के हथियारों से गोले बरसा रही है, वह ज्यादा रेंज के हैं और उनकी मारक क्षमता भी ज्यादा है। इस बीच यह भी खबर आई है कि पाकिस्तान ने सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है। इससे तो पाकिस्तान की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं? लगता हैकि पाकिस्तान के मंसूबे खतरनाक हैं। यह स्थिति भारतीय सेना की चुनौती बढ़ा दी है, क्योंकि इसी तरह चलता रहा तो भारत भी चुप नहीं रह सकता है। हालांकि बीएसएफ के जवान पाक गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं।
बीएसएफ के महानिदेशक ने भी स्वीकारा है कि नई सरकार ने जवानों को जवाबी कार्रवाई करने की पूरी छूट दी है। अब मंगलवार को दोनों देशों के बीच डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स) स्तर की बैठक हुई, जिसमें फ्लैग मीटिंग करने पर सहमति बनी है। अभी इसकी तिथि तय नहीं हुई है। यह बैठक होती रहती है, लेकिन पाकिस्तान के रवैए में कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा। मोदी सरकार पाक के इस हरकत को लेकर पूरी तरह गंभीर है। यह सतर्कता जरूरी भी है, क्योंकि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उसका दोमुंहापन बार-बार सामने आता रहा है।
मंगलवार को रक्षामंत्री अरुण जेटली ने तीनों सेना प्रमुखों से सीमा पर मौजूदा हालात के बारे में चर्चा कर सभी विकल्पों का जायजा लिया है। इस तरह उन्होंने पाक को संदेश देने की कोशिश की है कि यदि वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो भारत उसे और कड़ी भाषा में जवाब दे सकता है।
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