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चिंतन: मसूद अजहर की गिरफ्तारी से कार्रवाई की आशा बढ़ी

एक सप्ताह से पूरी दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं कि भारत द्वारा सबूत दिए जाने के बाद पाक सरकार क्या कार्रवाई करती है।

चिंतन: मसूद अजहर की गिरफ्तारी से कार्रवाई की आशा बढ़ी
भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश स्तर की निर्धारित बातचीत से ठीक पहले पाकिस्तान सरकार ने जैश ए मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर और उनके भाई रऊफ सहित करीब बारह आतंकवादियों को हिरासत में लेकर निश्चित रूप से पहली बार किसी आतंकवादी वारदात के बाद संजीदगी का परिचय दिया है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद नवाज शरीफ की फोन कॉल के समय उनसे कहा था कि भारत इस हमले के षड़यंत्रकारियों के खिलाफ वैसी ही कार्रवाई चाहता है, जैसी पाकिस्तान सरकार ने पेशावर के स्कूल में छात्रों के नरसंहार के बाद की थी। अतीत के रुख को देखते हुए इस पर यकीन करना जरा मुश्किल था कि पाकिस्तान सरकार सेना की अड़ियल रुख के बावजूद ठोस कार्रवाई कर सकेगी लेकिन इस बार नवाज शरीफ शुरू से ही संजीदगी दिखा रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से वादा किया था कि वे दोषियों को नहीं बख्शेंगे। उन्होंने कहा भी था कि सच सामने आएगा और हमारी ईमानदारी पूरी दुनिया देखेगी। कह सकते हैं कि नवाज शरीफ अपना वादा पूरा करने की दिशा में बढ़ते हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञ अब भी इस कार्रवाई को थोड़ी शंका की दृष्टि से देख रहे हैं। उनका मानना है कि इस समय नवाज शरीफ और पाकिस्तान पर जितना दबाव है, उतना अतीत में कभी नहीं रहा। एक सप्ताह से पूरी दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं कि भारत द्वारा सबूत दिए जाने के बाद पाक सरकार क्या कार्रवाई करती है। ऐसी खबरें आ रही थीं कि बृहस्पतिवार की सुबह पीएम मोदी विदेश सचिवों की बातचीत के बारे में अंतिम फैसला लेने जा रहे हैं। यह वार्ता 15 जनवरी को इस्लामाबाद में प्रस्तावित है। भारत ने हालांकि इसे रद करने की बात कभी नहीं कही परन्तु इसके कयास जरूर लगाए जा रहे थे कि यदि पाकिस्तान ने इससे पहले कुछ ठोस कदम नहीं उठाए तो भारत बातचीत को कुछ समय के लिए स्थगित जरूर कर सकता है। पठानकोट एयरबेस पर हमले में जैश ए मोहम्मद का ही हाथ होने के सबूत भारतीय जांच एजेंसियों के हाथ लगे थे। गौरतलब है कि मसूद अजहर सहित चार आतंकवादियों को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय रिहा कर उन विमान अपहर्ताओं के सुपुर्द करना पड़ा था, जिन्होंने नेपाल से दिल्ली आ रही आईसी 814 उड़ान का अपहरण कर लिया था। रिहाई के बाद मसूद अजहर ने जैश ए मोहम्मद की स्थापना की थी। उसने भारत में अलग-अलग जगहों पर हमलों को अंजाम दिया। इस तरह देखें तो मसूद और उनका आतंकी संगठन केवल पठानकोट एयरबेस हमले का ही दोषी नहीं है। उस पर भारत में बहुत से मामले दर्ज हैं। हमारे बहुत से सुरक्षा और पाक मामलों के जानकारों का मत है कि तब तक उसकी हिरासत को संदेह की दृष्टि से देखा जाता रहेगा, जब तक उसे कानून के कटघरे में खड़ा करके उसके अंजाम तक नहीं पहुंचाया जाएगा। यह शंकाएं इस कारण भी हैं कि कुछ वर्ष पहले इसी प्रकार हाफिज सईद को भी पाक सरकार ने गिरफ्तार किया था परन्तु वहां की अदालतों ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया था। यदि मसूद अजहर और उनके गुगरें की रिहाई भी हाफिज सईद की तरह कर दी गई तो पाक सरकार की मंशा पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा। इसलिए पाक को अंजाम तक पहुंचाना होगा।
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