Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

आरोपों में घिरे मनमोहन सिंह की बेजान सफाई

कांग्रेस मोदी सरकार पर हमला कर रही है, भाजपा पलटवार कर रही है, तो सीधे प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस को जवाब दे रहे हैं।

आरोपों में घिरे मनमोहन सिंह की बेजान सफाई
जानलेवा गर्मी से तप रहे देश में सियासी पारा भी चरम पर है। मोदी सरकार एक साल की उपलब्धियां गिना रही हैं, कांग्रेस मोदी सरकार पर हमला कर रही है, भाजपा पलटवार कर रही है, तो सीधे प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस को जवाब दे रहे हैं। बीच में पूर्व टेलीकॉम सचिव प्रदीप बैजल टूजी स्कैम को लेकर ‘बुक बम’ फोड़ रहे हैं। निशाने पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह, कांग्रेस नीत यूपीए का शासन और मोदी सरकार है। सबसे पहले अपनी सरकार की एक साल की कामयाबियों के बखान के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस शासन को निशाने पर लिया और महंगाई, घोटालों, आर्थिक पिछड़ेपन, जीडीपी में गिरावट और देश की बदहाली के लिए पूववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। जिससे कांग्रेस तिलमिलाई और उसने हमला किया कि भाजपा की पूरी सरकार मोदी व पीएमओ में केंद्रित हो गई है। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस को उसके कार्यकाल में हुए तमाम घोटालों की याद दिला दी।
बीच में पूर्व टेलीकॉम सचिव प्रदीप बैजल ने अपनी बुक के जरिये टूजी स्कैम के लिए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को दोषी बताया। वैसे यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के घोटालों के लिए मनमोहन सिंह को सीधे जिम्मेदार ठहराया गया है। इससे पहले भी कई बार उन्हें टूजी स्कैम और कोलगेट के लिए सियासी दोषी ठहराया जा चुका है। कोलगेट केस में वे जांच एजेंसी के निशाने पर आ चुके हैं। हर बार पूर्व पीएम मनमोहन ने सफाई भी दी है है कि वे बेदाग हैं, सरकार जैसे चाहे, जिससे चाहे, जांच करा ले। इस बार भी दी, लेकिन इस मर्तबा उन्होंने इस मौके का सियासी फायदा उठाया। उन्होंने बैजल के आरोपों को नकारने के साथ-साथ मोदी सरकार पर तगड़ा प्रहार किया। वे बोले, उन्होंने कभी पद का दुरुपयोग नहीं किया, उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार में लोकतांत्रिक संस्थाएं खतरे में हैं और कल्याणकारी राज्य की सम्पूर्ण अवधारणा को तीव्र आर्थिक विकास के नाम पर ध्वस्त किया जा रहा है। इसके बाद बिना देर किए पीएम मोदी ने भी कांग्रेस को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि यूपीए शासन के दौरान संविधानेतर प्राधिकारों के पास ही वास्तविक शक्तिथी। जिनके पास संवैधानिक शक्तियां नहीं थीं, उन्होंने फायदा उठाया।
मोदी का इशारा दस जनपथ और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ था। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में सत्ता के केंद्रीत होने के आरोपों को भी खारिज कर दिया। इस पूरे सियासी कतरब्यौंत में जो बात मनमोहन के करीबियों के जरिये देश के सामने आई, वह यह कि कांग्रेस सरकार के समय सत्ता के दो केंद्र थे और पीएमओ की गरिमा धूमिल हुई थी। मनमोहन सरकार में ही टूजी, आदर्श, कॉमनवेल्थ, कोल आवंटन जैसे बड़े घोटाले उजागर हुए, महंगाई उच्च स्तर पर थी, नीतिगत पंगुता के चलते ही मनमोहन पर अंडर अचीवर का आरोप लगा, जीडीपी गिरकर 8.5 से 4.9 फीसदी पर आ गई। राहुल गांधी ने मनमोहन सरकार के बिल को फाड़ दिया था? ऐसे में जहां मनमोहन सिंह को मोदी सरकार पर कोई भी आरोप लगाने का नैतिक अधिकार नहीं है, वहीं उनकी सफाई भी बेजान-निरर्थक लगती है।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top