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म्यांमार सीमा में उग्रवादियों को मारना, देश के दुश्मनों को सेना ने दिया कड़ा संदेश

दूसरे देश की सीमा में इतने बड़े पैमाने पर उग्रवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने के बहुत कम उदाहरण हैं

म्यांमार सीमा में उग्रवादियों को मारना, देश के दुश्मनों को सेना ने दिया कड़ा संदेश
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मणिपुर में सेना के काफिले पर हमला करने वाले उग्रवादियों को सबक सिखाने के लिए ऐसी ही किसी बड़ी कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही थी। भारतीय सेना ने क्रॉस बॉर्डर यानी म्यांमार की सीमा में घुसकर नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड खपलांग (एनएससीएन-के) और कांगलेई याना काना लुप (केवाईकेएल) के उग्रवादियों को मार गिराया है। सेना के इस ऑपरेशन में करीब 38 उग्रवादी मारे गए हैं। माना जा रहा हैकि इसमें से अधिकर उग्रवादी गत हफ्ते मणिपुर के चंदेल में घात लगाकर जवानों पर किए गए हमले में शामिल थे। यही नहीं ये उग्रवादी म्यांमार में बैठकर फिर से राज्य में बड़ा हमला करने की योजना बना रहे थे। ऐसा लंबे अरसे बाद हुआ हैजब भारतीय सेना ने दुश्मन की मांद में जाकर ऐसे ऑपरेशन को अंजाम दिया हो।

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दूसरे देश की सीमा में इतने बड़े पैमाने पर उग्रवादियों को मुंहतोड़ जवाब देने के बहुत कम उदाहरण हैं। इससे अशांत इलाकों में तैनात जवानों का मनोबल निश्चित रूप से मजबूत हुआ होगा। इस सफल ऑपरेशन के लिए सेना व केंद्र का राजनीतिक नेतृत्व दोनों बधाई के पात्र हैं। एक ओर सेना के पास इस ऑपरेशन के लिए सटीक खुफिया जानकारी, लीडरशीप और शानदार तैयारी थी। वहीं मोदी सरकार ने भी सेना के ऑपरेशन को मंजूरी देकर साहसिक फैसला लिया।यह भी कम सुखद नहीं है कि इस कार्रवाई में भारतीय सेना को म्यांमार की सरकार का पूरा सहयोग मिला है। मोदी सरकार की विदेश नीति का लाभ धीरे-धीरे सामने आने लगा है। पूवरेत्तर से सटे देशों से हमें इस तरह के मित्रवत संबंध बनाए रखने चाहिए, क्योंकि वहां के उग्रवादियों से निपटने में हमें उनके सहयोग की जरूरत है। अकसर देखने में आता है कि उग्रवादी हमला कर म्यांमार, बांग्लादेश या भूटान में जाकर छिप जाते हैं। दरअसल, पूवरेत्तर के राज्यों में कई उग्रवादी गुट सक्रिय हैं, इनमें से अधिकांश ने वहां अपना ठिकाना बना रखा है। वे अपनी नापाक हरकतों को वहीं से अंजाम देते रहते हैं। लिहाजा उग्रवादियों पर दबाव बनाए रखने के लिए भारतीय सेना को आगे भी इस तरह की कार्रवाई करते रहना चाहिए। उन्हें कभी भी सिर उठाने का अवसर नहीं दिया जाना चाहिए। यहां भारत के पक्ष में एक बात यह है कि इन उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई में म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं।

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दूसरी ओर यह भी खबर आ रही है कि चीन इन उग्रवादी गुटों की मदद कर रहा है। ऐसे में सेना तथा सरकार को और सतर्क होने की जरूरत है। साथ ही ऐसी कोशिशें होनी चाहिए कि वहां इनको पनाह न मिले। सख्ती से ही उन्हें इस बात का एहसास होगा कि वे हिंसा फैला कर अपनी मांगें नहीं मनवा सकते। सरकार से बातचीत करने से ही मामले हल हो सकते हैं। इस कार्रवाई के बाद भारत के सिर से एक सॉफ्ट स्टेट होने का आरोप खत्म हो गया है। साथ ही देश के अंदर पनप रहे नक्सली हों या फिर पाकिस्तान से आने वाले आतंकवादी सबको यह संदेश गया है कि भारत अब हमले का करारा जवाब दे सकता है। वह किसी भी सूरत में चुप बैठने वाला नहीं है, बल्कि खुलकर प्रहार करने की मुद्रा में आ गया है। सीमाएं इसके ऑपरेशन में बाधा नहीं बनेंगी।

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