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महाराष्ट्र की राजनीति में नये युग का आगाज

महाराष्ट्र में भाजपा के सत्ता में आने को राज्य की राजनीति में नये युग की शुरुआत के रूप में देख सकते हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में नये युग का आगाज
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महाराष्ट्र में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है। नये मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस की उम्र महज 44 वर्ष है। इस प्रकार राज्य की कमान अपेक्षाकृत एक युवा के हाथों में सौंपकर भाजपा ने पीढ़ीगत बदलाव की ओर कदम बढ़ा दिया है। फड़णवीस के पास प्रशासनिक अनुभव कम है परंतु उनकी साफ सुथरी छवि लोगों को काफी आकर्षित करती है। तकनीकी रूप से यह अल्पमत की सरकार ही होगा, क्योंकि शिवसेना अभी सरकार में शामिल नहीं हुई है। हालांकि निर्दलीय विधायकों और एनसीपी के बाहर से सर्मथन देने की घोषणा के बाद अभी उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है।

महाराष्ट्र में भाजपा के सत्ता में आने को राज्य की राजनीति में नये युग की शुरुआत के रूप में देख सकते हैं। क्योंकि यहां वह इससे पूर्व तीसरे-चौथे नंबर की पार्टी ही बनी रही। वह राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद भी शिवसेना के साथ गठबंधन में जूनियर पार्टनर के रूप पहचानी जाती थी परंतु इस बार के नतीजे भाजपा के लिए ऐतिहासिक रहे। वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। अर्थात महाराष्ट्र विधानसभा की कुल 288 सीटों में से 122 जीतने में सफल रही। वह भी तब जब शिवसेना के साथ उसका 25 वर्षों का गठबंधन टूट गया था और पार्टी ने अकेले विधानसभा चुनावों में उतरने का फैसला किया था।

इन दिनों देश की राजनीति का पूरा परिदृश्य बदला हुआ प्रतीत हो रहा है। भाजपा जहां लगातार अपना विस्तार कर रही है वहीं कांग्रेस लगातार सिमटती जा रही है। मई के आम चुनावों में कांग्रेस को ऐतिहासिक हार और भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली थी। उसके बाद हुए हरियाणा और महाराष्ट्र में भी उसे भारी सफलता मिली है। हरियाणा में तो उसे पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ। ये दोनों देश के संपन्न राज्यों में गिने जाते हैं। इन दोनों राज्यों में भाजपा का काबिज होना महत्व रखता है। क्योंकि देश को आगे ले जाने में ये दोनों राज्य काफी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

दोनों राज्यों में कांग्रेस पहले से छिटककर तीसरे स्थान पर चली गई है। यह देश की सबसे पुरानी पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। यदि वह फिर से अपना राष्ट्रीय चरित्र हासिल करना चाहती हैतो उसे लगातार मिल रहे पराजयों से सबक लेना होगा और पार्टी का नये सिरे से पुनर्गठन करना होगा। वहीं लोग जिस तरह से भाजपा में विश्वास दिखा रहे हैं उससे इसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। भाजपा के ऊपर न केवल जनता की उम्मीदों के अनुरूप बेहतर शासन देने बल्कि उस पर खरा उतरने की भी चुनौती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्मा बरकरार है।

स्वयं मोदी देश की एकता, अखंडता और समृद्धि में गंभीरतापूर्वक जुटे हैं। हालांकि कुछ लोग अलग-अलग राज्यों में तोड़ने की बातें कर रहे हैं। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी के अपने विचार व दर्शन हैं। उनका मानना है कि हमारी भाषा, वेशभूषा, प्रांत या विचार अलग हो सकते हैं, परंतु हमारी राष्ट्रीयता एक है। अर्थात हम सभी भारतीय हैं। सरदार पटेल की जयंती को एकता दिवस के रूप में मनाने का आगाज करके उन्होंने यही संदेश देने का काम किया है। आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर और झारखंड में चुनाव होने हैं। इन सब का असर निश्चित रूप से इन राज्यों में देखने को मिलेगा।

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