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सभ्य समाज को शर्मसार करती लखनऊ की घटना

जिन लोगों ने यह अपराध किया है उन्हें सबक मिलना चाहिए कि देश में यह नहीं चल सकता।

सभ्य समाज को शर्मसार करती लखनऊ की घटना
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लखनऊ के मोहनलालगंज के एक स्कूल में बुधवार रात को महिला से रेप और वीभत्स हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है परंतु यह वारदात एक सभ्य समाज को शर्मसार करने के लिए काफी है। इस घटना की बर्बरता का जिक्र ही आत्मा को झाकझोर देने के लिए काफी है। यह सवाल बरबस जेहन में कौंध जाता हैकि हमारा समाज महिलाओं के प्रति इतना निष्ठुर क्यों है? पुलिस के मुताबिक महिला जिस अस्पताल में नौकरी करती थी, वहीं के एक गार्ड ने उसके साथ रेप और फिर हत्या की है। इस पूरे मामले को गार्ड ने ही अकेले अंजाम दिया है। महिला ने अपनी आत्मरक्षा में आरोपी के साथ हाथापायी भी की थी। इससे पहले मई माह में ही उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में बर्बर दुष्कर्मकी घटना सामने आई थी, जिसमें आरोपियों ने दो बहनों के साथ बलात्कार के बाद हत्या कर पेड़ से लटका दिया था।
इस घटना को संयुक्त राष्ट्र ने भी भयानक अपराध करार दिया था। करीब एक महीने में उत्तर प्रदेश में दो सौ से ज्यादा दुष्कर्मकी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लखनऊ के नृशंस घटना के बाद मुलायम सिंह ने कहा है कि आबादी की तुलना में उत्तर प्रदेश में रेप की घटनाएं कम हो रही हैं। जाहिर है उत्तर प्रदेश में ऐसे मामलों के लिए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के इस तरह के बयान भी बहुत हद तक जिम्मेदार हो सकते हैं। इससे पूर्व उन्होंने बलात्कारियों को फांसी न देने की वकालत की थी और बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को महज लड़कों की एक भूल करार दिया था।
ऐसे मुद्दे पर राजनीतिक दलों की ओर से जिस तरह की संवेदनशीलता और गंभीरता दिखाई जानी चाहिए, उसकी कमी साफ तौर पर महसूस की जा रही है। समझना होगा कि मुआवजा देने भर से ऐसे मामले खत्म नहीं हो जाते, पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए। यह आरोप लगते रहे हैं उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था लचर हो गई है और प्रशासन कुछ लोगों के इशारों पर ही चलता है। उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य बन गया है जहां हत्या और बलात्कार के ग्राफ तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी तरह की एक दर्दनाक घटना दो वर्ष पूर्व दिल्ली में दामिनी के सामूहिक बलात्कार के रूप में सामने आई थी। पूरा देश उसकी बर्बरता से दहल गया था। केंद्र सरकार भी हरकत में आई और महिलाओं के खिलाफ आपराधिक कानून में कई अहम बदलाव किए गए। उम्मीद थी कि उससे समाज में एक खौफ पैदा होगा पर इस घटना के बाद लगता है कि समाज को अभी भी लंबा रास्ता तय करना है।
जिन लोगों ने यह अपराध किया है उन्हें सबक मिलना चाहिए कि देश में यह नहीं चल सकता। हालांकि तमाम बदलावों और आश्वासनों के बाद भी दुष्कर्म के मामले बदस्तूर जारी हैं। सरकार हर वारदात के बाद लोगों के आक्रोश को थामने के लिए आश्वासन देती है पर बाद में पुलिस और प्रशासन भी घटना को पुरानी बात मान उसी र्ढे पर लौट आते हैं। यह हमारी सिस्टम की बड़ी खामी है। अपराधी भी सोचने लगते हैं कि उनको सजा नहीं मिलेगी या मामले की सुनवाई देर से होगी, जबकि आज जरूरत इस बात की है कि किसी भी मामले की सुनवाई एक निश्चित समय सीमा में पूरी हो। साथ ही ऐसे मामलों में अपराधियों को सख्त से सख्त सजा हो। जिससे लोगों में कड़ा संदेश जा सके।
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