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चुनाव से पूर्व विवादों में लोकपाल चयन प्रक्रिया

जब देश चुनावी मोड़ पर पहुंच गया है, तब सरकार को यह प्रक्रिया बंद कर देनी चाहिए।

चुनाव से पूर्व विवादों में लोकपाल चयन प्रक्रिया
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नई दिल्ली. देश को एक मजबूत, ईमानदार और निष्पक्ष लोकपाल मिले यह सबकी अपेक्षा है, परंतु जिस तरह से जल्दबाजी में केंद्र की यूपीए सरकार इसके चयन की प्रक्रिया पर आगे बढ़ रही है उसके चलते लोकपाल अधिनियम की पूरी तरह अनदेखी हो रही है। वैसे भी जब देश चुनावी मोड़ पर पहुंच गया है, तब सरकार को यह प्रक्रिया बंद कर देनी चाहिए। बेहतर होता कि केंद्र में बनने वाली अगली सरकार इसको पूरी करती।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा है कि सरकार को सर्वोत्तम लोगों का चयन करना है न कि महज जगह भरनी है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी जिस तरह की जल्दबाजी दिखा रही है, उससे लगता है कि वह चुनाव से पूर्व जैसे-तैसे लोकपाल का चयन कर लेना चाहती है। कांग्रेस नीत यूपीए सरकार पिछले करीब नौ साल से कहां थी और अब चुनाव से पूर्व सब कुछ क्यों कर लेना चाहती है। लगता है कि वह इस कदम से चुनावी लाभ लेना चाहती है।
भ्रष्टाचार निरोधी निकाय में सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति की नियुक्ति की जानी चाहिए और लोकपाल अधिनियम के अनुसार ही सारी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। हालांकि बृहस्पतिवार को इसकी प्रक्रिया को लेकर भी प्रश्न खड़ा हो गया, जब जानेमाने विधिवेत्ता फली एस नरीमन ने उस प्रक्रिया का हिस्सा बनने से इंकार कर दिया जिसके तहत लोकपाल के विभिन्न पदों के लिए नामों का चयन किया जाना है। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि लोकपाल चयन की बहुस्तरीय प्रक्रिया सर्वाधिक सक्षम, स्वतंत्र और साहसी लोगों की अनदेखी कर सकती है। उनकी राय है कि लोकपाल जैसी महत्वपूर्ण संस्था के गठन का यह तरीका नहीं है। वे एक नई समस्या की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
बेहतर होता कि उनकी चिंताओं पर भी एक बार विचार किया जाए। उनके नाम का प्रस्ताव पांच सदस्यीय चयन समिति ने लोकपाल अधिनियम के तहत आठ सदस्यीय सर्च कमेटी का हिस्सा बनाने के लिए रखा था। सर्च कमेटी अध्यक्ष और आठ सदस्यों (चार न्यायिक और चार गैर न्यायिक) के पद के लिए मिले आवेदनों की जांच करेगी और चयन समिति के पास भेजेगी। इस सर्च कमेटी के सुझाए नामों में से ही किसी एक को लोकपाल बनाने का फैसला चयन समिति करेगी। वहीं गत माह एक विवाद चयन समिति के पांचवें सदस्य के तौर पर वरिष्ठ वकील पीपी राव को लेकर भी हुआ था।
चयन समिति की सदस्य और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने आरोप लगाया थाकि कांग्रेस अपने पसंद के लोगों को इसमें शामिल करना चाहती है, क्योंकि राव को कांग्रेस का वफादार माना जाता है। इससे कांग्रेस की नीयत पर भी सवाल खड़ा होता है। करीब पांच दशक की मांग के बाद देश में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को खत्म करने के लिए लोकपाल का गठन किया जा रहा है। कोई पार्टी यदि इस मंशा के साथ संवैधानिक संस्थाओं में अपने लोगों को बैठाती है कि वह संकट के समय उनके हितों की रक्षा करेगा तो यह एक लोकतांत्रिक देश के लिए ठीक नहीं है। ऐसे पदों पर निष्पक्ष और ईमानदार लोग बैठें और सत्ता व विपक्ष के प्रति झुकाव नहीं रखते हुए फैसले करें तो ही ऐसी संस्थाओं का कोई मतलब रह जाता है।
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