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आतंकवाद पर पाकिस्तान को भारत का कड़ा संदेश

भारत हमेशा से बातचीत करके समस्याओं को दूर करने का पक्षधर रहा है।

आतंकवाद पर पाकिस्तान को भारत का कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दुबई में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए पाकिस्तान को आतंकवाद पर कड़ा संदेश दिया। हालांकि उन्होंने पड़ोसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पाकिस्तान की ओर ही था। यह जगजाहिर हैकि पाकिस्तान आतंकवाद का एक बड़ा केंद्र है। वह आतंकवाद को न सिर्फ पालता और बढ़ावा देता है बल्कि उसके द्वारा पैदा किए गए आतंकवाद का भारत सबसे ज्यादा भुक्तभोगी है। तमाम चेतावनियों पर भी वह अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत जब भी उसके खिलाफ आवाज उठाता है तो वह स्वयं आतंकवाद से पीड़ित होने का रोना रोने लगता है।
दरअसल, पाकिस्तान आतंकवाद को अच्छे और बुरे में बांटकर देखता है। उसने कालांतर में आतंकवादियों को पैदा किया, बाद में उसमें से कई उसके हाथों की कठपुतली बनने से इंकार कर दिए। वे अब उसी के लिए खतरा बन गए हैं, उन्हें वह बुरा आतंकी मानता है। दूसरी ओर जो आतंकी उसकी बात मानते हैं। यानी भारत को निशाना बनाते हैं, उन्हें वह अच्छा आतंकी मानता है, उन्हें सपोर्ट करता है। पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि आतंकवाद अच्छा-बुरा नहीं होता। उसे पेशावर में सैकड़ों मासूमों या कुछ दिनों पहले पाकिस्तानी पंजाब के गृहमंत्री कर्नल शुजा खानजादा की हत्या करने की घटना से भी इसकी भयावहता समझ लेनी चाहिए।
गत दिनों गुरदासपुर में जिन आतंकियों ने हमला किया था वे भी पाकिस्तान से ही आए थे। वहीं उधमपुर में पकड़ा गया आतंकी मोहम्मद नावेद ने भी माना है कि वह पाकिस्तान का है और लश्कर ए तैयबा से जुड़ा है। उसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने पाकिस्तान का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है जिससे उसकी दुनिया के सामने फिर से पोल खुल गई है। इससे पहले कसाब बता चुका है कि पाक में आतंकवाद का खेल किस तरह खेला जा रहा है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी को दो टूक कहना पड़ाकि पाक तय करे कि वह आतंक को प्रायोजित करने वालों के साथ है या उसके खिलाफ है। भारत के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने का वादा किया है। जाहिर है, अब आतंकवाद के प्रति भारत के रुख का दुनिया को सर्मथन मिलने लगा है। लिहाजा विश्व में अलग थलग पड़ने से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद का दामन छोड़कर शांतिपूर्वक माहौल में भारत के साथ वार्ता के जरिए सभी विवादों को दूर करने के प्रयास करने चाहिए क्योंकि हिंसा किसी भी विवाद का अंत नहीं करता बल्कि बढ़ाता है।
भारत हमेशा से बातचीत करके समस्याओं को दूर करने का पक्षधर रहा है। पूवरेत्तर के उग्रवादियों के साथ हुआ शांति समझौता और बांग्लादेश के साथ हुआ भूमि सीमा समझौता इसके ताजा उदाहरण हैं। इन दिनों भारत-पाक के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर पर वार्ता की तैयारी चल रही है, लेकिन लगता है कि पाकिस्तान में बैठे कुछ लोग इसे नहीं होने देना चाहते हैं। पाक सेना और कट्टरपंथी भारत को उकसाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। अब इस बातचीत को अंजाम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है।
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