Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

चिंतन: षड़यंत्रकारी चेहरों का नकाब उतरना जरूरी

लोग ही जातीय आधार पर विभाजित नजर नहीं आए, नौकरशाही और पुलिस प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी भी इसके शिकार हुए।

चिंतन: षड़यंत्रकारी चेहरों का नकाब उतरना जरूरी
आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा, लूटपाट और आगजनी के दहशत भरे माहौल से हरियाणा धीरे-धीरे बाहर आ रहा है परन्तु शहरों के बाजारों, कालोनियों, कस्बों से लेकर गांवों तक में अभी भी भय का माहौल बरकरार है। राज्य में आमतौर पर जातीय वैमनष्य को लेकर टकराव के हालात नहीं रहे हैं परन्तु इस बार जिस तरह से कुछ नेताओं ने लंबे समय तक उग्र बयानबाजी की, उसका दुष्परिणाम आंदोलन के दौरान आखिरकार देखने को मिला। लोग ही जातीय आधार पर विभाजित नजर नहीं आए, नौकरशाही और पुलिस प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी भी इसके शिकार हुए। राज्य की भाजपा सरकार ने जन जीवन सामान्य करने, नागरिकों के बीच परस्पर विश्वास बहाल करने और जिनका नुकसान हुआ है, उनके जख्मों पर मदद का मरहम लगाने के लिए कोशिशें शुरू कर दी हैं। जख्म गहरे हैं। अविश्वास की दरार भी गहरी है। रोहतक, झज्जर, भिवानी, जींद सहित कई जिलों में व्यापारियों और उद्योग जगत से जुड़े लोगों का नुकसान भी बहुत बड़ा है। सरकार ने क्षतिपूर्ति का भरोसा दिया है और इसके लिए हर प्रभावित जिले में सर्वेक्षण का काम शुरू कर दिया गया है। जिनके घर, दूकान, संस्थान, सरकारी-निजी संपत्ति का नुकसान हुआ है, उनसे ब्योरा मांगा गया है। यह सब देर सबेर हो जाएगा। लोग फिर से अपने काम-धंधे भी शुरू कर लेंगे परन्तु अविश्वास की जो दरार इन उपद्रवों और लूटपाट से गहरी हुई है, उसे पाटने में बरसों लग जाएंगे। अहिंसात्मक तरीके से शुरू हुआ आंदोलन एकाएक बेकाबू हिंसा में कैसे तब्दील हो गया, इसका पता लगाना राज्य सरकार के लिए एक चुनौती जरूर है परन्तु असंभव नहीं। जिस तरह की फोन कॉल सामने आई है, उससे इसके पुख्ता संकेत मिलते हैं कि सरकार की तुरंत पहलों के बावजूद राज्य में न केवल आवागमन को रोकने का काम किया गया, हिंसा को भी हवा दी गई। इसके पीछे जहां खट्टर सरकार को अस्थिर करने की मंशा दिखाई देती है, वहीं उन प्रयासों को पलीता लगाने की गहरी साजिश भी दृष्टिगत होती है, जो विकास के लिए किए जा रहे हैं। यह भी जांच का विषय है कि जब मॉल्स, स्कूलों, मिल्क प्लांट्स, दुकानों, सरकारी संपत्तियों आदि को लूटा और जलाया जा रहा था, तब बार-बार सूचना देने और मदद की गुहार लगाए जाने के बावजूद पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर क्यों नहीं पहुंची। जैसे-जैसे माहौल शांत हो रहा है, सरकार उन कारणों की तह में जाने की कोशिश कर रही है, जिनके चलते यह आग इस हद तक भड़की है। चाहे राजनीतिक दलों के नेता हों, लापरवाह अधिकारी या आंदोलन को हिंसक बनाने वाले तत्व, उनके चेहरों पर पड़े नकाब जितनी जल्दी हो सके, उतारे जाने की जरूरत है। राज्य फिर से मामूल पर आ रहा है तो सख्ती दिखाते हुए मनोहर लाल खट्टर सरकार ने कुछ कड़े फैसले लिए हैं। हिंसा रोकने में नाकाम रहे रोहतक के तत्कालीन आईजी सहित दो डीएसपी को निलंबित करने सहित कुछ और अफसरों पर गिरी गाज इंगित करती है कि ऐसे अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की शुरुआत हो चुकी है। बहुत संभव है, अगले कुछ दिनों में नौकरशाही में बड़े बदलाव भी देखने को मिलें। खट्टर सरकार ने मार्च के पहले सप्ताह में गुड़गांव में प्रस्तावित हैपनिंग हरियाणा कार्यक्रम को स्थगित नहीं करके दूसरा अहम फैसला लिया है। इसमें देश-विदेश के उद्योगपतियों को आमंत्रित किया गया है। यह फैसला उन षड़यंत्रकारियों को करारा जवाब है, जो राज्य को विकास की पटरी से उतारकर हिंसा की आग में धकेलना चाहते हैं।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top