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भारतीय क्रिकेट के एक युग का अंत

डालमिया 1997 में आईसीसी के अध्यक्ष बने थे। यह उपलब्धि पाने वाले वह पहले भारतीय बने थे।

भारतीय क्रिकेट के एक युग का अंत
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सबसे कद्दावर प्रशासक माने जाने वाले जगमोहन डालमिया के निधन के साथ ही भारतीय क्रिकेट के एक युग का अंत हो गया। आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के चलते एन र्शीनिवासन के हटने के बाद डालमिया दूसरी बार मार्च में बीसीसीआई का अध्यक्ष बने थे। उनका जाना न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व क्रिकेट के लिए एक बड़ा नुकसान है। आज बीसीसीआई अंदरूनी गुटबाजी और भ्रष्टाचार की समस्या से जूझ रहा है। आईपीएल में सट्टेबाजी, स्पॉट फिक्सिंग और मैच फिक्सिंग की घटनाओं के कारण बोर्ड बड़े दबाव में है। वहीं इन दिनों सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में देश का क्रिकेट बोर्ड बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में बीसीसीआई को उन जैसे सूझबूझ वाले प्रशासक की ज्यादा जरूरत थी। उनके बारे में यह कहा जाता था कि वह जिस चीज को हाथ लगाते थे वह सोना बन जाता था। उन्होंने अपने फैसलों से इसे साबित भी किया।

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1979 में वे पहली बार बीसीसीआई से जुड़े, तब भारत क्रिकेटिंग पावर नहीं था, लेकिन 1983 में भारतीय टीम ने विश्व क्रिकेट को चौंकाते हुए पहली बार वल्र्ड कप जीता, उसके बाद से हालात बदल गए। डालमिया ने उसका लाभ उठाते हुए 1987 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड की मनमानी खत्म कर विश्व कप का आयोजन पहली बार इंग्लैंड से बाहर एशियाई उपमहाद्वीप में करवाने में सफल रहे। इसके बाद भारत को 1996 व 2011 में भी आईसीसी वल्र्ड कप की संयुक्त मेजबानी दी गई। डालमिया 1997 में आईसीसी के अध्यक्ष बने थे। यह उपलब्धि पाने वाले वह पहले भारतीय बने थे। जब वे आईसीसी के अध्यक्ष बने तब विश्व क्रिकेट की यह संस्था आर्थिक संकट से जूझ रही थी, लेकिन अपने तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने आईसीसी को फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया। जब वे पद से हटे तब इस संस्था के खाते में लाखों पाउंड थे। यही नहीं भारत को आज सबसे धनवान क्रिकेट बोर्ड माना जाता है तो इसका र्शेय जगमोहन डालमिया को ही जाता है।

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वे पहली बार 2001 में बीसीसीआई के अध्यक्ष बने। यह वो दौर था जब भारतीय क्रिकेट मैच फिक्सिंग के जाल में फंसा हुआ था और बोर्ड के पास बहुत पैसा भी नहीं था। ऐसे में डालमिया ने अपनी सूझबूझ से न सिर्फ भारतीय टीम को फिक्सिंग के भंवर से निकाला, बल्कि भारतीय क्रिकेट में पैसा लाए। उन्होंने क्रिकेट मैचों के प्रसारण अधिकारों व स्पांसरशिप से बीसीसीआई को भारी लाभ कमाकर दिया। 2014 में बीसीसीआई की संपत्ति 1891 करोड़ रुपये थी। यही नहीं उन्होंने विश्व क्रिकेट की धुरी बदलकर लंदन के लार्डस से कोलकाता के ईडन गार्डन कर दी। हालांकि उनके जीवन में बुरा दौर भी आया जब उन्हें 2006 में बीसीसीआई व घरेलू एसोसिएशन से वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित कर गया था, लेकिन उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और अंत में अपने को बेदाग साबित करने में सफल रहे। एक प्रशासक के तौर पर क्रिकेट को मुकाम देने में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। ऐसे में जगमोहन डालमिया के निधन से भारतीय क्रिकेट को बड़ी क्षति पहुंची है।

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