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चिंतन: जकार्ता आतंकी हमले के दोषियों पर ''चोट'' जरूरी

दुनिया का सबसे हिंसक आतंकी गुट इस्लामिक स्टेट ने इंडोनेशिया को दहलाने की धमकी दी थी।

चिंतन: जकार्ता आतंकी हमले के दोषियों पर

इंडोनेशिया सीरियल बम धमाकों से दहल उठा है। इस द्विपीय देश की राजधानी जकार्ता में सात से आठ जगहों पर एक के बाद एक ब्लास्ट हुए हैं। इनमें से दो ब्लास्ट संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के निकट हुए हैं। इनमें बेकसूरों की मौत हुई है। जकार्ता का ये इलाका बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों का केंद्र है। ये हमले तब हुए हैं, जब समूचे इंडोनेशिया में हाईअलर्ट जारी है।

दुनिया का सबसे हिंसक आतंकी गुट इस्लामिक स्टेट ने इंडोनेशिया को दहलाने की धमकी दी थी। इसका पता पेरिस पर नवंबर में आईएस हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया और यूएस से मिले इंटेलिजेंस इनपुट से लगा था कि आईएस से जुड़े आतंकी जावा और सुमात्रा में हमले की साजिश रच रहे हैं। उसके बाद वहां की सरकार ने हाईअलर्ट जारी किया था।

इसलिए शक है कि ये हमले आईएस ने ही करवाए हैं। एक और बात है कि इंडोनेशिया में गत बुधवार को अबु बकर बशीर नाम के आतंकी को 15 साल की सजा सुनाई गई थी। इसका बड़ा विरोध हुआ था। इसके बाद इमाम समुद्रा नाम के एक आतंकी ने हमले की धमकी दी थी। इसलिए पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि हमले किसने करवाए हैं। किसी भी गुट ने हमले की जिम्मेदारी भी नहीं ली है, लेकिन इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने इसे सुनियोजित आतंकी हमला करार दिया है।

इसलिए हमले किसने करवाए यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि अहम है कि इंडोनेशिया पर आतंकी हमला हुआ है। सबसे चिंता की बात है कि इंडोनेशिया जहां दुनिया में मुसलमानों की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, वहीं यह तेजी से विकास कर रहा देश भी है। यहां के समाज में किसी भी प्रकार की कट्टरता का कोई स्थान नहीं है, लेकिन इधर कुछ सालों से इस्लामी उग्रवादी गुट इंडोनेशिया में सक्रिय हैं और आतंकी हमला करते रहे हैं। अक्टूबर 2002 में बाली बम ब्लास्ट में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 2003 में जकार्ता के मैरिएट होटल के पास हुए ब्लास्ट में 12 लोग मारे गए थे। 2009 में जकार्ता के रिट्ज और मैरियट होटल पर हुए बम धमाके के बाद 14 जनवरी का यह हमला जकार्ता में हुआ पहला बड़ा हमला है।

दुनिया के लिए चिंता की बात है कि दक्षिण एशिया का शांत व प्रगतिशील देश इंडोनेशिया में इस्लामी कट्टर आतंकवाद पांव पसार रहा है। सबको पता है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद को पाकिस्तान संरक्षण देता रहा है और भारत सबसे पीड़ित देश है। चूंकि इंडोनेशिया समुद्रों से घिरा देश है और ऑस्ट्रेलिया से लगा है व भारत की समुद्री सीमा से जुड़ा है, इसलिए यदि वहां आतंकवाद अपनी जड़ें जमाता है, तो भारत के लिए नई मुसीबत पैदा होगी। देर सबेर वहां के आतंकी भारत को अपना निशाना बनाएंगे।

इस समय देखने में आ रहा है कि कट्टर इस्लामी आतंकी गुट विश्व के किसी भी हिस्से में हमले को बैखोफ अंजाम देने में सक्षम हैं व इससे मुस्लिम समाज भी प्रभावित हैं, ऐसे में यह वक्त है राजनीति से परे होकर आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक हल्ला बोल का। संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में विश्व के सभी देशों को आतंकवाद के खात्मे के लिए तत्काल बीड़ा उठाना चाहिए और इसके पनाहगाह देशों को अलग-थलग किया जाना चाहिए।

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