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चिंतन: इशरत केस में आतंकवाद पर सियासत ठीक नहीं

कांग्रेस इशरत को पीड़ित बताकर वोट बैंक के लिए अल्पसंख्यक तुष्टीकरण कर रही थी।

चिंतन: इशरत केस में आतंकवाद पर सियासत ठीक नहीं
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इशरत जहां एनकाउंटर केस के तह जैसे-जैसे खुल रहे हैं, कांग्रेस बेनकाब होती जा रही है। इस मामले को लेकर बेशक भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासत भी चल रही हो, लेकिन यूपीए सरकार में रहे दो पूर्व अफसरों ने जिस तरह सच्चाई का पर्दाफाश किया है और पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम भी हलफनामा बदलने की बात कबूल रहे हैं, उससे साफ हो गया है कि कांग्रेस अपने सियासी लाभ के लिए सरकार का इस्तेमाल रही थी। 2004 में अहमदाबाद में हुए इशरत एनकाउंटर को फर्जी बताकर कांग्रेस का सीधा निशाना गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह को घेरना था। कांग्रेस इशरत को पीड़ित बताकर वोट बैंक के लिए अल्पसंख्यक तुष्टीकरण कर रही थी, वहीं गुजरात में अपने राजनीतिक विरोधियों का शिकार करना चाहती थी। लेकिन मुंबई टेरर अटैक के मास्टरमाइंडों में से एक पाक-यूएस नागरिक डेविड कोलमैन हेडली के इशरत के आतंकी होने के खुलासे के बाद इस मामले से जुड़े दो पूर्व अफसरों के भी इशरत के आतंकी होने की बात कहने से कांग्रेस का झूठ देश के सामने आ गया है। अब वह अपनी सफाई में कुछ भी कहे, भाजपा पर जो भी आरोप लगाए, लेकिन खुद का दामन दागदार होने से बचा नहीं सकती है। ऐसे में भाजपा के कांग्रेस पर इशरत सनसनीखेज मुठभेड़ मामले में नरेंद्र मोदी और अमित शाह को फंसाने की कोशिश करने के आरोप और जांच की मांग पर कांग्रेस का जवाब देना चाहिए। इसे भाजपा का राजनीतिक दुष्प्रचार करार देकर कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती है। केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने भी इस मामले पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम को बयान देने के लिए कह कर गेंद कांग्रेस के पाले में ही डाल दिया है। कांग्रेस के लिए स्थिति मुश्किल इसलिए भी है कि उसके शासनकाल के दो अफसरों ने उसे कटघरे में खड़ा किया है। पहले पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने कहा कि तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम ने इशरत केस में सुप्रीम कोर्ट में दूसरा हलफनामा लिखवाया था, जो हलफनामा मैंने तैयार किया था, उसे बदल दिया गया था। उसमें मुझे नहरअंदाज किया गया। उसके बाद गृह मंत्रालय में अवर सचिव रहे आरवीएस मणि ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि इस केस में दो हलफनामे दाखिल किए थे। उनसे बदले हुए हलफनामे पर दस्तखत करवाए गए। मणि ने एसआईटी चीफ रहे सतीश वर्मा पर उन्होंने सिगरेट से दागने का भी आरोप लगाया। यह जुल्म उन पर इसलिए किया ताकि वरिष्ठ आईबी अधिकारियों को फंसाया जा सके। चूंकि इशरत समेत तीन और लश्कर के आतंकी थे, यह खुफिया रिपोर्ट आईबी ने ही दी थी। इससे लग रहा है कि कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक फायदे के लिए सीबीआई का दुरुपयोग किया है और आईबी अधिकारी को फंसाने का षड्यंत्र रचा था। इस मामले में सच जो भी हो, केंद्र सरकार को जांच कराना चाहिए। इसके साथ ही इस केस को लेकर संसद में कामकाज भी बाधित नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस को भी सोचना चाहिए कि आतंकवाद जैसे गंभीर मसले पर राजनीति नहीं करे।
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