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क्या पाक आतंकवाद के खात्मे के लिए प्रतिबद्ध है

भारत ने जो सबूत दिए हैं, उसे वहां की सेना और सरकार ने अदालत के समक्ष रखे ही नहीं हैं।

क्या पाक आतंकवाद के खात्मे के लिए प्रतिबद्ध है
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पेशावर की घटना से भी पाकिस्तान कुछ सबक लेता हुआ प्रतीत नहीं हो रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा था कि सेना आतंकवाद के खिलाफ तब तक जंग जारी रखेगी जब तक यह पूरी तरह पाक की सरजमीं से खत्म नहीं हो जाता। उन्होंने यहां तक कहा था कि अच्छे और बुरे तालिबान में फर्क नहीं किया जाएगा, लेकिन हाल में घटी दो घटनाओं, लश्कर ए तैयबा प्रमुख जकीउर रहमान लखवी की गिरफ्तारी और जमानत के खेल और भारत में समुद्र के जरिए घुसपैठ की एक नाकाम कोशिश, ने आतंकवाद पर उसकी दोहरी नीति को एक बार फिर से उजागर कर दिया है।

दरअसल, अरब सागर में गुजरात के पोरबंदर के नजदीक भारत-पाक समुद्री सीमा के पास 31 दिसंबर की रात एक संदिग्ध बोट देखा गया था। माना जा रहा हैकि यह वोट पाकिस्तान से आई थी। इंडियन कोर्स्ट गार्ड ने करीब एक घंटा बोट का पीछा किया था, लेकिन पकड़े जाने के डर से बोट पर सवार चार लोगों ने आग लगा दी, जिसके बाद उसमें जोरदार धमाका हुआ। अभी तक मिले सारे सबूत पाकिस्तान की ओर इशारा कर रहे हैं। यहां बड़ा सवाल यह है कि कहीं नये साल के मौके पर मुंबई जैसा हमला करने की तैयारी तो नहीं थी? मुंबई हमले के वक्त भी आतंकी बोट से ही भारतीय सीमा में घुसे थे? वहीं खुफिया एजेंसियों की सूचना के अनुसार करीब सौ आतंकी भारत में घुसपैठ करने की फिराक में हैं। लिहाजा इन दिनों भारत पर पाक प्रायोजित आतंकवाद का खतरा बना हुआ है।

दूसरी ओर, लखवी मुंबई में हुए 26/11 हमले का आरोपी है। बीते दिसंबर में वहां की आतंकवाद रोधी अदालत ने उसे जमानत देने के आदेश दे दिए थे, तब भारत ने उस फैसले के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई गई थी। उसके बाद आनन-फानन में उसे शांति व्यवस्था भंग होने संबंधी आदेश के तहत हिरासत में ले लिया गया था, लेकिन गत दिनों पाक सरकार के इस आदेश को भी इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। भारत ने एक बार फिर पाक उच्चायुक्त के समक्ष कड़ा ऐतराज जताया। चारों तरफ से फजीहत होने के बाद अब उसे एक पुराने अपहरण के मामले में गिरफ्तार किया गया है। साथ ही पाक सरकार ने कहा है कि वह उसकी रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी।

स्पष्ट है कि पाक ने अब तक जो भी सक्रियता दिखाई है, वह भारत के दबाव का ही नतीजा है। मुंबई हमले का मास्टर माइंड जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद पहले से ही खुलेआम घूम रहा है। वहां की अदालत ने उसे पुख्ता सबूत नहीं होने का हवाला देकर आरोप मुक्त कर दिया है। लखवी को भी इस तरह मिल रही जमानत के लिए पाकिस्तान सरकार व सेना को जिम्मेदार बताया जा रहा है। भारत ने जो सबूत दिए हैं, उसे वहां की सेना और सरकार ने अदालत के समक्ष रखे ही नहीं हैं। यही वजह है कि केस कमजोर हो गया है। मुंबई हमले के केस का यह हश्र चिंताजनक है। ऐसे फैसले से आतंकियों के हौसले बढ़ेंगे। यदि पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद को समाप्त करना चाहता है तो उसे बिना भेदभाव किए सभी आतंकवादियों को नेस्तनाबूद करना होगा। यदि पाक सरकार कार्रवाई नहीं करेगी तो ये आतंकी अंतत: उसे ही नुकसान पहुंचाएंगे।

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