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खेल के सट्टेबाजों को कड़ा संदेश देने की कोशिश

सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई सुपर किंग्स के अधिकारी गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सहमालिक राज कुंद्रा पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है।

खेल के सट्टेबाजों को कड़ा संदेश देने की कोशिश

मंगलवार का दिन भारतीय क्रिकेट और बीसीसीआई के लिए बहुत निर्णायक साबित हुआ। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली कमेटी ने आईपीएल-छह में सट्टेबाजी के दोषी पाए गए चेन्नई सुपर किंग्स के अधिकारी गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सहमालिक राज कुंद्रा पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है। अब दोनों जीवन भर कभी किसी तरह के क्रिकेट से नहीं जुड़ पाएंगे। इसके साथ ही चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स को दो साल के लिए आईपीएल से बाहर कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्टद्वारा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्टके पूर्व चीफ जस्टिस मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने इन दोनों को सट्टेबाजी का दोषी पाया था। इन्हीं की सजा तय करने के लिए लोढ़ा की अगुआई में कमेटी बनाई गई थी।

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इस कमेटी के ऊपर आईपीएल के सीओओ सुंदर रमन पर सजा तय करने और बीसीसीआई कैसे चले इस पर भी फैसला देने की जिम्मेदारी है। ये फैसले आने के बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि बीसीसीआई की कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता आ जाएगी। मयप्पन और कुंद्रा पर अलग से आपराधिक मामले चल रहे हैं, लेकिन उससे पूर्व प्रशासनिक स्तर पर सख्त सजा खेलों से जुड़े दूसरे लोगों के लिए एक नजीर बनेगी। और खेल की पवित्रता को कलंकित करने वाले हथकंडों जैसे स्पॉट फिक्सिंग, मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी से वे बाज आएंगे। इस फैसले से खिलाड़ियों को कुछ आंशिक नुकसान हो सकता है, परंतु क्रिकेट जैसे खेल के लिए यह बहुत फायदेमंद होगा। इस पर दर्शकों का विश्वास एक बार फिर बढ़ेगा। क्रिकेट से संदेह खत्म होगा तो दर्शकों का लगाव बढ़ेगा। वैसे भी सबसे जरूरी खेल को बचाना है। ऐसे में क्रिकेट जैसे खेलों में आ गई गंदगियों को दूर करने के लिए कड़े फैसले लेने जरूरी हैं। इन बुराइयों का क्रिकेट सहित दूसरे खेलों में आना निश्चित रूप से चिंताजनक है। इन पर रोक नहीं लगाई गई तो खेलों का भविष्य धूमिल हो सकता है। भारत में क्रिकेट काफी लोकप्रिय है। मैचों में हार जीत का फैसला मैदान के बाहर होने लगेगा तो उसमें वह रोमांच नहीं रह जाएगा जिसकी बदौलत किसी खेल को लोकप्रियता मिलती है।

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हालांकि इस फैसले के बाद एक सवाल यह भी उठ रहा है कि उन दोनों टीमों के खिलाड़ियों का क्या होगा? आखिर मालिकों की गलतियों की सजा उन्हें क्यों मिलनी चाहिए? दरअसल, दोनों टीमों के निलंबन से कई खिलाड़ी दो साल तक आईपीएल नहीं खेलेंगे। इसके संबंध में कमेटी ने कहा है कि बीसीसीआई कोईरास्ता निकाल सकती है, ताकि इन टीमों के साथ जो खिलाड़ी जुड़े हुए हैं, उन्हें दो साल तक बैठना नहीं पड़े। ऐसे में बीसीसीआई को दूसरे मौजूद विकल्पों को तलाशने की जरूरत है। जैसे खिलाड़ियों की फिर से निलामी कराईजा सकती है, दोनों टीमों के खिलाड़ियों को दूसरे टीमों में ट्रांसफर कर किया जा सकता है या फिर नए फेंचाइजी शामिल किए जा सकते हैं। इस फैसले के बाद बीसीसीआई को भी अपनी आंखें खोल लेनी चाहिए, क्योंकि आज साबित हो गया है कि आईपीएल के रास्ते क्रिकेट में भ्रष्टाचार आया है। उसके लिए खेल की पवित्रता सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

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