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नशे की बढ़ती लत से छुटकारा पाना जरूरी, अंधेरी गलियों में ले जाता है नशा

युवाओं के बलबूते भारत दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बनना चाहता है

नशे की बढ़ती लत से छुटकारा पाना जरूरी, अंधेरी गलियों में ले जाता है नशा
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात से हर कोई सहमत होगा कि नशा ऐसी भयानक बीमारी, बुराई है जो न सिर्फ व्यक्ति बल्कि उसके परिवार, समाज, देश को बर्बाद कर देता है। नशा अंधेरी गली में ले जाता है। विनाश के मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है और बबार्दी के मंजर के सिवाय नशे में कुछ नहीं होता है। भारत के लिए यह कितनी गंभीर समस्या बन गई है इसे इसी से समझा जा सकता है कि आज देश की करीब 30 फीसदी युवा आबादी किसी न किसी रूप में नशे की गिरफ्त में है।
भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। युवाओं के बलबूते भारत दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बनना चाहता है, मगर जिस तरह से समाज का एक बड़ा युवावर्ग नशे की गिरफ्त में आता जा रहा है, उससे आने वाले वक्त में देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित पंजाब, उत्तर-पूर्व, मुंबई और बंगलुरु नशे के नए केंद्र बन रहे हैं। पंजाब व उत्तर-पूर्व राज्य का तो हर चौथा नौजवान किसी न किसी तरह के नशे की गिरफ्त में है। इसमें सबसे ज्यादा शिकार 14 से 34 साल के युवा हो रहे हैं।
पुलिस-प्रशासन, अध्यापक, अभिभावक और समाजवैज्ञानिक इस बात से हैरान हैं कि भारत के युवाओं में नशे का चलन दिन-प्रति-दिन इतना बढ़ क्यों रहा है? हालांकि मनोविज्ञानी युवाओं के बीच नशे के बढ़ते चलन के पीछे बदलती जीवनशैली, दोस्तों का साथ, परिवार का दबाव, मां-बाप के झगड़े, इंटरनेट पर घंटों समय बिताना और पारिवारिक कलह को प्रमुख वजह माना रहे हैं। यह बात साबित हो चुकी हैकि नशे के कारोबार का पैसा आतंकवादी गतिविधियों में जाता है। जो लोग इसे मौज मस्ती का जरिया मानते हैं वे आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड ड्रग्स रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में भारत ड्रग्स का सबसे बड़ा बाजार बन गया है। यहां पाक, अफगानिस्तान, म्यांमार, नेपाल, चीन व नाइजीरिया से नशे का सामान गैरकानूनी ढंग से पहुंचता है। प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को बहस के केंद्र में लाकर सराहनीय कदम उठाया है। अब तक देश में इतने व्यापक स्तर पर इसकी चर्चा नहीं हुई थी। इससे साफ है कि मोदी सरकार इस समस्या से लड़ने के प्रति गंभीर है। प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि देश को विकास के रास्ते पर आगे ले जाना हैतो युवा आबादी को इस दलदल में जाने से रोकना होगा। ऐसे में प्रधानमंत्री के ये सुझाव अहम हैं कि माता-पिता अपने बच्चों को समय दें, उनसे जुड़ें, उनको ध्येयवादी बनाएं, सपने दिखाएं, कुछ करने को प्रेरित करें। उन्होंने सरकार के स्तर पर एक टोल फ्री हेल्पलाइन स्थापित करने बात कही है।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों से सोशल मीडिया पर ड्रग्स फ्री इंडिया हैशटैग के साथ आंदोलन चलाने की अपील के साथ-साथ खेल, कला जगत, सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों और संतों से इस विषय में जागरुकता फैलाने का आग्रह भी किया। इस प्रकार प्रधानमंत्री ने इससे निकलने के लिए परिवार, समाज स्तर पर क्या किए जाने चाहिए उसका उल्लेख किया है। हालांकि यह समस्या इतनी गंभीर हैकि इसके लिए कुछ नीतिगत कदम भी उठाने होंगे।
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