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चिंतन: पाकिस्तान ने फिर से चुना आतंक का रास्ता

करीब पांच महीने बाद पंजाब एक बार फिर आतंकियों के निशाने पर आया है।

चिंतन: पाकिस्तान ने फिर से चुना आतंक का रास्ता
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भारत-पाकिस्तान के संबंधों में हाल के दिनों में आई गर्मजोशी के बाद इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि आतंकवादी जल्द ही देश में कोई बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। इसके लिए उन्होंने पंजाब के पठानकोट स्थित एयरफोर्स बेस को चुना। किसी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि ये पाक स्थित जैश-ए-मोहम्मद का काम है।

करीब पांच महीने बाद पंजाब एक बार फिर आतंकियों के निशाने पर आया है। इससे पहले गत वर्ष जुलाई में गुरदासपुर में हमला हुआ था। पंजाब कभी आतंकवाद का शिकार रहा था, तब सरकार के सख्त प्रयासों से वहां की धरती को उससे मुक्त करा लिया गया, ऐसे में अब आतंकवादियों द्वारा एक आसान टारगेट के रूप में उसका चुनाव खतरनाक हो सकता है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। वैसे भी इन दिनों पंजाब के हालात ठीक नहीं हैं। वहां कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

खासकर ड्रग्स, तस्करी और भ्रष्टाचार की ढेरों घटनाएं सामने आती रही हैं। कहा जाता है कि नशा का कारोबार पकिस्तान से अवैध रूप में होता है। आतंकवाद को फैलाने में ये स्थितियां मुफीद मानी जाती हैं। ऐसे में इस पर ध्यान देने की जरूरत है कि कहीं पंजाब में आतंकवाद फिर न फैल जाए। भारत में होने वाले हमलों के तार पाक से जुड़े होते हैं। पठानकोट उसकी सीमा से सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी पर है।

ऐसी जानकारी है कि हमले की साजिश पाकिस्तान के रावलपिंडी में रची गई थी। इसमें पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका भी उजागर हुई है। गत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाक गए थे, जहां नवाज शरीफ के साथ दोस्ताना माहौल में बातचीत हुई थी। इसमें दोनों ने संबंध सुधारने पर जोर दिया था। देखा जाता है कि भारत-पाकिस्तान के बीच जब-जब वार्ता प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जाती है तब-तब वहां के आतंकवादियों और सेना की ओर से कुछ ऐसा होता है जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी आ जाती है। इस हमले को भी उसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस हमले का मकसद वार्ता प्रक्रिया को पटरी से उतारना हो सकता है। आईएसआई, सेना और कट्टरपंथी जमात नहीं चाहते कि भारत से रिश्ता सुधरे, लिहाजा वे कभी तल्ख बयान देते हैं, कभी संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हैं, तो कभी इस तरह के हमलों को अजाम देते हैं। उनका मकसद होता है कि भारत आक्रोश में आकर वार्ता से हाथ खींच ले, जिससे पाकिस्तान में उनकी प्रासंगिकता बनी रहे। भारत उनके मंसूबों को बखूबी जानता है।

उचित है कि भारत ने इस हमले के बाद संयमित प्रतिक्रिया दी है। हमें ऐसे हमलों से बचना है तो अपनी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करनी होगी और आतंकवाद के खिलाफ सख्ती बरतनी होगी, जिससे आगे से कोई आतंकी देश के अंदर आकर तबाही न मचा सके।

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