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दुनिया को भारत-पाक से ‘शांति’ का संदेश

महात्मा गांधी को नोबेल पुरस्कार न दिए जाने को लेकर नॉर्वे की नोबेल कमेटी की आलोचना होती रही है।

दुनिया को भारत-पाक से ‘शांति’ का संदेश

यह अजब संयोग है कि एक भारतीय और एक पाकिस्तानी को संयुक्त रूप से शांति के लिए नोबेल पुस्कार देने की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब सीमा पर दोनों देशों के बीच भारी तनाव बना हुआ है। इन दिनों दोनों ओर से गोलीबारी हो रही है और दोनों के नागरिकों की जान जा रही है। कैलाश सत्यार्थी जहां बचपन बचाओ आंदोलन संस्था के जरिए बाल अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे हैं। उन्होंने अब तक अस्सी हजार बच्चों की जिंदगी को संवारा है। वहीं मलाला यूसुफजई भी पाकिस्तान में बच्चों की शिक्षा से जुड़ी रही हैं। अब 17 साल की मलाला सबसे कम उम्र में यह अवॉर्ड पाने वाली शख्सियत बनी हैं।

नोबेल कमेटी ने इस पुरस्कार का ऐलान करते हुए कहा कि ये महत्वपूर्ण बात है कि हम एक हिंदू और एक मुसलमान को तथा एक भारतीय और एक पाकिस्तानी को ये पुरस्कार दे रहे हैं। दरअसल, महात्मा गांधी को नोबेल पुरस्कार न दिए जाने को लेकर नॉर्वे की नोबेल कमेटी की आलोचना होती रही है। कैलाश सत्यार्थी महात्मा गांधी के रास्ते पर चलते हुए बहुत से विरोध प्रदर्शन किए तथा गरीब व वंचित बच्चों की संघर्ष की लड़ाई लड़ी। 11 जनवरी, 1954 को जन्मे कैलाश सत्यार्थी भोपाल गैस त्रासदी के राहत अभियान से भी जुड़े रहे हैं। पिछले दो दशकों से वे बालश्रम के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और इस आंदोलन को वे अहिंसक तरीके से वैश्विक स्तर पर ले जाने में सफल रहे हैं। इस अवसर पर कैलाश सत्यार्थी ने कहा है कि ये सम्मान सवा सौ करोड़ भारतीयों का सम्मान है। उन्होंने इसे एक तरह से भारत के लोकतंत्र की जीत बताया है। क्योंकि इसी की वजह से उनकी ये लड़ाई आरंभ हुई और आज दुनिया में शांति का संदेश दे पा रहे हैं। वहीं मलाला का जन्म 1997 में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के स्वात जिले में हुआ।

मलाला यूसुफजई पर 2012 में तालिबानी आतंकवादियों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात घाटी में हमला किया था। तालिबानी लड़कियों को स्कूल नहीं जाने देना चाहते थे, परंतु मलाला उनकी धमकी की परवाह किए बगैर खुद भी स्कूल जातीं और आसपास की लड़कियों को भी जाने को प्रेरित करती थीं। जिसके बाद आतंकियों ने उनके सिर में गोली मार दी। हालांकि मलाला बच गर्इं और उसके बाद पूरी दुनिया में वे चर्चित हो गर्इं। मलाला को अब तक अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार, पाक का राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार सहित दर्जनों सम्मान से नवाजा जा चुका है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से 12 जुलाई को मलाला दिवस भी घोषित किया गया है। आज देखा जाए तो दुनिया आतंकवाद के साए में जी रही है। कई देशों के बीच तनाव देखे जा रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर लोग हिंसा पर उतारू हो जा रहे हैं।

विश्व जगत को समझ लेना चाहिए कि हिंसा से किसी का भी भला नहीं हो सकता। इससे हर स्तर पर नुकसान ही होता है। खून खराबा दरअसल, किसी समस्या का समाधान कर ही नहीं सकता। गांधी जी कहा करते थे कि हिंसा के जरिए समस्या को टाल सकते हैं। चुनौतियों को कुछ समय के लिए दबा सकते हैं, परंतु उनका समाधान नहीं कर सकते। इसके स्थाई समाधान के लिए अहिंसा का रास्ता यानी संघर्षका रास्ता ही सबसे माकूल है। आज जो लोग सारी समस्याओं का हल गोली से खोजने का प्रयास कर रहे हैं उन्हें इन दिनों की संघर्ष गाथा कुछ कह रही है।

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